Breaking News
Home » उत्तर प्रदेश » मायावती ने आकाश को फिर पार्टी से निकाला: ससुर के संन्यास के बाद भी नहीं लौटाया पद, बोलीं- पार्टी से ज्यादा उन्हें ससुर प्रिय

मायावती ने आकाश को फिर पार्टी से निकाला: ससुर के संन्यास के बाद भी नहीं लौटाया पद, बोलीं- पार्टी से ज्यादा उन्हें ससुर प्रिय

मायावती ने फिर आकाश आनंद को पार्टी से निकाला

Mayawati Vs Akash Anand: बसपा प्रमुख मायावती के परिवार में सियासी विवाद एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को दोबारा पार्टी से बाहर कर दिया है। गुरुवार सुबह 9 बजे X पर पोस्ट करते हुए मायावती ने कहा कि आकाश को अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ से ज्यादा लगाव है और वह इस मामले में असमंजस की स्थिति में हैं। उन्होंने लिखा कि 3 सितंबर के बाद से आकाश ने उनकी किसी पोस्ट को रिपोस्ट तक नहीं किया। अगर वह पार्टी में स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वह स्वतंत्र हैं, इसलिए आज से उन्हें पार्टी से भी आजाद किया जा रहा है। मायावती ने यह भी कहा कि उनके ससुर ने इस्तीफा देने में देरी कर दी।

Mayawati Vs Akash Anand: आकाश की वापसी के लिए रखी थी शर्त

इससे एक दिन पहले बुधवार को मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी में दोबारा पद देने के लिए उनके ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की शर्त रखी थी। मायावती की इस शर्त के करीब 17 घंटे बाद गुरुवार सुबह 7 बजे अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। X पर भावुक पोस्ट लिखते हुए उन्होंने कहा कि संन्यास लेना तो छोटी बात है, वह बहनजी के लिए अपनी जान तक दे सकते हैं। उनके आदेश के सामने परिवार और रिश्ते-नाते उनके लिए बहुत छोटे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी आकाश को गुमराह करने की कोशिश नहीं की।

संन्यास के बाद भी नहीं मिली आकाश को जिम्मेदारी

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के ऐलान के बाद माना जा रहा था कि मायावती आकाश आनंद को पार्टी में उनका पद वापस दे सकती हैं। लेकिन मायावती ने सभी को चौंकाते हुए आकाश को जिम्मेदारी लौटाने के बजाय उन्हें पार्टी से ही बाहर कर दिया।पिछले 3 साल में यह दूसरी बार है जब मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से निकाला है। इससे सिर्फ 7 दिन पहले उन्हें पार्टी के नंबर दो पद यानी राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटाया गया था। तब मायावती ने कहा था कि आकाश को अभी राजनीतिक तौर पर और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है।

Mayawati Vs Akash Anand: मायावती ने राष्ट्रीय बैठक की
मायावती ने राष्ट्रीय बैठक की
Mayawati Vs Akash Anand: आखिर परिवार में चल क्या रहा है?

मायावती के परिवार में लगातार बदलते फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के एक करीबी नेता ने मायावती को अशोक सिद्धार्थ के खिलाफ बताया था कि वह आकाश को गुमराह कर रहे हैं और पार्टी के फैसलों में दखल दे रहे हैं। इसके बाद मायावती ने आकाश की पार्टी में वापसी के लिए अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की शर्त रखी।अशोक सिद्धार्थ बुधवार को ही संन्यास के लिए तैयार हो गए थे और गुरुवार सुबह उन्होंने इसका सार्वजनिक ऐलान कर दिया।

इसके बाद फैसला आकाश आनंद के हाथ में था। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने उनसे कहा कि वह मायावती की पोस्ट को रिपोस्ट करें और सार्वजनिक रूप से उनका धन्यवाद करें। लेकिन आकाश इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि वह चाहे कुछ भी कर लें, मायावती को उन पर भरोसा नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके ससुर को बार-बार निशाना बनाकर अपमानित किया जा रहा है।आकाश 9 सितंबर की मायावती की उस पोस्ट को लेकर भी नाराज थे, जिसमें उन्होंने अशोक सिद्धार्थ और आकाश आनंद के संदर्भ में ‘आपके दामाद…’ वाली लाइन लिखी थी। जब आकाश की नाराजगी की बात मायावती तक पहुंची तो वह और नाराज हो गईं। इसके बाद उन्होंने आकाश को पार्टी से बाहर करने का फैसला लिया।

