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एक बस, 43 किलोमीटर और कई सवाल; नाबालिग से दरिंदगी के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, जानें पूरी कहानी

नोएडा से दिल्ली तक बस में नाबालिग से अपराध

Delhi Bus Gang Rape Case: उत्तर प्रदेश के सबसे विकसित शहरों में गिने जाने वाले नोएडा से एक बस देश की राजधानी दिल्ली की ओर जा रही थी। रात का समय था और इसी बस में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित तौर पर दरिंदगी की जा रही थी। हैरानी की बात यह है कि बस करीब 43 किलोमीटर तक चलती रही, लेकिन रास्ते में किसी पुलिसकर्मी ने उसे रोककर जांच नहीं की।

यह घटना 2012 के निर्भया कांड के कई साल बाद हुई है। निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक और निजी बसों के लिए कई नियम बनाए गए थे। इनमें रात के समय बसों में ऐसे पर्दे नहीं लगाने का नियम भी शामिल था, जिनसे अंदर की गतिविधियां बाहर से दिखाई न दें।इस मामले में स्थिति और गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि जिस बस में वारदात हुई, उसकी खिड़कियों पर गहरे पीले रंग के पर्दे लगे हुए थे। इन पर्दों की वजह से बस के अंदर क्या हो रहा है, यह बाहर से दिखाई देना मुश्किल था।

मामला सामने आने के बाद सिस्टम और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि जिस बस का इस्तेमाल इस वारदात में हुआ, उसका ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का रिकॉर्ड पहले से मौजूद था और उसके कई चालान कट चुके थे।इस पूरे रूट की स्थिति समझने के लिए एक मीडिया टीम ने ग्रेटर नोएडा के परी चौक से लेकर दिल्ली के कश्मीरी गेट तक करीब 43 किलोमीटर का सफर किया। इस दौरान जो स्थिति सामने आई, उसने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।

Delhi Bus Gang Rape Case: बारिश में नाबालिग को बस में बैठाया

मामला ग्रेटर नोएडा के परी चौक से शुरू हुआ। एक नाबालिग छात्रा को नोएडा के सेक्टर-63 जाना था। उस समय बारिश हो रही थी और उसे वहां जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा था।इसी दौरान बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसे सेक्टर-63 तक छोड़ने की बात कहकर बस में बैठा लिया। आरोप है कि दोनों ने बस को सेक्टर-63 ले जाने के बजाय दिल्ली के कश्मीरी गेट की ओर मोड़ दिया।बस करीब 43 किलोमीटर तक चलती रही और इसी दौरान नाबालिग के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया। बाद में उसे कश्मीरी गेट पर उतार दिया गया।

परी चौक पर पुलिस बूथ और PCR मौजूद

एक मीडिया टीम ने इस पूरे 43 किलोमीटर के रास्ते की पड़ताल की। सफर की शुरुआत ग्रेटर नोएडा के परी चौक से की गई, जहां से नाबालिग बस में सवार हुई थी।यहां घटनास्थल के शुरुआती बिंदु से करीब 20 कदम की दूरी पर सड़क किनारे एक पुलिस बूथ दिखाई दिया। इसके अलावा वहां एक PCR वैन और भारी बैरिकेडिंग भी मौजूद थी।ऐसे में सवाल उठता है कि जब इस जगह पर पुलिस की मौजूदगी और बैरिकेडिंग जैसी व्यवस्था थी, तो बस इस घटना के बाद बिना किसी जांच के आगे कैसे निकल गई।

Delhi Bus Gang Rape Case: नोएडा से दिल्ली तक बस में नाबालिग से अपराध
नोएडा से दिल्ली तक बस में नाबालिग से अपराध
दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर बैरिकेडिंग, लेकिन पुलिसकर्मी नहीं दिखे

