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फर्जी IAS तृप्ति का विधानसभा कनेक्शन आया सामने, सहेलियों संग ब्लॉग बनाते VIDEO ने बढ़ाई पुलिस की जांच

फर्जी IAS तृप्ति पर ठगी के आरोप

Fake IAS Fraud: मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में खुद को IAS अधिकारी बताकर लोगों से ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति सिंह राजपूत से जुड़े कुछ नए VIDEO सामने आए हैं। इन वीडियो में तृप्ति अपनी दो सहेलियों के साथ विधानसभा परिसर में घूमती और ब्लॉग बनाती हुई नजर आ रही है।एक वीडियो में तृप्ति लाल साड़ी पहने दिखाई दे रही है। इसी दौरान उसकी एक सहेली उसे ‘सीनियर’ बताती है। वहीं तृप्ति खुद कहती है कि वे ‘प्रोबेशनर’ हैं और थोड़े ‘बेवकूफ’ भी हैं। वीडियो में तीनों के बीच बातचीत, हंसी-मजाक और आपसी बातचीत साफ नजर आती है।

विधानसभा आई थीं, इसलिए बनाया पहला ब्लॉग

विधानसभा परिसर के बाहर शूट किए गए एक वीडियो में तृप्ति की सहेली बताती है कि वे विधानसभा अटेंड करने आई हैं। उसने कहा कि उन्हें लगा कि क्यों न अपना पहला ब्लॉग बनाया जाए।सहेली के मुताबिक, विधानसभा के अंदर फोटो और वीडियो बनाने की अनुमति नहीं है। इसलिए उन्होंने बाहर ही थोड़ा वीडियो शूट करने का फैसला किया।

फर्जी IAS तृप्ति पर ठगी के आरोप
फर्जी IAS तृप्ति पर ठगी के आरोप
Fake IAS Fraud: ‘हमारी हरकतें देखकर कोई अधिकारी नहीं समझेगा’

वीडियो में इसके बाद तृप्ति अपनी सहेलियों के साथ मजाक करते हुए कहती है कि उनकी हरकतों को देखकर कोई भी उन्हें अधिकारी नहीं समझेगा।तृप्ति कहती है कि जिस तरह वे तीनों व्यवहार कर रही हैं, उसे देखकर कोई यह सोच भी नहीं सकता कि वे IAS अधिकारी हैं। इसके बाद वह खुद को प्रोबेशनर बताती है और मजाक में कहती है कि वे थोड़े ‘बेवकूफ’ हैं।

सहेली ने बताया- तृप्ति हमारी सीनियर हैं

वीडियो में तृप्ति की एक सहेली कहती है, ‘नहीं-नहीं, हम दोनों प्रोबेशनर्स हैं, ये ऑलरेडी हमारी सीनियर हैं।’इसके जवाब में तृप्ति कहती है, ‘I want to lead probations, ठीक है? मैं सीनियर हूं, पर मैं इनके दोस्तों की तरह साथ हूं।’इन वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस तृप्ति की दोनों सहेलियों से भी पूछताछ कर सकती है।

लोगों का भरोसा जीतने के लिए वीडियो बनाने का शक

नए वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की जांच अब केवल चंदेरी में हुई कथित ठगी तक सीमित नहीं रही है। पुलिस को आशंका है कि तृप्ति अलग-अलग जगहों पर जाकर ऐसे वीडियो बनाती थी, जिनके जरिए वह लोगों के बीच अपनी पहचान और प्रभाव को मजबूत कर सके।पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तृप्ति ने कब से खुद को फर्जी अधिकारी के रूप में पेश करना शुरू किया था और इस पहचान से उसने कितने लोगों को प्रभावित किया।चंदेरी मामले में तृप्ति पर चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर कुल 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप है।तृप्ति के खिलाफ भोपाल के बागसेवनिया थाने में भी 39.17 लाख रुपये की धोखाधड़ी की FIR दर्ज है। इस मामले में MPT की होटल-रिसॉर्ट संपत्ति लीज पर दिलाने और नौकरी लगवाने के नाम पर पैसे लेने का आरोप है।पुलिस तृप्ति के भाई और अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

