Gen Z Protests: एआईएसए की प्रमुख नेहा बोरा ने खोपड़ी के निशान और ‘वन पीस’ लिखी टी-शर्ट यूं ही नहीं पहनी है। इंडोनेशिया, नेपाल, फिलीपींस और फ्रांस समेत कई देशों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इसी निशान वाले झंडे का इस्तेमाल किया गया है। इस झंडे का इतिहास 17वीं सदी से जुड़ा है, जब समुद्री लुटेरे इसे अपने जहाजों पर लगाते थे। दूसरे जहाजों के लिए इसका मतलब साफ था- आत्मसमर्पण कर दो, नहीं तो हमला किया जाएगा।आखिर खोपड़ी के इस निशान और ‘वन पीस’ का क्या मतलब है? यह झंडा दुनिया भर में जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों का हिस्सा कैसे बना और नेहा बोरा इसके जरिए क्या संदेश देना चाहती हैं? आइए, इस एक्सप्लेनर में समझते हैं।
17वीं सदी में समुद्री लुटेरों की पहचान था यह झंडा
पुराने समय में समुद्री लुटेरे अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार अपने जहाजों पर किसी देश का झंडा लगा लेते थे। इससे वे दूसरे जहाजों के करीब पहुंचकर अचानक हमला कर सकते थे और उन्हें लूट सकते थे।हालांकि, जिन समुद्री इलाकों में लुटेरों का दबदबा था, वहां वे काले रंग का झंडा भी फहराते थे। यह दूसरे जहाजों के लिए चेतावनी होती थी कि उनका जहाज कब्जे में लिया जा सकता है। अगर जहाज के लोग बिना विरोध किए आत्मसमर्पण कर देते, तो उन्हें आमतौर पर जान से नहीं मारा जाता था।लेकिन अगर कोई जहाज इस चेतावनी को नजरअंदाज करता, तो समुद्री लुटेरे काले झंडे की जगह लाल झंडा फहरा देते थे। इसका मतलब था कि अब हमला किया जाएगा और जहाज को लूटने के लिए जानलेवा कार्रवाई हो सकती है।इतिहास में 1687 में एक फ्रांसीसी जहाज की लॉगबुक में लाल झंडे पर खोपड़ी और हड्डियों के निशान का पहला उल्लेख मिलता है। इतिहासकारों के मुताबिक, 1700 के आसपास अटलांटिक महासागर में सक्रिय फ्रांसीसी समुद्री लुटेरे इमैनुएल विन ने इस झंडे का इस्तेमाल किया था।समुद्री लुटेरों पर कई किताबें लिखने वाली इतिहासकार डॉ. रेबेका साइमन के अनुसार, 1710 तक लाल झंडे का इस्तेमाल बंद होने लगा था।
इसके बाद ब्रिटिश समुद्री लुटेरे रिचर्ड वर्ली और आयरिश समुद्री लुटेरे एडवर्ड इंग्लैंड ने काले झंडे पर सफेद खोपड़ी वाला निशान इस्तेमाल करना शुरू किया। माना जाता है कि अंग्रेज समुद्री लुटेरे कैप्टन जॉन ‘कैलिको जैक’ रैकम ने इस झंडे को समुद्री लुटेरों की पहचान के तौर पर लोकप्रिय बनाया।इस झंडे को ‘जॉली रोजर’ कहा जाता है। इसका संबंध शैतान या खतरनाक समुद्री लुटेरों से जोड़ा जाता है।
Gen Z Protests: ‘वन पीस’ ने जॉली रोजर को नई पहचान दी
साल 1997 में जापानी कॉमिक्स लेखक इइचिरो ओडा ने ‘वन पीस’ नाम की एक कॉमिक्स सीरीज शुरू की। जापान में कॉमिक्स को मंगा कहा जाता है। यह सीरीज ‘शोनेन जंप’ नाम की साप्ताहिक पत्रिका में प्रकाशित होने लगी।‘वन पीस’ की कहानी में समुद्री लुटेरों के हर गिरोह का अपना झंडा होता है, जो उसके कप्तान और गिरोह की पहचान बताता है।इस कहानी का मुख्य किरदार मंकी डी. लूफी है। वह समुद्री लुटेरों के एक गिरोह का कप्तान है। लूफी हंसमुख स्वभाव का लड़का है, जो मुश्किल हालात में भी मुस्कराता रहता है। एक जादुई फल खाने के बाद उसका शरीर रबर की तरह खिंचने लगता है।
