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आपकी बात अब सिर्फ आपके बीच नहीं! AI वियरेबल सुनकर बना रहे टेक्स्ट और समरी, दूसरों की प्राइवेसी पर बड़ा सवाल

AI वियरेबल सुन सकते हैं आपकी निजी बातचीत

AI Wearable Privacy: टेक्नोलॉजी ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। आज हमारे दिन के छोटे-बड़े कई काम किसी न किसी तरह तकनीक पर निर्भर हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई से लैस स्मार्टवॉच, स्मार्ट ग्लास और दूसरे वियरेबल डिवाइस अब केवल कदम गिनने या हार्ट रेट चेक करने तक सीमित नहीं हैं। ये आसपास हो रही बातचीत को सुन सकते हैं, चीजों को पहचान सकते हैं और रिकॉर्ड की गई जानकारी को टेक्स्ट, नोट्स या एआई समरी में बदल सकते हैं।

लेकिन इसके साथ एक नई चिंता भी सामने आई है। डिवाइस पहनने वाले व्यक्ति को पता होता है कि उसका डिवाइस क्या कर रहा है, लेकिन उसके सामने मौजूद दूसरे व्यक्ति को इसकी जानकारी हो, यह जरूरी नहीं है। इसी कारण ‘बायस्टैंडर प्राइवेसी’ यानी आसपास मौजूद उन लोगों की निजता, जो खुद ऐसा कोई डिवाइस इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं।

AI Wearable Privacy: Apple Watch में बातचीत से जुड़ी सुविधा

Apple की नई Watch Series 12 में बताए गए Live Rewind फीचर की मदद से यूजर पिछली 15 सेकंड की बातचीत का टेक्स्ट स्निपेट देख सकता है। वहीं Siri Recap बातचीत का सामान्य सारांश तैयार कर सकता है।Apple के अनुसार, Live Rewind लगातार अपने आप बातचीत को रिकॉर्ड या ट्रांसक्राइब नहीं करता। इसे शुरू करने के लिए यूजर को Digital Crown को दो बार दबाना होता है। फीचर चालू होने पर आवाज के जरिए संकेत मिलता है और स्क्रीन पर माइक्रोफोन इंडिकेटर के साथ फुल-स्क्रीन एनीमेशन दिखाई देता है।

कंपनी के मुताबिक, Live Rewind की प्रोसेसिंग डिवाइस पर ही होती है, जबकि Siri Recap के कुछ हिस्सों को Private Cloud Compute के जरिए प्रोसेस किया जाता है। Apple का कहना है कि सेव की गई समरी और Live Rewind स्निपेट iCloud पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ सुरक्षित रहते हैं।हालांकि, सवाल केवल Apple Watch पहनने वाले व्यक्ति की प्राइवेसी का नहीं है। अगर किसी मीटिंग या डिनर के दौरान सामने बैठा व्यक्ति बात कर रहा है और उसकी आवाज एआई सिस्टम तक पहुंच रही है, तो क्या उस व्यक्ति की सहमति भी जरूरी होनी चाहिए?

सामने वाले व्यक्ति को रिकॉर्डिंग की जानकारी न हो तो?

कल्पना कीजिए कि दो लोग आमने-सामने बैठकर बातचीत कर रहे हैं और उनमें से एक ने एआई वियरेबल पहन रखा है। डिवाइस पहनने वाले व्यक्ति को मालूम है कि वह बातचीत सुन सकता है, लेकिन सामने वाले को शायद इसकी जानकारी ही नहीं हो।हो सकता है कि सामने वाला व्यक्ति बातचीत रिकॉर्ड किए जाने से परेशान न हो, लेकिन वह यह नहीं चाहता हो कि उसकी बातों को टेक्स्ट में बदला जाए, एआई से उसका सारांश बनाया जाए, लंबे समय तक सेव किया जाए या उसे किसी व्यक्ति अथवा विषय से जोड़ दिया जाए। इसी अंतर की वजह से बायस्टैंडर प्राइवेसी की चिंता सामने आती है।

