IND vs ZIM: भारत ने दोहराया जून 2010 का पुराना रिकॉर्ड

 IND vs ZIM:

IND vs ZIM: भारत बनाम जिम्बाब्वे T20I सीरीज के तीसरे मुकाबले में भारत ने 35 रन से जीत दर्ज कर इतिहास दोहरा दिया। इस जीत के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज 3-0 से अपने नाम करते हुए जिम्बाब्वे का व्हाइटवॉश कर दिया। इससे पहले भारत ने जून 2010 में भी जिम्बाब्वे को टी20 सीरीज में व्हाइटवॉश किया था।

IND vs ZIM: वैभव की धमाकेदार पारी ने दिलाई जीत-

भारत को तीसरे T20I मुकाबले में जीत दिलाने में सबसे अहम भूमिका 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने निभाई। उनकी 81 रन की शानदार पारी की बदौलत भारत ने सीरीज पर कब्जा जमाते हुए 16 साल पुराना रिकॉर्ड दोहरा दिया।

IND vs ZIM: रयान बर्ल ने खेली सम्मानजनक पारी-

जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी पर नजर डालें तो सिर्फ रयान बर्ल ही संघर्ष करते नजर आए। उन्होंने 125.58 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करते हुए 54 रन की अर्धशतकीय पारी खेली। उनकी इस पारी में 5 चौके शामिल रहे।

दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन-

भारत की प्लेइंग इलेवन:
अभिषेक शर्मा, वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, रवि बिश्नोई, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, मयंक यादव।

जिम्बाब्वे की प्लेइंग इलेवन:
ब्रायन बेनेट, बेन करन, डायोन मायर्स, सिकंदर रज़ा (कप्तान), रयान बर्ल, वेस्ली मधेवेरे, तादिवानाशे मारुमानी (विकेटकीपर), ब्रैड इवांस, न्यूमैन न्यामहुरी, रिचर्ड नगारवा, ब्लेसिंग मुजारबानी

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WiFi Speed Slow: इंटरनेट की स्पीड बार-बार हो रही है कम? ये 3 गलतियां हो सकती हैं जिम्मेदार

 WiFi Speed Slow:

WiFi Speed Slow: आज के डिजिटल दौर में इंटरनेट हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। घर हो या ऑफिस, तेज इंटरनेट के लिए लोग महंगे ब्रॉडबैंड प्लान लेते हैं, लेकिन कई बार इसके बावजूद WiFi की स्पीड अचानक कम हो जाती है। ऐसे में लोग अक्सर इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर या राउटर को जिम्मेदार मानते हैं, जबकि समस्या कई बार हमारी छोटी-छोटी गलतियों की वजह से होती है।

WiFi Speed Slow: राउटर को गलत जगह रखना पड़ सकता है भारी-

वाईफाई की धीमी स्पीड का एक बड़ा कारण राउटर की गलत लोकेशन हो सकती है। कई लोग राउटर को कमरे के कोने, अलमारी के अंदर या टीवी के पीछे रख देते हैं, जिससे सिग्नल सही तरीके से पूरे घर में नहीं पहुंच पाते। बेहतर इंटरनेट स्पीड के लिए राउटर को घर के बीच में किसी ऊंची और खुली जगह पर रखना चाहिए। साथ ही इसे माइक्रोवेव, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से दूर रखना बेहतर होता है।

WiFi Speed Slow: ज्यादा डिवाइस कनेक्ट होने से भी घट सकती है स्पीड-

अगर एक ही WiFi नेटवर्क से कई डिवाइस जैसे मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, CCTV कैमरा और गेमिंग कंसोल जुड़े हुए हैं, तो इंटरनेट बैंडविड्थ सभी डिवाइस में बंट जाती है। ऐसे में जिन डिवाइस का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उन्हें WiFi से डिस्कनेक्ट कर देना चाहिए। इससे बाकी डिवाइस पर बेहतर इंटरनेट स्पीड मिल सकती है।

लंबे समय तक राउटर रीस्टार्ट न करना-

लगातार कई दिनों तक राउटर चालू रहने से कैश और अस्थायी नेटवर्क समस्याओं के कारण उसकी परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है।एक्सपर्ट्स के अनुसार, बेहतर परफॉर्मेंस के लिए हफ्ते में कम से कम एक बार राउटर को 30 से 60 सेकंड के लिए बंद करके दोबारा चालू करना चाहिए। साथ ही राउटर का फर्मवेयर अपडेट भी समय-समय पर चेक करते रहना चाहिए।

इन आसान तरीकों से बढ़ सकती है WiFi स्पीड-

राउटर की सही जगह, कम डिवाइस कनेक्शन और नियमित रीस्टार्ट जैसी छोटी आदतों से WiFi की स्पीड और परफॉर्मेंस में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है

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IND vs ZIM:

IND vs ZIM: भारतीय क्रिकेट के युवा सितारे वैभव सूर्यवंशी ने जिम्बाब्वे के खिलाफ टी20 सीरीज में शानदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। तीसरे और आखिरी टी20 मुकाबले में उनकी 81 रनों की तूफानी पारी की बदौलत भारत ने जिम्बाब्वे को 35 रन से हराकर सीरीज पर 3-0 से कब्जा … Read more