लूफी ‘वन पीस’ नाम का खजाना ढूंढना चाहता है। उसका सपना दुनिया का सबसे बड़ा समुद्री लुटेरा, यानी पाइरेट किंग बनना है।उसके जहाज का नाम ‘गोइंग मेरी’ है, जिस पर जॉली रोजर का झंडा लगा रहता है। उसके साथी खोपड़ी के निशान वाली टोपी पहनते हैं, जिसके ऊपर पुआल लगा होता है। इसी वजह से उसके गिरोह को ‘स्ट्रॉ हैट पाइरेट्स’ कहा जाता है।
कहानी में समुद्री लुटेरे हीरो हैं, विलेन नहीं
‘वन पीस’ की कहानी में स्ट्रॉ हैट पाइरेट्स समुद्री लुटेरे जरूर हैं, लेकिन उन्हें खलनायक के रूप में नहीं दिखाया गया है। उनका मुकाबला क्रूर शासकों वाली ग्लोबल गवर्नमेंट से होता है।कहानी में यह सरकार सच्चाई छिपाती है और अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाती है। लूफी और उसके साथी इस व्यवस्था का विरोध करते हैं। वे भ्रष्ट अधिकारियों से लड़ते हैं और लोगों को अत्याचारी शासकों के चंगुल से आजाद कराने की कोशिश करते हैं।
यही वजह है कि इस कहानी में जॉली रोजर का झंडा केवल समुद्री लुटेरों की पहचान नहीं रह जाता, बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ने और दमनकारी व्यवस्था को चुनौती देने का प्रतीक भी बन जाता है।साल 2022 तक दुनिया भर में ‘वन पीस’ की 51 करोड़ से ज्यादा कॉपी बिक चुकी थीं। किसी एक लेखक की लिखी कॉमिक्स सीरीज के लिए यह गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज एक बड़ा रिकॉर्ड है।

दुनिया के कई देशों में जेन-जी के लोग बचपन से इस कहानी को पढ़ते और देखते आए हैं। इस वजह से ‘वन पीस’ उनकी लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा बन चुका है।साल 1999 में इस पर एनीमे सीरीज भी शुरू हुई थी, जिसके 1,100 से ज्यादा एपिसोड रिलीज हो चुके हैं। साल 2023 में नेटफ्लिक्स पर इसकी लाइव-एक्शन सीरीज भी आई।साल 2023 से दुनिया के अलग-अलग देशों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान स्ट्रॉ हैट पाइरेट्स के खोपड़ी वाले काले झंडे का इस्तेमाल भी बढ़ने लगा।
Gen Z Protests: 2023 में इंडोनेशिया के प्रदर्शन में पहली बार दिखा झंडा
अक्टूबर 2023 में इंडोनेशिया के योग्याकार्ता और कुछ अन्य शहरों में गाजा पर इजराइली हमलों के विरोध में प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों के दौरान योग्याकार्ता में फिलिस्तीन के झंडे के साथ जॉली रोजर का झंडा भी दिखाई दिया।इसके बाद इंडोनेशिया समेत कम से कम पांच देशों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान इस झंडे का इस्तेमाल किया गया। धीरे-धीरे यह जेन-जी के आंदोलनों की पहचान बनने लगा।
Gen Z Protests: इंडोनेशिया में ट्रक ड्राइवरों और युवाओं ने फहराया झंडा
साल 2025 में इंडोनेशिया में इस झंडे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ। शुरुआत में ट्रक ड्राइवरों ने ओवरलोडिंग से जुड़े नियमों के विरोध में अपने ट्रकों पर इसे फहराया। उनका कहना था कि यह झंडा सरकार के प्रति नाराजगी और असंतोष दिखाने का तरीका है।इसके बाद राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने लोगों से 17 अगस्त को देश के स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अपील की। इसके जवाब में कई युवाओं ने स्वतंत्रता दिवस से पहले ही ‘वन पीस’ का झंडा फहराना शुरू कर दिया।युवाओं ने महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ रैलियां निकालीं। इन रैलियों के अलावा घरों की छतों पर भी यह झंडा दिखाई देने लगा।29 अगस्त को सुराबाया शहर में राज्यपाल के आवास के सामने एक प्रदर्शनकारी के हाथ में इंडोनेशिया के राष्ट्रीय ध्वज के साथ ‘वन पीस’ का झंडा भी देखा गया।
