Gold GST exemption: अगर आप त्योहारों या शादी के सीजन में सोना, चांदी या प्लेटिनम खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो टैक्स से जुड़ी यह खबर आपके लिए अहम है। 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली GST Council की बैठक में बैंकों और नामित एजेंसियों को विदेशों से सोना, चांदी और प्लेटिनम आयात करने पर मिलने वाली 3% Integrated GST (IGST) छूट खत्म करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।
Gold GST exemption: 2017 से मिल रही है 3% IGST की छूट-
आमतौर पर भारत में सोने, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर 3% IGST लागू होता है। हालांकि, RBI या सरकार से सूचीबद्ध बैंक और कुछ नामित एजेंसियों को 2017 से इस टैक्स से छूट मिली हुई है। उस समय इस कारोबार पर कड़े नियंत्रण थे। ऐसे में आयात प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए यह छूट शुरू की गई थी।
Gold GST exemption: अब क्यों खत्म हो सकती है GST छूट-
सरकार अब बुलियन एक्सचेंज और बैंकों या नामित एजेंसियों को टैक्स के मामले में समान स्तर पर लाना चाहती है। इसी वजह से इन संस्थाओं को मिलने वाली 3% IGST छूट को खत्म करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।
सोने के आयात पर सरकार का फोकस-
चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता है। देश में सोने का आयात मुख्य रूप से ज्वेलरी इंडस्ट्री की भारी मांग के कारण होता है। बड़े पैमाने पर सोने का आयात होने से देश से डॉलर बाहर जाता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव पड़ता है। गैर-जरूरी आयात को कम करने के लिए सरकार ने मई में सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% और प्लेटिनम पर 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दी थी। अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान भारत का गोल्ड इंपोर्ट 3.38% बढ़कर 17.47 बिलियन डॉलर हो गया। वहीं, इसी अवधि में चांदी का इंपोर्ट 8.81% घटकर 1.74 बिलियन डॉलर रहा।
बैंकों और नामित एजेंसियों पर क्या असर होगा-
अगर GST छूट खत्म होती है तो बैंकों और नामित एजेंसियों की आयात लागत बढ़ सकती है। उन्हें बुलियन एक्सचेंज के समान टैक्स व्यवस्था के तहत काम करना होगा।
ज्वेलर्स और कारोबारियों पर क्या असर पड़ेगा-
सर्राफा बाजार में बैंकों से मिलने वाले सोने और चांदी की शुरुआती लागत में बदलाव देखने को मिल सकता है। इसका असर कारोबारियों की लागत पर भी पड़ सकता है।
आम खरीदारों पर क्या असर होगा-
यह छूट सीधे आम खरीदारों को नहीं मिलती, बल्कि आयात के स्तर पर बैंकों और नामित एजेंसियों से जुड़ी है। हालांकि, टैक्स व्यवस्था में बदलाव से ज्वेलरी निर्माण की लागत और बाजार कीमतों पर अप्रत्यक्ष असर देखने को मिल सकता है।
7 अक्टूबर की बैठक पर रहेगी नजर-
अगर आप ज्वेलरी या डिजिटल गोल्ड में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो 7 अक्टूबर को होने वाली GST Council की बैठक के फैसले पर नजर रखना जरूरी होगा। त्योहारों के सीजन में खरीदारी करते समय मेकिंग चार्ज और GST बिल का भी स्पष्ट मिलान करें।
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