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कावेरी विवाद के बीच तमिलनाडु-कर्नाटक बस सेवा रोकी गई, होसुर बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ी

होसुर सीमा पर सुरक्षा बढ़ी, बसें रोकीं

Cauvery Water Dispute: कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए तमिलनाडु से कर्नाटक जाने वाली बस सेवाओं को रविवार को अस्थायी रूप से रोक दिया गया। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु-कर्नाटक सीमा के होसुर इलाके में यह कदम उठाया गया।इस फैसले के कारण बेंगलुरु और कर्नाटक के दूसरे शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

होसुर बस स्टैंड पर रोकी गईं बसें

अधिकारियों के मुताबिक, तमिलनाडु से कर्नाटक जाने वाली राज्य परिवहन निगम की बसों को होसुर बस स्टैंड पर ही रोक दिया गया। इन बसों को कर्नाटक की सीमा में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।हालांकि, कर्नाटक से तमिलनाडु आने वाली बस सेवाएं पहले की तरह चलती रहीं। इससे तमिलनाडु की ओर आने वाले यात्रियों की यात्रा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

यात्रियों को करनी पड़ी वैकल्पिक व्यवस्था

बस सेवाएं बंद होने के बाद कई यात्रियों को अपनी यात्रा पूरी करने के लिए दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा।होसुर से बेंगलुरु जाने वाले यात्रियों ने पहले स्थानीय टाउन बसों से तमिलनाडु सीमा तक सफर किया। इसके बाद उन्होंने ऑटो-रिक्शा से कर्नाटक के अत्तीबेले तक यात्रा की और वहां से बस या अन्य वाहनों के जरिए बेंगलुरु पहुंचे।इस पूरी प्रक्रिया में यात्रियों को काफी समय लगा और उन्हें अतिरिक्त किराया भी खर्च करना पड़ा।

प्रशासन ने निजी कारों, व्यावसायिक वाहनों और मालवाहक ट्रकों की आवाजाही पर कोई रोक नहीं लगाई। राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात सामान्य बना रहा।हालांकि, सीमा क्षेत्र में सुरक्षा जांच बढ़ा दी गई। पुलिस ने वाहनों की सख्ती से जांच शुरू कर दी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात

कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होसुर-अत्तीबेले सीमा सहित अन्य संवेदनशील इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।अधिकारियों ने बताया कि कन्नड़ संगठनों के संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद कई दशकों पुराना है। यह मुद्दा समय-समय पर दोनों राज्यों के बीच तनाव का कारण बनता रहा है।हाल के दिनों में यह विवाद फिर सुर्खियों में आया है, क्योंकि कर्नाटक ने कावेरी नदी पर मेकेदातु में बैलेंसिंग रिजर्वायर (संतुलन जलाशय) बनाने का प्रस्ताव रखा है।

मेकेदातु परियोजना का तमिलनाडु कर रहा विरोध

तमिलनाडु सरकार लगातार मेकेदातु परियोजना का विरोध करती रही है। राज्य का कहना है कि इस परियोजना के बनने से कावेरी नदी के पानी में तमिलनाडु के हिस्से पर असर पड़ सकता है।तमिलनाडु का दावा है कि यह परियोजना कावेरी जल बंटवारे से जुड़े मौजूदा कानूनी फैसलों और न्यायाधिकरण के प्रावधानों के खिलाफ है।

किसान संगठनों ने भी जताया विरोध

तमिलनाडु के किसान संगठनों ने भी मेकेदातु परियोजना के खिलाफ कई बार प्रदर्शन किए हैं।किसानों का कहना है कि अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है तो राज्य में सिंचाई व्यवस्था और लोगों को मिलने वाली पेयजल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।फिलहाल प्रशासन पूरे मामले पर लगातार निगरानी रख रहा है। अंतरराज्यीय सीमा पर सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखा गया है, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे और जरूरी सेवाओं पर किसी तरह का अतिरिक्त प्रभाव न पड़े।अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को देखते हुए आगे के फैसले लिए जाएंगे।