इसके बाद टीम मयूर विहार के पास दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर पहुंची। यहां बैरिकेडिंग मौजूद थी, लेकिन दिन के समय की गई पड़ताल में कोई पुलिसकर्मी नजर नहीं आया।इसके बाद टीम मयूर विहार के पास स्थित दिल्ली-नोएडा इंटरसेक्शन पर पहुंची। यह इस रास्ते के सबसे व्यस्त हिस्सों में से एक है। यहां भी सड़क पर भारी बैरिकेडिंग की गई थी, लेकिन दिन में कोई पुलिसकर्मी दिखाई नहीं दिया।हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह जांच दिन के समय की गई थी। इसलिए उस समय पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थे, इससे यह साबित नहीं होता कि 4 अगस्त की रात को वहां पुलिस की तैनाती थी या नहीं।

Delhi Bus Gang Rape Case: व्यस्त चौराहे पर CCTV कैमरे भी नहीं मिले

इस पूरे रास्ते की पड़ताल के दौरान एक और बड़ी कमी सामने आई। मयूर विहार के पास चौराहे पर लगे ट्रैफिक सिग्नल के आसपास CCTV कैमरे दिखाई नहीं दिए।इतने व्यस्त चौराहे पर CCTV कैमरों की गैरमौजूदगी लगातार निगरानी की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। खासकर तब, जब यह रास्ता दिल्ली और नोएडा के बीच आने-जाने के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

कश्मीरी गेट पर नहीं दिखा चेक प्वाइंट

43 किलोमीटर का सफर पूरा करने के बाद टीम कश्मीरी गेट पहुंची। यही वह जगह है, जहां बस ने नाबालिग छात्रा को उतारा था।कश्मीरी गेट इलाके में पड़ताल के दौरान सड़क पर कोई स्पष्ट चेक प्वाइंट या बैरिकेडिंग नजर नहीं आई।इससे यह सवाल भी उठता है कि नोएडा से दिल्ली तक आने वाली बसों की रात के समय किस तरह निगरानी की जाती है और क्या इस रूट पर नियमित जांच होती है।

बस की खिड़कियों पर लगे थे गहरे पीले पर्दे

जिस स्लीपर बस में नाबालिग के साथ वारदात हुई, उसकी खिड़कियों पर गहरे पीले रंग के पर्दे लगे हुए थे। ये पर्दे इतने गहरे थे कि बाहर से बस के अंदर की गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही थीं।2012 के निर्भया कांड के बाद महिलाओं की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों ने सार्वजनिक और निजी बसों के लिए कई सख्त नियम और दिशा-निर्देश जारी किए थे।सुप्रीम कोर्ट और परिवहन विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत बसों की खिड़कियों पर ऐसे गहरे या काले पर्दे और फिल्म लगाने पर रोक लगाई गई थी, जिनसे बस के अंदर की गतिविधियां बाहर से दिखाई न दें।इसके बावजूद इस बस में ऐसे पर्दे लगे हुए थे। ऐसे में सवाल उठता है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली यह बस सड़कों पर कैसे चलती रही।

Delhi Bus Gang Rape Case: पिछले 23 दिनों में 9 बार कटा चालान

बस के ड्राइवर कुलदीप का ट्रैफिक रिकॉर्ड भी कई सवाल खड़े करता है। आधिकारिक ट्रैफिक रिकॉर्ड और पुलिस जांच से पता चला कि वह पहले भी कई बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर चुका था।रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ सिर्फ पिछले 23 दिनों में 9 चालान किए गए थे। इनमें 8 मामले ओवरस्पीडिंग से जुड़े थे।इससे पता चलता है कि बस का ड्राइवर लगातार ट्रैफिक नियमों की अनदेखी कर रहा था।

