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JPSC भर्ती विवाद- सरकार से बातचीत को तैयार छात्र: 2 शर्तें रखीं, बोले- CM से हो सीधी वार्ता, मीडिया भी रहे मौजूद

JPSC विवाद: छात्रों की 5 बड़ी मांगें

JPSC Exam Scam: झारखंड में JPSC समेत अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। अब प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए सहमति दे दी है, लेकिन इसके लिए उन्होंने दो अहम शर्तें रखी हैं। छात्रों का कहना है कि बातचीत सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ होनी चाहिए। साथ ही बैठक में कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधि मौजूद रहें, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और किसी तरह की गलतफहमी न हो।

सरकार का प्रस्ताव और छात्रों की आपत्ति

छात्र नेता रविंद्र पासवान ने बताया कि बुधवार को SDO सरकार का प्रस्ताव लेकर आंदोलन स्थल पहुंचे थे। उन्होंने छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के नाम मांगे हैं, जिसके बाद बैठक की तारीख और समय तय किया जाएगा। हालांकि, छात्रों का आरोप है कि सरकार केवल पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि सभी पक्षों की बात खुलकर सामने आनी चाहिए।

13वें दिन भी जारी आंदोलन

रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का धरना 13वें दिन भी जारी रहा। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत छह छात्र आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षा से जुड़े पूरे मामले की जांच CBI और ED से कराई जाए। उनका कहना है कि केवल CID की जांच पर उन्हें भरोसा नहीं है। दूसरी ओर, CID ने इस मामले में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब तक कुल 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

19 अप्रैल 2026 को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित हुई थी। इसके बाद 2 जुलाई 2026 को आयोग ने परीक्षा परिणाम जारी किया, जिसमें 103 पदों के लिए 2,204 उम्मीदवारों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए किया गया। मुख्य परीक्षा 18 से 20 जुलाई के बीच आयोजित होनी थी।

लेकिन परिणाम जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि आयोग ने कट-ऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक उम्मीदवार की कथित OMR शीट वायरल हुई। दावा किया गया कि उम्मीदवार ने केवल 48 प्रश्न हल किए थे, फिर भी उसका चयन मुख्य परीक्षा के लिए हो गया। इसके अलावा, रिजल्ट पर आयोग के अधिकारियों के हस्ताक्षर नहीं होने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। मामला बढ़ने के बाद JPSC ने मुख्य परीक्षा रद्द कर दी।

अब तक क्या-क्या हुआ?

परीक्षा विवाद सामने आने के बाद घटनाक्रम तेजी से बदला। 20 जुलाई 2026 को CID ने JPSC कार्यालय में छापेमारी की और तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया। 21 जुलाई को उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया गया और मामले में FIR दर्ज हुई। 23 जुलाई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे मामले की जांच CID को सौंप दी, जिसके बाद कई स्थानों पर छापेमारी की गई। 25 जुलाई को JPSC-JSSC ने 25 जुलाई से 29 सितंबर के बीच होने वाली नौ परीक्षाएं स्थगित कर दीं। इसी दिन छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में रांची में आंदोलन शुरू हुआ। 2 अगस्त से देवेंद्र नाथ महतो आमरण अनशन पर बैठ गए। 5 अगस्त तक परीक्षा नियंत्रक रवेता गुप्ता समेत 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी, जबकि पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते से कई घंटे तक पूछताछ की गई। वहीं, अब तक कुल 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

बुधवार को क्या-क्या हुआ?

बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे SDO कुमार रजत और ADM धनंजय कुमार मुख्यमंत्री का संदेश लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे। उन्होंने छात्रों को सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव दिया। इसके लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चार मंत्रियों की एक समिति बनाई है। इस समिति में उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, कल्याण मंत्री चमरा लिंडा और उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर इन मंत्रियों के साथ बैठक कर छात्रों से बातचीत की रणनीति पर चर्चा की। इसके बाद छात्र नेताओं को वार्ता का निमंत्रण भेजा गया, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी।इसी दौरान छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जिन्होंने 2 अगस्त से अन्न और जल का त्याग कर रखा था, उनसे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल पर बात की। उनकी अपील पर देवेंद्र नाथ महतो ने पानी तो पी लिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनका आमरण अनशन पहले की तरह जारी रहेगा।

छात्रों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि 14वीं JPSC परीक्षा की जांच CBI और ED से कराई जाए, क्योंकि उन्हें केवल CID जांच पर भरोसा नहीं है। वे चाहते हैं कि मामले की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाया जाए, ताकि जल्द फैसला हो सके। छात्रों ने TDPL (टीम्सआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने की भी मांग की है। इसके साथ ही TDPL को ब्लैकलिस्ट कर भविष्य की परीक्षाएं TCS जैसी भरोसेमंद एजेंसी से कराने की मांग की गई है। छात्रों का यह भी कहना है कि JPSC और JSSC के जिन अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, उन्हें हटाकर उनकी जगह साफ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।

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