मायावती ने कहा- आकाश ने वफादारी नहीं दिखाई

अशोक सिद्धार्थ के संन्यास के ऐलान के करीब 2 घंटे बाद मायावती ने आकाश को पार्टी से निकाल दिया। उन्होंने अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास को ‘देर आए, दुरुस्त आए’ जैसा बताया। मायावती ने कहा कि अगर अशोक सिद्धार्थ को आकाश के राजनीतिक भविष्य की चिंता होती तो वह बुधवार को ही संन्यास ले लेते। उनके मुताबिक, अशोक सिद्धार्थ की राजनीतिक महत्वाकांक्षा अभी भी खत्म नहीं हुई है।

मायावती ने कहा कि आकाश का अपने ससुर के प्रति लगाव कम नहीं हुआ है। उन्होंने मेरी X पोस्ट तक रिपोस्ट नहीं की, जबकि पहले वह मेरी पोस्ट को रिपोस्ट करके अपनी वफादारी दिखाते रहे हैं। मायावती का आरोप है कि अशोक और आकाश को पार्टी और आंदोलन से ज्यादा अपने निजी और पारिवारिक हितों की चिंता है।

उन्होंने सवाल किया कि ऐसे में आकाश पार्टी का भला कैसे कर सकते हैं। इसलिए 3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी से हटाने के बाद अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह अलग कर दिया गया है।

Mayawati Vs Akash Anand: अशोक सिद्धार्थ ने मायावती को बताया राजनीतिक गुरु

अशोक सिद्धार्थ ने अपने संन्यास के ऐलान में मायावती को अपना राजनीतिक गुरु और बड़ी बहन बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 35 साल से वह बीएसपी, कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहे हैं। उन्होंने मायावती की ओर से दी गई हर जिम्मेदारी को अपनी पूरी क्षमता के साथ निभाने की कोशिश की।

अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि मायावती ने उन्हें विधान परिषद और राज्यसभा तक पहुंचाया और एक सामान्य कार्यकर्ता को अपने परिवार का हिस्सा बनाया। उन्होंने इसे मायावती का ऐसा कर्ज बताया, जिसे वह इस जीवन में भी नहीं चुका सकते।

उन्होंने भगवान गौतम बुद्ध और कांशीराम जी की कसम लेते हुए कहा कि उन्होंने कभी पार्टी के हित के खिलाफ काम नहीं किया और मायावती के खिलाफ कुछ करने के बारे में सपने में भी नहीं सोच सकते। उनके मुताबिक, उनके परिवार का पूरा जीवन मायावती का ऋणी है और उनकी हर सलाह व आदेश उनके लिए अंतिम शब्द है।

अशोक सिद्धार्थ ने यह भी कहा कि उन्होंने पिछले कई महीनों से आकाश को कोई सलाह नहीं दी है और कुछ ही मौकों पर उनसे मुलाकात हुई, जब आकाश के कार्यक्रम उन राज्यों में थे जिनकी जिम्मेदारी मायावती ने उन्हें दी थी। उन्होंने बताया कि पार्टी के कुछ लोग उन्हें मायावती से मिले सम्मान की वजह से यह आरोप लगाते हैं कि वह पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और आकाश को गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि यह उनके राजनीतिक विरोधियों की साजिश है। उनके मुताबिक, ये लोग पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं और एक दिन इसकी सच्चाई मायावती के सामने जरूर आएगी।

अशोक सिद्धार्थ ने मायावती से यह भी अनुरोध किया कि उनके संन्यास को आकाश की वापसी से न जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि आकाश उनके दामाद होने से पहले मायावती के भतीजे और आनंद कुमार के बेटे हैं। उनके अंदर मायावती का खून है और उन्होंने अपने जीवन के दो दशक उनकी देखरेख में बिताए हैं। ऐसे में उनके जैसे सामान्य कार्यकर्ता के लिए आकाश को गुमराह करना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि आकाश को जिम्मेदारी वापस देनी है या नहीं, यह पूरी तरह मायावती का फैसला है। उनके संन्यास को आकाश की वापसी से जोड़कर उन्हें उनकी हैसियत से अधिक महत्व दिया जा रहा है।

