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Gen-Z आंदोलन के बाद कैसा दिख रहा जंतर-मंतर? नारों की गूंज के बाद पसरा सन्नाटा

Jantar Mantar Protest:

Jantar Mantar Protest: कुछ दिन पहले तक जहां हजारों युवाओं की आवाजें गूंज रही थीं, वहीं जंतर-मंतर अब शांत नजर आ रहा है। बादलों और धूप की लुकाछिपी के बीच यहां ऐसा माहौल है, मानो किसी बड़े आयोजन के बाद सब कुछ थम गया हो। कल तक नारों, पोस्टरों और विरोध प्रदर्शनों से भरी यह जगह अब सन्नाटे में डूबी हुई है।

 Jantar Mantar Protest: कल तक नारों से गूंज रहा था जंतर-मंतर-

नीट पेपर लीक, परीक्षाओं में कथित धांधली और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर बीते एक महीने से बड़ी संख्या में युवा जंतर-मंतर पर जुटे थे। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के बैनर तले चले इस आंदोलन में किसी बड़े नेता की मौजूदगी नहीं थी। सोशल मीडिया की भाषा, मीम्स और रचनात्मक पोस्टरों के जरिए युवाओं ने अपनी बात रखी।

  Jantar Mantar Protest: अब सिर्फ बैरिकेड्स और सफाई का काम-

आंदोलन खत्म होने के बाद जंतर-मंतर पर टूटे बैरिकेड्स, कुचले पौधे, दीवारों पर लिखे नारे और टूटी टाइल्स ही आंदोलन की याद दिला रहे हैं। सफाई कर्मचारी पूरे इलाके को पहले जैसा बनाने में जुटे हैं। सुरक्षाकर्मी अब भी तैनात हैं और इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी बनी हुई है।

दुकानों पर लौटी सामान्य स्थिति, लेकिन भीड़ गायब-

जनपथ की अधिकांश दुकानें खुल चुकी हैं, हालांकि ग्राहकों की संख्या कम है। कुछ दुकानदारों का कहना है कि पिछले कई दिनों की भारी भीड़ के बाद अब यहां असामान्य शांति महसूस हो रही है।

युवाओं के चेहरे पर थकान, लेकिन जीत की खुशी-

आंदोलन में शामिल कुछ युवा अब भी जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। एक छात्र ने बताया कि वह चार दिन तक धरने में शामिल रहा और अब मांगें माने जाने के बाद संतोष है, लेकिन खाली पड़ा आंदोलन स्थल देखकर अजीब महसूस हो रहा है। वहीं एक युवती ने कहा कि सब खत्म हो गया, जिस पर उसके साथी ने जवाब दिया, “खत्म नहीं, जीतकर गए हैं।”

बुजुर्ग बोले- यह आंदोलन सबसे अलग था-

जंतर-मंतर से गुजर रहे एक बुजुर्ग ने कहा कि उन्होंने कई आंदोलन देखे हैं, लेकिन यह आंदोलन अलग था। उनके मुताबिक इसमें कोई बड़ा नेता नहीं था, सिर्फ युवा थे और उन्होंने अपनी बात प्रभावी ढंग से सरकार तक पहुंचाई।

एक पीढ़ी की नई पहचान बना यह आंदोलन-

इस आंदोलन ने दिखाया कि नई पीढ़ी अपनी बात रखने के लिए पारंपरिक तरीकों के बजाय सोशल मीडिया, मीम्स और रचनात्मक विरोध का सहारा ले रही है। आंदोलन खत्म हो चुका है, लेकिन इसकी चर्चा और इससे जुड़े सवाल आने वाले दिनों तक जारी रहने की संभावना है

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