Fake IAS Fraud: पुलिस के सामने उठे 5 बड़े सवाल
  1. तीनों विधानसभा परिसर के अंदर आखिर कैसे पहुंचीं?
  2. क्या प्रवेश के लिए किसी पहचान या पद का इस्तेमाल किया गया?
  3. क्या इससे पहले भी विधानसभा परिसर में फोटो या वीडियो बनाए गए थे?
  4. वीडियो में तृप्ति को ‘सीनियर’ और तीनों को IAS क्यों बताया गया?
  5. क्या इस पूरे मामले में तृप्ति के कथित नेटवर्क के अन्य लोग भी शामिल थे?
खुद को IAS और MPT की बड़ी अधिकारी बताती थी

पुलिस की जांच के मुताबिक, तृप्ति अलग-अलग जगहों पर खुद को IAS अधिकारी बताती थी। इसके अलावा वह खुद को मध्यप्रदेश पर्यटन यानी MPT की एडिशनल डायरेक्टर और अन्य सरकारी पदों पर तैनात अधिकारी भी बताती थी।चंदेरी मामले में आरोप है कि उसने चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया और इसके बदले उनसे कुल 9.80 लाख रुपये लिए।जांच में यह बात भी सामने आई है कि तृप्ति कथित तौर पर सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों का भरोसा जीतती थी।

Fake IAS Fraud: फर्जी सरकारी अफसर जैसी पूरी प्रोफाइल

पुलिस को तृप्ति के पास कथित तौर पर फर्जी सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेज, ‘CBI’ लिखा पहचान पत्र और सरकारी लेटरहेड मिले हैं।भोपाल स्थित उसके घर और ससुराल की तलाशी के दौरान पुलिस ने दस्तावेज और अन्य सामान बरामद किए हैं।जांच के दौरान ‘भारत सरकार’ लिखा एक इनोवा वाहन भी सामने आया है, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इस कार का इस्तेमाल लोगों पर सरकारी अधिकारी होने का प्रभाव डालने के लिए किया जाता था।

फर्जी IAS तृप्ति पर ठगी के आरोप
फर्जी IAS तृप्ति पर ठगी के आरोप
IAS अधिकारियों के नामों की सूची भी मिली

जांच में यह भी पता चला है कि तृप्ति के पास मंत्रालय और IAS अधिकारियों के नामों की एक सूची रहती थी।आरोप है कि वह जरूरत के अनुसार इन अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करती थी और खुद को उनका करीबी बताकर लोगों का भरोसा हासिल करती थी।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तृप्ति ने किन-किन अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल किया और किन लोगों के सामने खुद को उनके संपर्क में बताया।आरोप है कि फर्जी सरकारी पद और अधिकारियों से संपर्क होने का दावा लोगों का विश्वास जीतने के लिए किया जाता था।

Fake IAS Fraud: चंदेरी में 9.80 लाख रुपये लेने का आरोप

चंदेरी थाने में दर्ज मामले के मुताबिक, तृप्ति ने चार युवकों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। इसके लिए उनसे कुल 9.80 लाख रुपये लिए गए।शिकायत के आधार पर पुलिस ने तृप्ति और उसके भाई सुधांशु सिंह को गिरफ्तार किया था।जांच के दौरान पुलिस ने तृप्ति के भोपाल स्थित घर और ससुराल की तलाशी भी ली। यहां से फर्जी पहचान से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामान मिलने की जानकारी सामने आई है।

भोपाल में 39.17 लाख रुपये का दूसरा मामला

चंदेरी मामले के बाद तृप्ति के खिलाफ भोपाल के बागसेवनिया थाने में 39.17 लाख रुपये की धोखाधड़ी की दूसरी FIR दर्ज हुई।यह शिकायत बालाघाट जिले की खैरलांजी तहसील के चिचोली निवासी 29 वर्षीय रोहित लिल्हारे ने दर्ज कराई।आरोप है कि तृप्ति ने खुद को ट्रेनी IAS अधिकारी और MPT की एडिशनल डायरेक्टर बताकर रोहित का विश्वास जीता।इसके बाद MPT की होटल-रिसॉर्ट संपत्ति लीज पर दिलाने के नाम पर 35.30 लाख रुपये और नौकरी लगवाने के नाम पर 3.87 लाख रुपये लिए गए। इस तरह कुल 39.17 लाख रुपये लिए जाने का आरोप है।

