India US Relations: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत की जानकारी खुद पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के जरिए दी। दोनों नेताओं ने भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की।फोन पर हुई इस बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने जेडी वेंस और उनकी पत्नी को उनके बेटे के जन्म पर बधाई भी दी। प्रधानमंत्री ने पूरे परिवार के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
पीएम मोदी ने एक्स पर दी जानकारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस फोन कॉल की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का उनके पास फोन आया था।पीएम मोदी ने कहा कि बातचीत में भारत और अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आगे बढ़ाने और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा हुई। उन्होंने जेडी वेंस और ‘सेकंड लेडी’ को बेटे के जन्म पर बधाई दी और उनके पूरे परिवार के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
अमेरिकी सीनेट में रूस से जुड़े बिल को मंजूरी
पीएम मोदी और जेडी वेंस के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को रूस से जुड़े एक महत्वपूर्ण बिल को मंजूरी दी है। इस बिल को दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों का समर्थन मिला है।इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उन देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं। भारत और चीन भी ऐसे देशों में शामिल हैं।
इस प्रस्ताव के पीछे तर्क यह है कि रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों का व्यापार मॉस्को की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। इससे रूस को यूक्रेन में चलाए जा रहे अपने सैन्य अभियानों के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने में मदद मिलती है।
86-11 वोट से पास हुआ बिल
अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट’ को 86-11 के भारी बहुमत से मंजूरी दी। इस कानून का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है। वह इस कानून को तैयार करने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे।इस कानून का मुख्य उद्देश्य रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। इसके अलावा उन देशों पर भी दबाव बनाने की योजना है, जिनके रूस के साथ बड़े स्तर पर ऊर्जा व्यापारिक संबंध हैं।कानून के प्रावधानों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के दुनिया के पांच सबसे बड़े खरीदारों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की ताकत मिल सकती है।
रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने की कोशिश
इस कानून में सिर्फ रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों को निशाना बनाने की बात नहीं है। इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं और रूस की युद्ध गतिविधियों से जुड़ी संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी शामिल है।इसके अलावा उन पुराने और दोबारा झंडा बदलकर इस्तेमाल किए जा रहे तेल टैंकरों पर भी अमेरिकी प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाने की योजना है, जिनका कथित तौर पर रूस वैश्विक प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल करता है।इन टैंकरों के जरिए रूस अपनी ऊर्जा से होने वाली कमाई को बनाए रखने की कोशिश करता है। इस कानून का व्यापक उद्देश्य उन वित्तीय स्रोतों पर रोक लगाना है, जो रूस की अर्थव्यवस्था और उसकी सैन्य गतिविधियों को आर्थिक मदद पहुंचा रहे हैं।
रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर बढ़ सकता है दबाव
प्रस्तावित कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूसी तेल या प्राकृतिक गैस के दुनिया के शीर्ष पांच खरीदारों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।चीन के साथ भारत भी रूसी कच्चे तेल के दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल है। ऐसे में इस कानून का असर भारत जैसे देशों पर पड़ने की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है।इस कदम के जरिए ऊर्जा खरीदने वाले देशों के सामने एक तरह का विकल्प रखने की कोशिश की जा रही है। उन्हें या तो रियायती कीमतों पर रूसी ऊर्जा खरीदना जारी रखना होगा या फिर अमेरिकी बाजार तक अपनी लाभकारी पहुंच को बनाए रखना होगा।
2022 के बाद भारत ने बढ़ाई रूसी तेल की खरीद
रूस और यूक्रेन के बीच 2022 में संघर्ष शुरू होने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में काफी अस्थिरता देखने को मिली थी। इस दौरान अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई।भारत ने मुख्य रूप से रियायती कीमतों पर रूसी कच्चा तेल खरीदा। इससे देश को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के बीच अपनी जरूरतें पूरी करने में मदद मिली।ऐसे समय में पीएम मोदी और जेडी वेंस के बीच हुई बातचीत को भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर तब जब रूस से ऊर्जा व्यापार को लेकर अमेरिका में नए प्रतिबंधों और टैरिफ पर चर्चा चल रही है।
यह भी पढ़े- श्रीकृष्ण जन्मभूमि कारसेवा का आज होगा शंखनाद, 12 साधु-संतों को रेड कार्ड नोटिस








