Actor Nana Patekar: हिंदी सिनेमा के दमदार अभिनेताओं में शुमार नाना पाटेकर के निधन की खबर ने उनके चाहने वालों को भावुक कर दिया है. सोशल मीडिया पर लोग उनके पुराने किरदारों और फिल्मों के वीडियो शेयर कर उन्हें याद कर रहे हैं। इसी बीच फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का एक पुराना सीन अचानक फिर चर्चा में आ गया है।
नाना पाटेकर के नाम से जुड़ी सोशल मीडिया चर्चाओं के बीच उनकी 1994 में रिलीज हुई फिल्म ‘क्रांतिवीर’ का एक पुराना सीन फिर तेजी से शेयर किया जा रहा है। फिल्म में नाना पाटेकर ने प्रताप का किरदार निभाया था और क्लाइमेक्स का उनका दमदार मोनोलॉग आज भी उनके यादगार अभिनय दृश्यों में गिना जाता है। इस क्लिप में वह समाज की चुप्पी, गुलामी की मानसिकता, धर्म के नाम पर लोगों को बांटने और नेताओं के प्रभाव पर तीखे सवाल उठाते नजर आते हैं।
‘तुम्हारी ये नामर्दानगी…’ से शुरू होती है बात
वायरल क्लिप में प्रताप बेहद आक्रोशित अंदाज में कहता है— “तुम्हारी यह नामर्दानगी, बुजदिली एक दिन इस देश की मौत का तमाशा इसी खामोशी से देखेगी…” इसके बाद वह लोगों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहता है कि उन्हें अंधेरे में रहने और गुलामी करने की आदत पड़ गई है। संवाद में आगे राजा-महाराजाओं और अंग्रेजों की गुलामी से लेकर नेताओं और गुंडों के प्रभाव तक का जिक्र आता है। प्रताप धर्म के नाम पर लोगों को बहकाए जाने और एक-दूसरे के खिलाफ खड़े होने पर भी सवाल उठाता है। इसी हिस्से में उसका आक्रोश चरम पर पहुंचता है और वह कहता है- “तुम एक दूसरे के गले काट रहे हो। काटो! काटो!”
Actor Nana Patekar:‘सबसे खूबसूरत चीज बनाई थी इंसान…’
मोनोलॉग का एक और हिस्सा इंसान की बदलती संवेदनशीलता पर सवाल करता है। प्रताप कहता है कि ऊपर वाला जब इंसान को देखता होगा तो उसे शर्म आती होगी। इसके बाद वह उस इंसान की तुलना कीड़ों से करते हुए समाज की स्थिति पर तीखी टिप्पणी करता है।
यही संवाद आज सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है। वजह सिर्फ नाना पाटेकर का अभिनय नहीं, बल्कि यह है कि 1994 में लिखे गए ये सवाल आज भी लोगों को अपने आसपास के राजनीतिक और सामाजिक माहौल से जोड़कर देखने का मौका देते हैं।

32 साल बाद भी क्यों याद आया ‘क्रांतिवीर’?
दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। इस बीच लोगों द्वारा उनके फिल्म के सीन को ‘क्रांतिवीर’ को रिलीज हुए तीन दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इस सीन की भाषा और उसका आक्रोश आज भी दर्शकों को प्रभावित करता है। सोशल मीडिया पर क्लिप शेयर करने वाले लोग इसे धर्म, राजनीति, सामाजिक विभाजन और आम लोगों की चुप्पी जैसे मुद्दों से जोड़कर देख रहे हैं।
हालांकि यह फिल्म का संवाद है और इसे मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर सीधे बयान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। लेकिन इसकी लोकप्रियता यह जरूर बताती है कि सिनेमा के कुछ संवाद अपने दौर से आगे निकलकर समय-समय पर नए अर्थ हासिल करते हैं।
नाना पाटेकर का यह दृश्य भी कुछ ऐसा ही है। संवाद में सवाल तीन दशक पुराने हैं, लेकिन उन्हें सुनते हुए आज भी कई लोगों को लगता है कि सवाल खत्म नहीं हुए। यही वजह है कि क्रांतिवीर का यह क्लिप एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
ये भी पढ़े… नाना पाटेकर के निधन से बॉलीवुड में मातम, रितेश देशमुख से लेकर अक्षय कुमार तक ने जताया दुख