Punjab Paper Leak: CJP जल्द बताएगी नई रणनीति, अभिजीत दीपके ने दिए बड़े संकेत

Punjab Paper Leak:

Punjab Paper Leak: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि 36 दिनों तक चले आंदोलन के समाप्त होने के बाद संगठन जल्द ही अपनी नई रणनीति की घोषणा करेगा। उन्होंने कहा कि CJP अब केवल NEET से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देशभर में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं … Read more

NTA Exam Reform: नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनी हाई-पावर टास्क फोर्स, जानें कौन-कौन हैं सदस्य

NTA Exam Reform:

NTA Exam Reform: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने हाई-पावर टास्क फोर्स का गठन किया है। यह फैसला NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। टास्क फोर्स की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक … Read more

Gen-Z आंदोलन के बाद कैसा दिख रहा जंतर-मंतर? नारों की गूंज के बाद पसरा सन्नाटा

Jantar Mantar Protest:

Jantar Mantar Protest: कुछ दिन पहले तक जहां हजारों युवाओं की आवाजें गूंज रही थीं, वहीं जंतर-मंतर अब शांत नजर आ रहा है। बादलों और धूप की लुकाछिपी के बीच यहां ऐसा माहौल है, मानो किसी बड़े आयोजन के बाद सब कुछ थम गया हो। कल तक नारों, पोस्टरों और विरोध प्रदर्शनों से भरी यह जगह अब सन्नाटे में डूबी हुई है।

 Jantar Mantar Protest: कल तक नारों से गूंज रहा था जंतर-मंतर-

नीट पेपर लीक, परीक्षाओं में कथित धांधली और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर बीते एक महीने से बड़ी संख्या में युवा जंतर-मंतर पर जुटे थे। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के बैनर तले चले इस आंदोलन में किसी बड़े नेता की मौजूदगी नहीं थी। सोशल मीडिया की भाषा, मीम्स और रचनात्मक पोस्टरों के जरिए युवाओं ने अपनी बात रखी।

  Jantar Mantar Protest: अब सिर्फ बैरिकेड्स और सफाई का काम-

आंदोलन खत्म होने के बाद जंतर-मंतर पर टूटे बैरिकेड्स, कुचले पौधे, दीवारों पर लिखे नारे और टूटी टाइल्स ही आंदोलन की याद दिला रहे हैं। सफाई कर्मचारी पूरे इलाके को पहले जैसा बनाने में जुटे हैं। सुरक्षाकर्मी अब भी तैनात हैं और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है।

दुकानों पर लौटी सामान्य स्थिति, लेकिन भीड़ गायब-

जनपथ की अधिकांश दुकानें खुल चुकी हैं, हालांकि ग्राहकों की संख्या कम है। कुछ दुकानदारों का कहना है कि पिछले कई दिनों की भारी भीड़ के बाद अब यहां असामान्य शांति महसूस हो रही है।

युवाओं के चेहरे पर थकान, लेकिन जीत की खुशी-

आंदोलन में शामिल कुछ युवा अब भी जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। एक छात्र ने बताया कि वह चार दिन तक धरने में शामिल रहा और अब मांगें माने जाने के बाद संतोष है, लेकिन खाली पड़ा आंदोलन स्थल देखकर अजीब महसूस हो रहा है। वहीं एक युवती ने कहा कि सब खत्म हो गया, जिस पर उसके साथी ने जवाब दिया, “खत्म नहीं, जीतकर गए हैं।”

बुजुर्ग बोले- यह आंदोलन सबसे अलग था-

जंतर-मंतर से गुजर रहे एक बुजुर्ग ने कहा कि उन्होंने कई आंदोलन देखे हैं, लेकिन यह आंदोलन अलग था। उनके मुताबिक इसमें कोई बड़ा नेता नहीं था, सिर्फ युवा थे और उन्होंने अपनी बात प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाई।

एक पीढ़ी की नई पहचान बना यह आंदोलन-

इस आंदोलन ने दिखाया कि नई पीढ़ी अपनी बात रखने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय सोशल मीडिया, मीम्स और रचनात्मक विरोध का सहारा ले रही है। आंदोलन खत्म हो चुका है, लेकिन इसकी चर्चा और इससे जुड़े सवाल आने वाले दिनों तक जारी रहने की संभावना है

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India-Nepal Travel: नेपाल की भारत से खास मांग, बायोमेट्रिक ID से आसान हो सकती है यात्रा

India-Nepal Travel:

India-Nepal Travel: भारत और नेपाल के बीच यात्रा को और आसान बनाने के लिए नेपाल सरकार ने भारत से एक महत्वपूर्ण अनुरोध किया है। नेपाल ने अपने राष्ट्रीय बायोमेट्रिक पहचान पत्र (National ID Card) को भारत आने-जाने के लिए वैध दस्तावेज के रूप में मान्यता देने की मांग की है। यह प्रस्ताव कूटनीतिक माध्यम से नई दिल्ली भेजा गया है।

