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कॉकरोच जनता पार्टी अब पहले जैसा आंदोलन खड़ा नहीं कर पाएगी, क्या हैं चुनौतियां?

Cockroach Janata Party longer be able launch movement

CJP Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) एक बार फिर सरकार के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखा रही है। सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए पार्टी नेताओं ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पहले जैसा आंदोलन खड़ा कर पाएगी? क्या उसके नेताओं की अपील पर युवा पहले की तरह बड़ी संख्या में गोलबंद हो पाएंगे?

CJP नेताओं की विश्वसनीयता पर सवाल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कहना है कि 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही केंद्र सरकार ने सीजेपी की प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एफआईआर वापस लेने समेत कई मांगों पर सहमति दी थी, लेकिन अब सरकार अपने वादों पर कायम नहीं है।CJP नेताओं ने सरकार के खिलाफ मार्च का ऐलान तो किया है, लेकिन उन्हें यह भी देखना होगा कि क्या युवाओं के बीच उनकी पहली जैसी विश्वसनीयता आज भी बरकरार है? उन्हें यह नहीं भूलना होगा कि इस बीच सोशल मीडिया पर उनको लेकर तमाम तरह की बातें उठी हैं।

CJP Protest: अभिजीत दीपके कटघरे में!

सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर सवाल उठे कि उनके पिता की आय इतनी नहीं है कि वे अमेरिका में जाकर महंगी पढ़ाई कर सकें।सवाल उठे कि कहां से उन्हें पैसा मिला? इसके साथ ही सीजेपी नेताओं पर झारखंड में युवाओं के आंदोलन को गंभीरता से न लेने के आरोप लगे। उन्हें ताने दिये गये कि वे दोहरा रवैया अपना रहे हैं।

हिंसा भड़काने के आरोप

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी नेताओं पर हिंसा फैलाने के आरोप लगे।कहा गया कि फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और विदेशी बॉट नेटवर्क के माध्यम से आपत्तिजनक रील्स, भड़काऊ वीडियो और एआई-जनरेटेड सामग्री को वायरल कर आंदोलन को उग्र बनाने की कोशिश की गई।यह भी आरोप लगा कि सीजेपी के इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अधिकांश फॉलोअर्स देश के बाहर यानी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अमेरिका जैसे देशों के हैं।हालांकि सीजेपी नेताओं ने इन आरोपों का खंडन किया है, लेकिन उनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे, तो इसका कुछ न कुछ नुकसान उन्हें अवश्य हो सकता है।

CJP Protest: सीजेपी आंदोलन का राजनीतिक संदेश

सीजेपी ने नीट पेपर लीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर देशभर के युवाओं को गोलबंद किया, लेकिन सीजेपी नेताओं पर मीडिया या सोशल मीडिया में जो आरोप लगे, उन्हें देखते हुए बहुत से छात्रों और युवाओं के दिलो-दिमाग में सवाल उठ सकते हैं कि कहीं उनके मुद्दों का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए तो नहीं किया जा रहा है।सीजेपी आंदोलन का राजनीतिक संदेश भाजपा और सरकार के खिलाफ गया, तो कई राज्यों में विरोध और झड़पें भी देखने को मिली हैं।ऐसे में सीजेपी नेताओं के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वे कैसे छात्रों और युवाओं के बीच पहले की तरह विश्वसनीयता बनाए रख पाते हैं। CJP नेताओं की एक बड़ी कमी यह रही कि उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद जमीनी स्तर पर अपने संगठन की मजबूती पर विशेष ध्यान नहीं दिया।ठीक है कि आज सोशल मीडिया का जमाना है, लेकिन अंत में ठोस नतीजे जमीनी काम के ही आते हैं।

लेखक: Data Ram Chamoli

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