अशोक सिद्धार्थ ने मायावती की तारीफ करते हुए कहा कि वह त्याग और दया की मूर्ति हैं। समाज के हित में उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी और राज्यसभा की सदस्यता तक छोड़ दी। उन्होंने कहा कि अगर मायावती को लगता है कि उनके राजनीतिक और सामाजिक जीवन में बने रहने से बहुजन मिशन को नुकसान हो रहा है, तो वह इसी समय राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहे हैं।अशोक सिद्धार्थ ने अंत में कहा कि उनका जीवन मायावती का ऋणी है और उनके लिए संन्यास लेना छोटी बात है। अगर कभी मायावती के लिए जान भी देनी पड़े तो वह इसे अपने लिए गर्व की बात मानेंगे। उन्होंने पोस्ट का अंत ‘जय भीम, जय भारत, जय बहुजन समाज’ के साथ किया।

Mayawati Vs Akash Anand: अशोक सिद्धार्थ और रामजी गौतम के बीच तनाव की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, बसपा के इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम और अशोक सिद्धार्थ के बीच तनाव चल रहा है। बताया जा रहा है कि पूरे पारिवारिक विवाद के पीछे यही एक बड़ी वजह हो सकती है। जब-जब पार्टी में अशोक सिद्धार्थ का प्रभाव बढ़ा, तब रामजी गौतम की भूमिका कम हुई और उनके कार्यक्षेत्र में बदलाव किया गया। वहीं, जब रामजी गौतम का प्रभाव बढ़ा तो अशोक सिद्धार्थ पार्टी में अलग-थलग पड़ गए।

अशोक सिद्धार्थ ने अपनी संन्यास वाली पोस्ट में भी इस ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि उनके राजनीतिक विरोधियों की ओर से यह प्रचार किया जा रहा है कि वह पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं और आकाश आनंद को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि आकाश उनके दामाद होने से पहले मायावती के भतीजे हैं।

मायावती ने आकाश को कब-कब जिम्मेदारी दी और हटाया?

10 दिसंबर 2023 को उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के नेताओं की बैठक बुलाई गई थी। इसमें मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।

7 मई 2024 को आकाश के एक बयान को गलत बताते हुए मायावती ने उनसे सभी जिम्मेदारियां वापस ले ली थीं। उन्हें उत्तराधिकारी पद के साथ नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी से भी हटा दिया गया था। तब मायावती ने कहा था कि आकाश अभी राजनीतिक रूप से अपरिपक्व हैं।

इसके 47 दिन बाद 23 जून 2024 को मायावती ने अपना फैसला बदल दिया। उन्होंने आकाश को फिर उत्तराधिकारी बनाया और नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी सौंप दी।

Mayawati Vs Akash Anand: 26 मार्च 2023 को प्रज्ञा से आकाश की शादी हुई, जिसमें मायावती भी पहुंचीं।
26 मार्च 2023 को प्रज्ञा से आकाश की शादी हुई, जिसमें मायावती भी पहुंचीं।

2 मार्च 2025 को मायावती ने एक बार फिर आकाश से सभी जिम्मेदारियां छीन लीं। इसके अगले दिन यानी 3 मार्च 2025 को उन्हें पार्टी से भी बाहर कर दिया गया। मायावती ने कहा था कि आकाश को पश्चाताप करके अपनी राजनीतिक परिपक्वता दिखानी थी, लेकिन वह अपने ससुर के प्रभाव में स्वार्थी और अहंकारी हो गए।

13 अप्रैल को मायावती ने आकाश को माफ कर दिया। हालांकि, उन्होंने कहा था कि अब वह उन्हें अपना उत्तराधिकारी नहीं बनाएंगी। इसके करीब 3 महीने बाद, 18 मई को आकाश को दोबारा चीफ नेशनल को-ऑर्डिनेटर बनाया गया। मायावती ने कहा था कि उन्हें दूसरा मौका दिया जा रहा है।

29 अगस्त को पार्टी में राष्ट्रीय संयोजक का नया पद बनाया गया और आकाश को यह जिम्मेदारी दी गई। लेकिन इसी महीने 3 सितंबर को मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया। उन्होंने कहा कि आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। चुनाव में कम समय बचा है, इसलिए उन्हें फिलहाल पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना सही नहीं होगा। मायावती ने यह भी कहा था कि आकाश अभी विरोधियों के साम, दाम, दंड और भेद जैसे राजनीतिक हथकंडों से निपटने के लिए तैयार नहीं हैं।

Mayawati Vs Akash Anand: अशोक सिद्धार्थ को 2 अगस्त को पार्टी से निकाला था

मायावती ने इसी साल 2 अगस्त को अशोक सिद्धार्थ को भी पार्टी से बाहर कर दिया था। उन्होंने कहा था कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद वह नहीं सुधरे और अब उन्हें दोबारा पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा।डेढ़ साल में यह दूसरी बार था जब मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाला। साल 2025 में संगठन में गुटबाजी के आरोपों के चलते अशोक सिद्धार्थ और उनके करीबी नितिन सिंह को पार्टी से बाहर किया गया था। तब मायावती ने आरोप लगाया था कि दोनों पार्टी के खिलाफ साजिश कर रहे थे।हालांकि, करीब 6 महीने बाद अशोक सिद्धार्थ की पार्टी में वापसी हो गई थी। फरवरी 2026 में उन्हें राष्ट्रीय पदाधिकारियों में नंबर एक की जगह दी गई थी।

क्या ईशान आनंद को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी?