विधानसभा पहुंची फर्जी IAS तृप्ति
विधानसभा पहुंची फर्जी IAS तृप्ति
Fake IAS Fraud: भाई और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के घेरे में

इस मामले में तृप्ति के भाई सुधांशु सिंह, प्रखर सिंह और अन्य सहयोगियों की भूमिका भी सामने आई है।पुलिस के मुताबिक, तृप्ति के भाई और प्रखर सिंह ने भी उसके बताए गए पद की पुष्टि की थी। इससे शिकायतकर्ता और उसके परिचितों को तृप्ति के सरकारी अधिकारी होने पर भरोसा हुआ।इसके बाद कथित तौर पर MPT की संपत्ति लीज पर दिलाने और नौकरी लगवाने के नाम पर रकम ली गई।जांच के बाद पुलिस ने तृप्ति, उसके भाई और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

काम नहीं हुआ तो सिर्फ 1 लाख रुपये लौटाए

शिकायत के अनुसार, पैसे लेने के बाद न तो होटल-रिसॉर्ट की लीज हो सकी और न ही नौकरी लग पाई।इसके बाद रोहित ने आरोपियों से अपने पैसे वापस मांगे। आरोप है कि आरोपियों ने केवल 1 लाख रुपये ऑनलाइन वापस किए।बाकी 38.17 लाख रुपये वापस नहीं किए गए। इसके बाद रोहित ने पुलिस से शिकायत की। जांच के बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।

अब पूरे नेटवर्क की तलाश में पुलिस

विधानसभा परिसर के वीडियो, कथित फर्जी CBI कार्ड, सरकारी लेटरहेड, ‘भारत सरकार’ लिखी कार और अलग-अलग मामलों में सामने आए फर्जी सरकारी पद के दावों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि तृप्ति ने कितने समय से फर्जी अधिकारी की पहचान बना रखी थी, वह किन लोगों के संपर्क में थी, उसकी सहेलियों की इसमें क्या भूमिका थी और इस पहचान के जरिए उसने कितने लोगों को प्रभावित किया।

Fake IAS Fraud: विधानसभा परिसर में कौन प्रवेश कर सकता है?

विधानसभा परिसर में प्रवेश के लिए कुछ लोगों और वर्गों को अधिकृत किया जाता है। इनमें शामिल हैं:

  • विधायक और विधानसभा के अधिकृत सदस्य।
  • विधानसभा के अधिकारी और कर्मचारी।
  • अधिकृत सरकारी अधिकारी और कर्मचारी।
  • अधिकृत पत्रकार और मीडिया प्रतिनिधि।
  • वे लोग जिन्हें विधानसभा की ओर से प्रवेश पास जारी किया गया हो।
  • अनुमति प्राप्त अतिथि और विशिष्ट व्यक्ति।
  • अधिकृत कार्यक्रमों में आमंत्रित लोग।
  • अनुमति के तहत छात्र और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि।
Fake IAS Fraud: विधानसभा परिसर में कौन प्रवेश नहीं कर सकता?

बिना अनुमति या प्रवेश पास के किसी भी व्यक्ति को विधानसभा परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होती।

  • सामान्य व्यक्ति बिना अनुमति परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता।
  • किसी विधायक के साथ आने वाला व्यक्ति भी अधिकृत पास के बिना प्रवेश नहीं कर सकता।
  • दर्शक दीर्घा का पास लेकर परिसर के प्रतिबंधित हिस्सों में प्रवेश नहीं किया जा सकता।
  • बिना अनुमति फोटो, वीडियो या व्लॉगिंग करने वालों को प्रवेश की अनुमति नहीं है।
  • सदन, मंत्रियों या विधायकों के कक्ष और अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना विशेष अनुमति प्रवेश नहीं किया जा सकता।

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