शुरुआत में सरकार ने चेतावनी दी कि इस झंडे को फहराना देशद्रोह माना जा सकता है। इसके बाद झंडे जब्त किए जाने लगे।25 अगस्त को सामने आई एक खबर ने लोगों की नाराजगी और बढ़ा दी। खबर के मुताबिक, इंडोनेशिया में सांसदों को वेतन के अलावा हर महीने लगभग 5 करोड़ इंडोनेशियाई रुपिया आवास भत्ते के रूप में मिल रहे थे।इसके बाद कई शहरों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए। प्रदर्शनकारियों ने जॉली रोजर और ‘वन पीस’ लिखे झंडों का इस्तेमाल किया। इन प्रदर्शनों में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी। बाद में सरकार को सांसदों के भत्ते और विशेष सुविधाएं वापस लेने का फैसला करना पड़ा।29 अगस्त को राजधानी जकार्ता में पुलिस मुख्यालय के सामने भी युवाओं ने प्रदर्शन किया।
Gen Z Protests: नेपाल में सोशल मीडिया बैन के खिलाफ आंदोलन में दिखा झंडा
नेपाल में सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे नाराज युवाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।8 सितंबर को हुए प्रदर्शनों के दौरान कई इमारतों में आग लगा दी गई। प्रदर्शनकारियों ने इमारतों पर झंडे फहराए। इसके साथ ही उन्होंने ‘वन पीस’ की कहानी की तरह नेताओं की तस्वीरों वाले पोस्टर लगाए, जिन पर उन्हें पकड़वाने के लिए नकली इनाम घोषित किए गए थे।प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में कम से कम 70 लोगों की मौत हुई। इसके बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा।सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं। बाद में बालेन शाह चुनाव जीतकर नए प्रधानमंत्री बने।नेपाल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘वन पीस’ के निशान वाले पोस्टर भी दिखाई दिए।
फिलीपींस में घोटाले के आरोपों के बाद प्रदर्शनों में दिखा झंडा
साल 2022 से 2025 के बीच राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के कार्यकाल में बाढ़ से निपटने वाली परियोजनाओं पर लगभग 10 अरब डॉलर खर्च किए गए। सितंबर 2025 में खबरें सामने आईं कि इन परियोजनाओं में अरबों रुपये का घोटाला हुआ है।इस खबर के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई।21 सितंबर को मनीला में 1972 में लागू किए गए मार्शल लॉ की बरसी के मौके पर दो बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। इनमें लगभग 50 हजार लोग शामिल हुए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘वन पीस’ का झंडा भी दिखाई दिया।इन प्रदर्शनों के पहले और बाद में कई वरिष्ठ नेताओं को इस्तीफा देना पड़ा।
Gen Z Protests: मेडागास्कर में बिजली-पानी की कमी के खिलाफ प्रदर्शन
25 सितंबर 2025 को मेडागास्कर में युवाओं ने बिजली और पानी की कमी के साथ सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान शुरू किया। उन्होंने राष्ट्रपति आंद्री राजोएलिना की सरकार को हटाने की मांग की।इसके बाद सड़कों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इन प्रदर्शनों में भी ‘वन पीस’ का झंडा इस्तेमाल किया गया।11 अक्टूबर को सेना की एक यूनिट प्रदर्शनकारियों के साथ आ गई। इसके बाद सेना ने सत्ता संभाल ली। प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 22 लोगों की मौत हुई, जबकि आंद्री राजोएलिना को देश छोड़कर भागना पड़ा।17 अक्टूबर को कर्नल माइकल रंद्रियानिरिना ने अंतरिम राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उन्होंने दो साल के भीतर चुनाव कराने का वादा किया।हालांकि, सैन्य तख्तापलट के कारण अफ्रीकी यूनियन ने मेडागास्कर की सदस्यता निलंबित कर दी।