आकाश आनंद को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि मायावती उनके छोटे भाई ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दे सकती हैं। इसके साथ ही उन्हें अपना उत्तराधिकारी भी बनाया जा सकता है।6 सितंबर को मायावती ने अभी राजनीतिक रूप से अनुभवहीन ईशान को 19 राज्यों में संगठन की समीक्षा की जिम्मेदारी दी थी। इसे उनके लिए बड़ी भूमिका की तैयारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।हालांकि, ईशान को फिलहाल चुनावी लिहाज से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से दूर रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मायावती पहले उन्हें संगठन से जुड़ी जिम्मेदारियां देकर उनकी क्षमता को परखना चाहती हैं। अगर वह इस कसौटी पर सफल रहते हैं तो आगे उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड समेत पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

Mayawati Vs Akash Anand: कौन हैं ईशान आनंद?

27 साल के ईशान आनंद बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के छोटे बेटे और आकाश आनंद के छोटे भाई हैं। उन्होंने नोएडा के जेनेसिस ग्लोबल स्कूल से पढ़ाई की है। इसके बाद लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर से कानून की डिग्री हासिल की।24 अप्रैल 2025 को उन्होंने राधिका खन्ना से लव मैरिज की थी। शादी के बाद वह कुछ समय अपनी पत्नी के साथ परिवार से अलग भी रहे।3 सितंबर 2026 की राष्ट्रीय बैठक में ईशान पहली बार मायावती के साथ नजर आए। इस दौरान बसपा प्रमुख ने उनका वरिष्ठ नेताओं से परिचय कराया। इसके बाद 6 सितंबर को मायावती ने उन्हें 19 राज्यों का मुख्य सेक्टर प्रभारी बनाया।

मायावती के साथ अशोक सिद्धार्थ
मायावती के साथ अशोक सिद्धार्थ
सरकारी नौकरी छोड़कर बसपा में आए थे अशोक सिद्धार्थ

अशोक सिद्धार्थ ने झांसी मेडिकल कॉलेज से पैरामेडिकल ऑप्थैल्मिक असिस्टेंट का डिप्लोमा किया था। इसके बाद वह स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी करने लगे। उनकी पोस्टिंग कन्नौज में हुई थी। नौकरी के दौरान ही वह BAMCEF से जुड़े और संगठन के काम में सक्रिय हो गए। बाद में उनकी नजदीकी मायावती से बढ़ी।मायावती के कहने पर उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और बसपा के लिए काम शुरू किया। इसके बाद पार्टी में उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा। साल 2009 में मायावती ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद यानी MLC भेजा। वह जनवरी 2009 से जनवरी 2015 तक विधान परिषद के सदस्य रहे।

जुलाई 2016 में अशोक सिद्धार्थ राज्यसभा पहुंचे और जुलाई 2022 तक सांसद रहे। इसके अलावा वह पार्टी में अलग-अलग राज्यों के प्रभारी भी रहे। उनकी पत्नी सुनीता भी बसपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। उनकी बेटी डॉ. प्रज्ञा सिद्धार्थ की शादी मार्च 2023 में आकाश आनंद से हुई थी।

Mayawati Vs Akash Anand: 2017 में आकाश आनंद ने राजनीति में कदम रखा

आकाश आनंद ने करीब 6 साल पहले यानी 2017 में सहारनपुर की एक जनसभा में मायावती के साथ नजर आकर राजनीति में सक्रिय शुरुआत की थी। इसके बाद वह लगातार पार्टी के काम में जुड़े रहे। साल 2019 में उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया।इसके बाद बसपा और सपा का गठबंधन टूट गया। उस समय यह बात सामने आई थी कि आकाश आनंद की सलाह पर ही मायावती ने गठबंधन तोड़ने का फैसला किया था।2022 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहली बार आकाश आनंद का नाम बसपा के स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया गया। आकाश ने लंदन से मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी MBA की पढ़ाई की है।