करीब 11 महीने में 11 बार नियमों का उल्लंघन

रिकॉर्ड के मुताबिक, यह बस फिरोजाबाद RTO कार्यालय में 28 अप्रैल 2026 को रजिस्टर्ड हुई थी।ऑनलाइन ट्रैफिक रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि करीब 11 महीने की अवधि में इस बस के खिलाफ 11 बार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के मामले सामने आए। ये चालान 12 मई से 23 जुलाई के बीच काटे गए थे।पुलिस और ट्रैफिक विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, ड्राइवर कुलदीप तेज रफ्तार में बस चलाता था। इसके अलावा बिना इंडिकेटर दिए अचानक लेन बदलना और खतरनाक तरीके से बस चलाना भी उसके खिलाफ सामने आए मामलों में शामिल है।यमुना एक्सप्रेसवे और नोएडा सेक्टर-168 जैसे व्यस्त रास्तों पर भी बस को तेज गति से चलाकर यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डालने के मामले सामने आए।दिल्ली और नोएडा के अलग-अलग इलाकों में भी इस बस के चालान काटे गए थे।

Delhi Bus Gang Rape Case: जुलाई में ही 56 हजार रुपये के चालान

बस ड्राइवर कुलदीप के खिलाफ अकेले जुलाई महीने में करीब 56 हजार रुपये के चालान किए गए थे। इनमें से इन चालानों का भुगतान नहीं किया गया था।वहीं, मई और जून में काटे गए तीन चालानों का भुगतान किया जा चुका था।इस तरह जिस बस का इस्तेमाल नाबालिग के साथ दुष्कर्म जैसी गंभीर वारदात में किया गया, उसका ट्रैफिक रिकॉर्ड पहले से ही सवालों के घेरे में था। बस लगातार नियमों का उल्लंघन कर रही थी और उसके खिलाफ कई चालान भी दर्ज थे।

डिजिटल चालान सिस्टम के बावजूद सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर है।चालान सिस्टम डिजिटल होने के बाद पुलिस के पास किसी वाहन के ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का पूरा रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध रहता है। ऐसे में सवाल है कि जब एक बस पर पहले से कई चालान थे, कुछ चालान का भुगतान भी बाकी था और बस की खिड़कियों पर नियमों के खिलाफ पर्दे लगे हुए थे, तो पुलिस को इस बस की जानकारी क्यों नहीं मिली? अगर परी चौक से दिल्ली की ओर जा रही इस बस का ट्रैफिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद था, तो रास्ते में इसकी जांच क्यों नहीं हुई? यही सवाल अब पुलिस चेकिंग और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

Delhi Bus Gang Rape Case: ड्राइवर और कंडक्टर गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, बस में तकनीकी खराबी आने के बाद उसे ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर स्थित एक वर्कशॉप में ले जाया गया था। इसके बाद बस को पेंटिंग के लिए कश्मीरी गेट ले जाया जा रहा था।कश्मीरी गेट पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने ड्राइवर कुलदीप, जिसकी उम्र 39 साल बताई गई है, और कंडक्टर संदीप, जिसकी उम्र 26 साल है, को गिरफ्तार कर लिया।दोनों को तिमारपुर के एक पार्किंग लॉट से पकड़ा गया। पुलिस ने बस को भी जब्त कर लिया है और उसकी फोरेंसिक जांच की जा रही है।जांच के दौरान अधिकारियों को बस के अंदर लड़की के बाल भी मिले हैं। अब पुलिस इस मामले में फोरेंसिक साक्ष्यों और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल

इस पूरी घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।एक तरफ बसों में पर्दों को लेकर स्पष्ट नियम मौजूद हैं, दूसरी तरफ इस बस पर कई ट्रैफिक चालान पहले से दर्ज थे। इसके बावजूद बस नोएडा से दिल्ली तक करीब 43 किलोमीटर का सफर करती रही।

रास्ते में पुलिस बूथ, PCR वैन और बैरिकेडिंग जैसी व्यवस्थाएं होने के बावजूद बस की जांच नहीं हुई। वहीं, कुछ महत्वपूर्ण स्थानों पर CCTV कैमरों और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर भी सवाल सामने आए हैं।अब जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि इतने नियमों के उल्लंघन और पहले से मौजूद ट्रैफिक रिकॉर्ड के बावजूद बस पुलिस की निगरानी से कैसे बचती रही।

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