फ्रांस में बजट कटौती के खिलाफ विरोध में भी दिखा झंडा
जुलाई 2025 में फ्रांस के प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू की सरकार ने बजट में कटौती करके 44 अरब यूरो बचाने का प्रस्ताव रखा था।इस प्रस्ताव के खिलाफ लोगों की नाराजगी बढ़ने लगी। 8 सितंबर को संसद में विश्वास मत हारने के बाद बायरू को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा।इसके बाद 10 सितंबर को ‘ब्लॉक एवरीथिंग’ अभियान के तहत पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी पेरिस में भी प्रदर्शनकारियों ने ‘वन पीस’ के झंडे के साथ विरोध जताया।मेक्सिको, मोरक्को, पेरू और पूर्वी तिमोर समेत कई अन्य देशों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी इस झंडे के इस्तेमाल की खबरें सामने आईं।अक्टूबर 2026 में मेक्सिको में हुए एक प्रदर्शन की तस्वीर में भी यह झंडा दिखाई दिया।
Gen Z Protests: भारत में भी जेन-जी के प्रदर्शनों का हिस्सा बना ‘वन पीस’
भारत में जुलाई 2026 में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पहली बार जॉली रोजर का झंडा दिखाई दिया। कोलकाता की जाधवपुर यूनिवर्सिटी में भी छात्रों ने इस निशान वाले पोस्टर लहराए थे।इसके बाद 10 और 11 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में एआईएसए प्रमुख नेहा बोरा इसी निशान वाली टी-शर्ट पहने नजर आईं।उनकी टी-शर्ट पर खोपड़ी का निशान और ‘वन पीस’ लिखा था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि विरोध प्रदर्शन में इस प्रतीक को चुनने के पीछे क्या संदेश है।
युवाओं के लिए यह झंडा विरोध और ताकत का प्रतीक
नेपाल में विरोध प्रदर्शनों के आयोजन में शामिल रहे बिख्यात खत्री का कहना है कि यह झंडा आक्रामकता और रास्ते में आने वाली रुकावटों को हटाने का प्रतीक है।उन्होंने बताया कि नेपाल में युवा एनीमे को काफी पसंद करते हैं। इसलिए वे चाहते थे कि विरोध प्रदर्शन जेन-जी का आंदोलन लगे। इसी वजह से ऐसे प्रतीकों और नारों का इस्तेमाल किया गया, जिनसे युवा आसानी से जुड़ सकें।जापानी इतिहास में पीएचडी करने वाली कॉमिक्स और एनीमे विशेषज्ञ एंड्रिया हॉर्बिंस्की का कहना है कि नेपाल में ‘वन पीस’ के झंडे का राजनीतिक इस्तेमाल देखकर उन्हें हैरानी नहीं हुई।उनके मुताबिक, कहानी का मुख्य किरदार लूफी अपने लक्ष्य को लेकर दृढ़ रहता है। हार और मुश्किलों के बावजूद वह अपने मकसद को हासिल करने की कोशिश करता है। लोग इसी भावना से जुड़कर विरोध प्रदर्शनों में यह झंडा लेकर आते हैं।
सिंगापुर नेशनल यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नताली पेंग के अनुसार, इस झंडे की खास बात यह है कि इसे अलग-अलग आंदोलनों में आसानी से अपनाया जा सकता है। हर आंदोलन में इसका मतलब अलग हो सकता है, लेकिन इसका साझा संदेश लोगों को एकजुट होने के लिए प्रेरित करना है।इस तरह ‘वन पीस’ का झंडा समुद्री लुटेरों की पुरानी पहचान से निकलकर आज युवाओं के विरोध प्रदर्शनों का प्रतीक बन गया है। इसके पीछे कहानी के उन विचारों की भी भूमिका है, जिनमें अन्याय का विरोध करना, सत्ता से सवाल पूछना और मुश्किल परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य पर टिके रहना शामिल है।