India-Nepal Travel: फिलहाल क्या हैं नियम-

अभी नेपाली नागरिकों को भारत की हवाई यात्रा के लिए पासपोर्ट या नागरिकता प्रमाण-पत्र की जरूरत होती है। वहीं भारतीय नागरिकों को नेपाल जाने के लिए पासपोर्ट या वोटर आईडी दिखाना होता है। यदि भारत इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो नेपाल का राष्ट्रीय पहचान पत्र यात्रा के लिए तीसरा आधिकारिक दस्तावेज बन जाएगा।

India-Nepal Travel: क्या है नेपाल का बायोमेट्रिक पहचान पत्र-

नेपाल ने वर्ष 2018 में डिजिटल राष्ट्रीय पहचान पत्र की शुरुआत की थी। इस कार्ड में फिंगरप्रिंट, चेहरे की तस्वीर और आंखों की पुतली जैसी बायोमेट्रिक जानकारी दर्ज होती है। वर्तमान में इसका उपयोग सरकारी सेवाओं और बैंकिंग में अनिवार्य किया जा चुका है।

यात्रा होगी और आसान-

प्रस्ताव मंजूर होने पर नेपाली नागरिक थल और हवाई दोनों मार्गों से सिर्फ राष्ट्रीय पहचान पत्र के आधार पर भारत की यात्रा कर सकेंगे। इससे सीमा पार यात्रा करने वाले लाखों लोगों को सुविधा मिलेगी और यात्रा से जुड़ा रिकॉर्ड भी बेहतर तरीके से रखा जा सकेगा।

1950 की संधि से खुली है सीमा-

भारत और नेपाल के बीच 1950 की शांति और मैत्री संधि के तहत दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के एक-दूसरे के यहां आ-जा सकते हैं और काम भी कर सकते हैं। इस प्रस्ताव पर भारतीय दूतावास और नेपाली अधिकारियों के बीच सकारात्मक बातचीत भी हुई है

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रूस पर यूक्रेनी युद्धबंदियों के खिलाफ यौन हिंसा को हथियार बनाने का आरोप

WSJ Report:

WSJ Report: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूसी सेना ने यूक्रेनी युद्धबंदियों और आम नागरिकों के खिलाफ यौन हिंसा को एक सुनियोजित रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया। रिपोर्ट यूक्रेनी अभियोजकों, संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं और पूर्व युद्धबंदियों के बयानों पर आधारित है।

WSJ Report: ‘मुझे मानसिक रूप से तोड़ना चाहते थे’-

रिपोर्ट में यूक्रेनी सैनिक सेरही बॉयचुक का बयान भी शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि दो साल से अधिक समय तक कैद के दौरान उनके साथ गंभीर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य उन्हें मानसिक रूप से तोड़ना था।

WSJ Report: संयुक्त राष्ट्र ने दर्ज किए सैकड़ों मामले-

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, युद्ध के दौरान कथित यौन हिंसा के करीब 310 मामलों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, गुप्तांगों पर हमला और बिजली के झटके देने जैसे आरोप शामिल हैं। पीड़ितों में पुरुष, महिलाएं और लड़कियां शामिल हैं।

यूक्रेनी जांचकर्ताओं का दावा-

यूक्रेनी अभियोजकों का कहना है कि इन घटनाओं का तरीका यह संकेत देता है कि यह केवल कुछ सैनिकों की हरकत नहीं थी, बल्कि एक व्यापक और संगठित पैटर्न का हिस्सा हो सकता है। पूर्व अंतरराष्ट्रीय अभियोजक डेविड श्वेंडिमैन ने भी कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हुई घटनाओं से वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी से इनकार करना मुश्किल है।

बिजली के झटके देने के भी आरोप-

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ कैदियों के गुप्तांगों से तार जोड़कर उन्हें बिजली के झटके दिए गए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कुछ जेल कर्मी इस यातना को कथित तौर पर “पुतिन को कॉल” कहकर संबोधित करते थे।

रूस ने आरोपों पर नहीं दी प्रतिक्रिया-

रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेनी जांचकर्ताओं ने रूस के भीतर कई हिरासत केंद्रों में कथित उत्पीड़न के मामलों का दावा किया है। हालांकि, क्रेमलिन और रूस की फेडरल प्रिजन सर्विस ने इन आरोपों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है

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PM Modi Video:

PM Modi Video: नीट पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छात्रों के लिए अपना तीसरा वीडियो संदेश जारी किया। करीब 1 मिनट 20 सेकंड के इस वीडियो में उन्होंने परीक्षा सुधार (Exam Reform) के लिए बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणी की अगुवाई में एक हाई … Read more

2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे सिद्धारमैया, जानिए इस फैसले के राजनीतिक मायने

 Siddaramaiah Retirement:

Siddaramaiah Retirement: कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने बड़ा राजनीतिक ऐलान करते हुए कहा है कि वह 2028 में होने वाला कर्नाटक विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह चुनावी राजनीति से दूरी बनाएंगे, लेकिन सक्रिय राजनीति में रहकर कांग्रेस के लिए मार्गदर्शन और संगठनात्मक भूमिका निभाते … Read more