Home » राष्ट्रीय » BRICS पर कांग्रेस में दो सुर, चिदंबरम ने पूछा- भारत को क्या मिला? थरूर ने गिनाए फायदे

BRICS पर कांग्रेस में दो सुर, चिदंबरम ने पूछा- भारत को क्या मिला? थरूर ने गिनाए फायदे

BRICS को लेकर कांग्रेस में सामने आए मतभेद

BRICS Summit 2026: भारत में होने वाले BRICS समिट को लेकर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने हाल ही में सवाल उठाया कि आखिर BRICS से भारत को क्या फायदा हुआ। वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS को भारत के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए इसके कई फायदे गिनाए। उनके मुताबिक भारत में इतने बड़े सम्मेलन का आयोजन देश की कूटनीतिक ताकत को दिखाता है। 11 सदस्य देशों के बड़े नेताओं को भारत में एक मंच पर लाना इस बात का संकेत है कि भारत अलग-अलग देशों को साथ लाने की क्षमता रखता है।

18वां BRICS समिट 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होगा। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत 11 सदस्य देशों के शीर्ष नेता हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, टेक्नोलॉजी और ऊर्जा समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

BRICS Summit 2026: चिदंबरम ने BRICS समेत कई संगठनों पर उठाए सवाल

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने BRICS की उपयोगिता पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं पता कि इस बार BRICS सम्मेलन में कितने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शामिल होने वाले हैं, लेकिन पिछली दो-तीन बैठकों से भारत को कोई खास या प्रत्यक्ष फायदा दिखाई नहीं दिया।चिदंबरम ने यह भी कहा कि भारत BRICS के अलावा G20, QUAD और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है। ऐसे में इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि इन संगठनों की सदस्यता से भारत को वास्तव में क्या ठोस लाभ मिला है।

थरूर ने BRICS को बताया भारत की कूटनीतिक ताकत

इसके विपरीत कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने शनिवार को इसे ग्लोबल साउथ के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया। थरूर के मुताबिक ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन BRICS के 11 सदस्य देश दुनिया की बड़ी आबादी और करीब 41 प्रतिशत वैश्विक GDP का प्रतिनिधित्व करते हैं।ऐसे में थरूर का कहना है कि BRICS जैसे समूह को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत में इतने बड़े सम्मेलन का आयोजन देश की कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका को भी सामने रखता है।

BRICS Summit 2026: BRICS मुद्दे पर कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल
BRICS मुद्दे पर कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल
BRICS पर कांग्रेस में अलग-अलग सुर

BRICS को लेकर चिदंबरम और थरूर की टिप्पणियों में अंतर सामने आने के बाद कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय की चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ चिदंबरम BRICS समेत कई बहुपक्षीय संगठनों से भारत को मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी तरफ थरूर इसके रणनीतिक और कूटनीतिक महत्व को सामने रख रहे हैं।BJP ने भी दोनों नेताओं के बयानों के इसी अंतर को कांग्रेस पर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया है। BJP का कहना है कि एक ही पार्टी के दो वरिष्ठ नेता BRICS को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं।

BRICS Summit 2026: थरूर ने BRICS की चुनौतियां भी गिनाईं

हालांकि, शशि थरूर ने BRICS के महत्व की बात करते हुए इसकी चुनौतियों को भी सामने रखा। उन्होंने पांच प्रमुख बिंदुओं का जिक्र किया।

1. सदस्य देशों के बीच मतभेद

BRICS के सभी सदस्य देशों की विदेश नीति और राष्ट्रीय हित एक जैसे नहीं हैं। ऐसे में बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सभी देशों के बीच एकमत बनाना मुश्किल हो सकता है।

2. ईरान-इजराइल और रूस-यूक्रेन पर मतभेद

मई में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान-इजराइल और रूस-यूक्रेन जैसे मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच मतभेद सामने आए थे। इन मुद्दों पर साझा बयान भी जारी नहीं हो सका था।

3. भारत ने जारी किया चेयर डिक्लेरेशन

साझा बयान जारी नहीं होने के बाद भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर अपनी ओर से चेयर डिक्लेरेशन जारी किया था।

4. नई दिल्ली समिट के सामने बड़ी चुनौती

अगर आगामी सम्मेलन में भी बड़े वैश्विक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बन पाती है, तो BRICS की एकजुटता को लेकर सवाल उठ सकते हैं। इसे भारत के लिए भी एक कूटनीतिक चुनौती माना जाएगा।

5. व्यापार घाटा भी चिंता का विषय

BRICS देशों के साथ भारत का व्यापार संतुलन भी एक चुनौती है। भारत इन देशों को जितना निर्यात करता है, उससे ज्यादा आयात करता है। यानी BRICS के कई सदस्य देशों से भारत ज्यादा सामान खरीद रहा है।

BRICS Summit 2026: BJP ने कांग्रेस पर साधा निशाना

चिदंबरम की टिप्पणी के बाद BJP प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने शशि थरूर के बयान को उनके बयान के विपरीत बताया। उन्होंने कांग्रेस में मतभेद होने का आरोप लगाया।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रदीप भंडारी ने कहा कि थरूर का BRICS समिट को भारत के लिए बड़ी प्रतिष्ठा बताना कांग्रेस के भीतर अलग-अलग राय को दिखाता है। BJP ने इसी विरोधाभास को आधार बनाकर कांग्रेस पर राजनीतिक हमला किया।यानी BRICS को लेकर कांग्रेस के भीतर सामने आए अलग-अलग बयानों ने BJP को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका दिया है। जहां चिदंबरम सम्मेलन और ऐसे संगठनों से मिलने वाले ठोस लाभ पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं थरूर BRICS को भारत की कूटनीतिक ताकत और ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बता रहे हैं।

भारत के पास BRICS की अध्यक्षता

इस साल BRICS की अध्यक्षता भारत के पास है। BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं।भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने, आर्थिक सहयोग बढ़ाने, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से मुकाबले और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य BRICS को केवल राजनीतिक मंच तक सीमित रखने के बजाय व्यापार, निवेश और विकास के लिए भी महत्वपूर्ण मंच के रूप में आगे बढ़ाना है।

BRICS Summit 2026: 20 साल का हुआ BRICS

BRICS की स्थापना 2006 में हुई थी। इसके संस्थापक सदस्य ब्राजील, रूस, भारत और चीन थे। साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका भी समूह में शामिल हुआ।2014 में BRICS देशों ने अपना विकास बैंक बनाया। इसके बाद 2023 में समूह ने छह नए देशों को सदस्यता देने की घोषणा की थी। इनमें अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE शामिल थे।हालांकि, अर्जेंटीना ने बाद में BRICS की सदस्यता लेने से इनकार कर दिया। वहीं, सऊदी अरब की सदस्यता प्रक्रिया को लेकर अलग स्थिति बनी हुई है।BRICS ने इसके अलावा पार्टनर देशों की व्यवस्था भी शुरू की है। इसमें बेलारूस, बोलिविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।