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क्या भारत में पहली बार बनी थी चीनी? फारस और अरब तक ऐसे पहुंची, जानिए पूरी कहा

Sugarcane History

Sugarcane History: देश में इन दिनों चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच इसके इतिहास की चर्चा भी तेज हो गई है। भारत दुनिया में चीनी उत्पादन के प्रमुख देशों में शामिल है और गन्ने की खेती तथा चीनी बनाने की तकनीक के विकास में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। कई ऐतिहासिक विवरणों में भारत से चीनी बनाने की तकनीक के फारस और फिर अरब दुनिया तक पहुंचने का उल्लेख मिलता है। हालांकि, यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि दुनिया में गन्ने या मिठास का इस्तेमाल सबसे पहले भारत में हुआ था। भारत ने खास तौर पर गन्ने के रस से ठोस और दानेदार चीनी बनाने की तकनीक को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई।

भारत में कैसे विकसित हुई चीनी बनाने की तकनीक

भारत में गन्ने की खेती का इतिहास हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। प्राचीन भारतीय ग्रंथों में गन्ने के लिए ‘इक्षु’ और चीनी के लिए ‘शर्करा’ जैसे शब्द मिलते हैं। गन्ने के रस, गुड़ और अन्य उत्पादों का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों के साथ-साथ औषधीय रूप में भी किया जाता था। समय के साथ भारत में गन्ने का रस निकालने, उसे उबालने, गाढ़ा करने और सुरक्षित रखने की तकनीक विकसित हुई। इसी प्रक्रिया से गुड़, खांड और बाद में दानेदार चीनी जैसे उत्पाद तैयार होने लगे।

Sugarcane History: क्या क्रिस्टल चीनी का विकास भारत में हुआ

भारत में गन्ने के रस से क्रिस्टल या दानेदार चीनी तैयार करने की तकनीक काफी पुरानी मानी जाती है। यह किसी एक व्यक्ति का आविष्कार नहीं था, बल्कि कई पीढ़ियों में विकसित हुई प्रक्रिया थी। रस को साफ करके उबालने और फिर ठंडा करने पर चीनी के दाने बनने लगते थे। उस दौर की चीनी आज की तरह सफेद और रिफाइंड नहीं होती थी, लेकिन यह गुड़ से अलग एक महत्वपूर्ण उत्पाद था। भारतीय खांड और शर्करा व्यापार के जरिए दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचने लगी।

फारस और अरब दुनिया तक कैसे पहुंची

भारत और फारस के बीच प्राचीन काल से व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। व्यापारियों और यात्रियों के जरिए गन्ने की किस्मों और चीनी बनाने का ज्ञान फारस तक पहुंचा। छठी-सातवीं शताब्दी के आसपास फारस में गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन को बढ़ावा मिला। इसके बाद अरब दुनिया में भी यह तकनीक पहुंची। अरब किसानों ने इराक, सीरिया, मिस्र और उत्तरी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में गन्ने की खेती का विस्तार किया। सिंचाई व्यवस्था और उत्पादन तकनीक में सुधार के साथ चीनी का कारोबार भूमध्यसागर तक पहुंचा।

Sugarcane History: फिर यूरोप और पूरी दुनिया में फैली चीनी

अरब व्यापारियों के माध्यम से चीनी यूरोप के कई हिस्सों तक पहुंची। शुरुआती दौर में यह महंगी वस्तु थी और मुख्य रूप से अमीर वर्ग तक सीमित थी। बाद में औपनिवेशिक दौर में बड़े पैमाने पर गन्ने की खेती और चीनी उत्पादन शुरू हुआ। इसलिए यह कहना ज्यादा सही है कि भारत ने गन्ने से दानेदार चीनी बनाने की तकनीक के विकास में अग्रणी भूमिका निभाई और यह ज्ञान व्यापार व सांस्कृतिक संपर्कों के जरिए फारस और अरब दुनिया तक पहुंचा। गन्ने की शुरुआती उत्पत्ति का इतिहास दक्षिण-पूर्व एशिया से भी जुड़ा है, इसलिए चीनी का इतिहास कई सभ्यताओं के योगदान से बना है।

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