AI वियरेबल सुन सकते हैं आपकी निजी बातचीत
AI वियरेबल सुन सकते हैं आपकी निजी बातचीत

एआई वियरेबल कंपनी NeoSapien के को-फाउंडर और सीईओ धनंजय यादव का कहना है कि केवल डिवाइस खरीदने वाले व्यक्ति की सहमति को उन सभी लोगों की मंजूरी नहीं माना जा सकता, जिनसे वह आगे बातचीत करेगा।उनके अनुसार, किसी मीटिंग को ट्रांसक्राइब करने की अनुमति और उसी बातचीत के आधार पर किसी व्यक्ति की भावनाओं या अन्य निजी पहलुओं का विश्लेषण करने की अनुमति एक जैसी नहीं है।

AI Wearable Privacy: स्मार्ट ग्लास में कैमरा ही एकमात्र चिंता नहीं

स्मार्ट ग्लास की प्राइवेसी को लेकर अब तक सबसे ज्यादा चर्चा कैमरे की हुई है। Meta के Ray-Ban स्मार्ट ग्लास को लेकर आयरलैंड के Data Protection Commission ने भी कंपनी के साथ बातचीत की थी। इसमें यह चिंता जताई गई थी कि कैमरे से रिकॉर्ड होने वाले आसपास के लोगों को पर्याप्त जानकारी दी जा रही है या नहीं।

इसके बाद Meta ने स्मार्ट ग्लास की बाहरी प्राइवेसी LED को बड़ा किया और रिकॉर्डिंग के दौरान उसके ब्लिंक करने के तरीके में भी बदलाव किया। हालांकि, कैमरा हटा देने से प्राइवेसी से जुड़ी सभी चिंताएं खत्म नहीं होतीं।Meta के कैमरे के बिना संभावित स्मार्ट ग्लास मॉडल को लेकर सामने आई जानकारी में इसका कोडनेम Luna बताया गया है। इसमें कैमरा हटाए जाने की बात कही गई है, जबकि माइक्रोफोन, स्पीकर और एआई क्षमताएं मौजूद रहने की बात सामने आई है।इससे एक अहम सवाल उठता है कि अगर कोई डिवाइस कैमरे के बिना भी आसपास की बातचीत सुन सकता है, तो क्या वह वास्तव में ज्यादा प्राइवेट है?

माइक्रोफोन भी जुटा सकता है कई तरह की जानकारी

माइक्रोफोन के जरिए बातचीत सुनी जा सकती है, भले ही डिवाइस से कोई तस्वीर न ली जा रही हो। एआई उस आवाज को केवल रिकॉर्ड करने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसे टेक्स्ट में बदलकर उससे अलग-अलग तरह की जानकारी निकाल सकता है।उदाहरण के तौर पर एआई सिस्टम बातचीत का ट्रांसक्रिप्ट तैयार कर सकता है, लोगों के नाम पहचान सकता है, मीटिंग में लिए गए फैसलों को अलग कर सकता है और बातचीत का सारांश बना सकता है। इसके अलावा आवाज या बातचीत के तरीके से दूसरी जानकारी का अनुमान लगाने की कोशिश भी की जा सकती है।इसका मतलब है कि छोटी-सी बातचीत से भी एआई कई स्तर की जानकारी तैयार कर सकता है।

AI Wearable Privacy: इमर्सिव टेक्नोलॉजी पर ICO की चिंता

यूके के Information Commissioner’s Office यानी ICO ने भी स्मार्ट ग्लास जैसी इमर्सिव टेक्नोलॉजी को लेकर चिंता जताई है। उसके मुताबिक, ऐसे डिवाइस आसपास मौजूद लोगों की जानकारी को जानबूझकर या बिना इरादे के रिकॉर्ड कर सकते हैं।

ऑडियो डिलीट होने के बाद भी जानकारी बच सकती है

मान लीजिए किसी बातचीत की मूल ऑडियो रिकॉर्डिंग बाद में डिलीट कर दी गई। इसके बावजूद उस ऑडियो से तैयार किया गया ट्रांसक्रिप्ट या एआई समरी मौजूद रह सकती है। यानी केवल ऑडियो फाइल मिटा देना हर बार उससे जुड़ी पूरी जानकारी को खत्म करने के बराबर नहीं है।धनंजय यादव के मुताबिक, कंपनियों को दो अलग-अलग सवालों पर विचार करना चाहिए। पहला, रिकॉर्ड की गई जानकारी की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए और दूसरा, क्या उस जानकारी को रिकॉर्ड करने की शुरुआत से ही अनुमति मिली थी?यूके के ICO की 2026 की कंज्यूमर IoT गाइडेंस में भी कहा गया है कि जहां सहमति जरूरी हो, वहां वह वास्तविक, स्पष्ट और स्वतंत्र होनी चाहिए। लोगों को प्राइवेसी से जुड़ी जानकारी आसान भाषा में दी जानी चाहिए और जरूरत से ज्यादा डेटा इकट्ठा करने से बचना चाहिए।लेकिन एआई वियरेबल के मामले में चुनौती यह है कि डेटा का इस्तेमाल करने वाला ग्राहक और उस डेटा से प्रभावित होने वाला व्यक्ति अलग-अलग हो सकते हैं।

AI Wearable Privacy: AI डिवाइस सुन रहे बातचीत, प्राइवेसी पर सवाल
AI डिवाइस सुन रहे बातचीत, प्राइवेसी पर सवाल
AI Wearable Privacy: रिकॉर्डिंग इंडिकेटर जरूरी, लेकिन पर्याप्त नहीं

प्राइवेसी को लेकर एक आसान उपाय यह हो सकता है कि रिकॉर्डिंग शुरू होने पर डिवाइस लाइट या आवाज के जरिए लोगों को संकेत दे। Apple के Live Rewind में चाइम और स्क्रीन इंडिकेटर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं NeoSapien के Neo1 में एक्टिव लिसनिंग के दौरान सफेद लाइट दिखाई देती है और रिकॉर्डिंग या कैप्चर रोकने का विकल्प भी दिया गया है।फिर भी केवल लाइट या आवाज के जरिए संकेत देना पूरी समस्या का समाधान नहीं करता।किसी व्यक्ति को यह पता हो सकता है कि सामने वाला उसकी बातचीत रिकॉर्ड कर रहा है, लेकिन उसके पास रिकॉर्डिंग रोकने का कोई व्यावहारिक विकल्प न हो। रेस्टोरेंट, ऑफिस या पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसी जगहों पर हर बार वहां से उठकर चले जाना संभव नहीं होता। इसलिए प्राइवेसी का मुद्दा सिर्फ लोगों को यह बताने तक सीमित नहीं रह सकता कि रिकॉर्डिंग हो रही है।

कंपनियों को इन बातों की जानकारी देनी होगी

एआई वियरेबल बनाने वाली कंपनियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि डिवाइस में क्या रिकॉर्ड किया जा रहा है, उससे किस तरह की जानकारी तैयार की जा रही है, डेटा कहां प्रोसेस हो रहा है, उसे कितने समय तक रखा जाएगा और उसे कौन देख या इस्तेमाल कर सकता है।इसके अलावा आसपास मौजूद लोगों के लिए शिकायत दर्ज करने या अपने डेटा को हटाने का आसान तरीका भी होना चाहिए। इसके लिए यह जरूरी नहीं होना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति उसी कंपनी का ग्राहक हो।

AI Wearable Privacy: सुविधा और प्राइवेसी के बीच संतुलन जरूरी

एआई वियरेबल लोगों के लिए बातचीत याद रखने, मीटिंग का सारांश तैयार करने और रोजमर्रा की जानकारी को व्यवस्थित करने में मददगार हो सकते हैं। लेकिन जैसे-जैसे ये डिवाइस आसपास की आवाजों को ज्यादा सुनने और समझने में सक्षम होंगे, प्राइवेसी से जुड़ा सवाल केवल डिवाइस पहनने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहेगा।