Delhi Protest: दिल्ली में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर हो रहे प्रदर्शन के बीच राजनीतिक समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी बहस देखने को मिली। Khabar India के एक वीडियो में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों को एक-दूसरे के आरोपों का जवाब देते, चुनावी आंकड़ों पर सवाल उठाते और पुलिस की भूमिका पर अपनी राय रखते हुए देखा जा सकता है। कुछ लोगों ने मतदाता सूची में गड़बड़ी की जांच की मांग की, जबकि दूसरे पक्ष के लोगों ने इन आरोपों पर सवाल उठाए। इस दौरान माहौल कई बार तनावपूर्ण हुआ और प्रदर्शनकारियों तथा पत्रकारों के बीच भी बहस हुई।
Delhi Protest: मतदाता सूची से नाम कटने के मुद्दे पर शुरू हुई बहस
वीडियो की शुरुआत प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कुछ लोगों के बीच तीखी बहस से होती है। एक व्यक्ति प्रदर्शन करने आए लोगों से सवाल करता है कि उनके परिवार में किसका नाम मतदाता सूची से हटाया गया है। इसके जवाब में प्रदर्शन का समर्थन कर रहे लोग वोट चोरी के आरोपों को उठाते हैं और मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग करते हैं।एक व्यक्ति का कहना था कि उसके गांव में करीब 800 मतदाता हैं, जिनमें से 70 लोगों के वोट पड़ चुके हैं। हालांकि, वीडियो में इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दिखाई गई। बहस के बीच कुछ लोग प्रदर्शनकारियों पर केवल रील बनाने और सोशल मीडिया पर वीडियो डालने के लिए आने का आरोप भी लगाते हैं।
प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए गुंडागर्दी के आरोप
बहस बढ़ने पर कुछ लोग प्रदर्शनकारियों पर जनता को दौड़ाने और मारपीट करने का आरोप लगाते हैं। एक व्यक्ति का कहना था कि विरोध दर्ज कराने का तरीका शांतिपूर्ण होना चाहिए और किसी को भी हिंसा नहीं करनी चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन स्थल पर महिला पत्रकारों को भी अपनी बात रखने और सवाल पूछने में परेशानी हो रही थी।इस बीच, एक पत्रकार ने दिल्ली के कनॉट प्लेस से घटनास्थल की तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि पुलिस उपद्रव करने वालों को वहां से हटाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस किसी भी कीमत पर दंगे जैसी स्थिति नहीं बनने देना चाहती और 20 जुलाई को हुई घटना को दोबारा होने से रोकने का प्रयास कर रही है। हालांकि, वीडियो में 20 जुलाई की घटना का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
Delhi Protest: बीजेपी की सीटें घटने और वोट चोरी के आरोपों पर बहस
प्रदर्शन स्थल पर हरियाणा से आए रोहन नाम के एक युवक से भी सवाल किए गए। उसने बताया कि वह प्रदर्शन के समर्थन में आया है और उसके अनुसार, ईवीएम के जरिए चुनाव में वोट चोरी होने की घटनाएं सामने आई हैं।इस पर एक अन्य व्यक्ति ने सवाल किया कि अगर वोट चोरी हुई है, तो 2019 में बीजेपी की 303 सीटें थीं और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसकी सीटें घटकर 240 कैसे रह गईं। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच चुनावी नतीजों और अलग-अलग राज्यों में राजनीतिक दलों के प्रदर्शन को लेकर बहस शुरू हो गई।
बहस में असम का उदाहरण दिया गया, जहां एक व्यक्ति ने कहा कि कांग्रेस की सीटें पिछली बार की तुलना में कम हुई हैं। उसने केरल में बीजेपी की एक सीट और तमिलनाडु में दो सीटें मिलने का भी जिक्र किया। इसके जवाब में दूसरे पक्ष ने कहा कि चुनावी नतीजों में बदलाव अपने आप में वोट चोरी के आरोपों को सही या गलत साबित नहीं करता।उत्तर प्रदेश का जिक्र करते हुए एक व्यक्ति ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से वहां सत्ता में नहीं है। वहीं, दूसरे व्यक्ति ने लोकसभा चुनाव में बीजेपी की तुलना में समाजवादी पार्टी की अधिक सीटों का मुद्दा उठाया। इस तरह राजनीतिक दलों के प्रदर्शन को लेकर बहस लगातार आगे बढ़ती रही।
वोट कटने का सबूत देने पर इनाम की पेशकश
वीडियो में एक व्यक्ति बार-बार वोट चोरी का सबूत दिखाने की मांग करता है। वह दावा करता है कि अगर किसी का वोट गलत तरीके से काटा गया है, तो वह इसकी जांच कराने के लिए तैयार है। इसी क्रम में वह ऐसे व्यक्ति को 500 रुपये और बाद में 5,000 रुपये देने की बात कहता है, जो अपना नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए जाने का प्रमाण दे सके।बहस के दौरान कुछ लोगों से उनके नाम और हरियाणा में रहने की जगह के बारे में भी पूछा जाता है। झज्जर से जुड़े एक व्यक्ति का नाम अजय भारद्वाज बताया जाता है, जबकि वजीर सिंह नाम का भी जिक्र होता है। संबंधित व्यक्ति अपना फोन नंबर देने और मामले की जांच कराने की बात करता है।इस दौरान एक व्यक्ति सवाल उठाता है कि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह बीजेपी को ही वोट देता। उसका कहना था कि किसी व्यक्ति की मतदान संबंधी पसंद का अनुमान लगाकर यह तय नहीं किया जा सकता कि उसका नाम हटने के पीछे क्या वजह है।
Delhi Protest: पुलिस की भूमिका और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर चर्चा
प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। एक पत्रकार ने रोहन से पूछा कि पुलिस को निशाना बनाने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से विरोध क्यों नहीं किया जा सकता। इस पर रोहन ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण होना चाहिए और किसी तरह की गुंडागर्दी नहीं होनी चाहिए।बहस में पहलवानों के विरोध प्रदर्शन का उदाहरण भी सामने आया। एक पक्ष ने आरोप लगाया कि पहलवानों के प्रदर्शन में पुलिस के साथ मारपीट हुई थी, जबकि दूसरे पक्ष ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था।इसके बाद बहस का रुख बांग्लादेश के अलग होने, 1984 के दंगों और भारत-पाकिस्तान विभाजन जैसे ऐतिहासिक विषयों की ओर मुड़ गया। एक व्यक्ति ने इन घटनाओं का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि इनसे आम लोगों को क्या फायदा हुआ। हालांकि, इन मुद्दों पर कोई सहमति बनती नहीं दिखाई दी।
युवा प्रदर्शनकारियों से पूछे गए सवाल
वीडियो में कुछ युवाओं से उनकी उम्र और मतदाता सूची में नाम होने के बारे में भी सवाल किए गए। एक युवक ने बताया कि वह 19 साल का हो चुका है, लेकिन अभी तक उसका वोट नहीं बना है। उसने कहा कि जब उसका नाम ही मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, तो वह अपना वोट कटने का दावा कैसे कर सकता है।इस पर दूसरे व्यक्ति ने उसके परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड का जिक्र किया और कहा कि उसके पिता का नाम पिछले 40 से 45 वर्षों से दर्ज रहा है। बहस में युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए उनसे जिम्मेदारी से अपनी बात रखने की अपील भी की गई।एक व्यक्ति ने यह भी कहा कि युवा आगे चलकर देश के लिए पदक जीत सकते हैं और उन्हें अपनी ऊर्जा सकारात्मक कामों में लगानी चाहिए। इसी दौरान प्रदर्शन के लिए दूसरी जगह चुनने की बात भी कही गई। बुलंदशहर से होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने कहा कि उसके पास 25 बीघा जमीन है और प्रदर्शनकारी चाहें तो वहां धरना दे सकते हैं।
Delhi Protest: उत्तर प्रदेश पुलिस को लेकर भी हुई बहस
प्रदर्शन स्थल पर उत्तर प्रदेश पुलिस की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए गए। एक व्यक्ति ने पूछा कि जब दिल्ली में दिल्ली पुलिस मौजूद है, तो उत्तर प्रदेश पुलिस यहां क्यों आई है।इसके जवाब में दूसरे व्यक्ति ने कहा कि अगर देश के खिलाफ कोई गतिविधि होगी, तो पुलिस और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्रवाई और उसके तौर-तरीकों को लेकर तीखी टिप्पणियां भी की गईं।बहस में दिल्ली और नोएडा का जिक्र करते हुए कुछ लोगों ने एक-दूसरे को चुनौती दी। इसी बीच प्रदर्शन स्थल पर नारेबाजी भी सुनाई दी। कुछ लोगों ने मीडिया के खिलाफ नारे लगाए, जबकि दूसरे लोग युवाओं के समर्थन में नारे लगाते नजर आए।
मोदी सरकार और ईवीएम को लेकर आमने-सामने आए लोग
वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को लेकर भी नारेबाजी होती दिखाई देती है। कुछ लोग सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाते हैं, जबकि दूसरे पक्ष के लोग कहते हैं कि प्रधानमंत्री का चुनाव वोट के जरिए हुआ है।इसके बाद ईवीएम और वोट चोरी का मुद्दा फिर उठता है। एक पक्ष का दावा था कि चुनाव में वोट चोरी हुई है, जबकि दूसरा पक्ष इन आरोपों के समर्थन में सबूत मांगता है। कुछ लोग प्रदर्शन में शामिल युवाओं की उम्र और उनके पास वोटर आईडी कार्ड होने या न होने पर भी सवाल उठाते हैं।इस बीच, एक व्यक्ति ने कहा कि बीजेपी से उनकी नाराजगी 2014 से है। दूसरे व्यक्ति ने जवाब दिया कि उसकी समस्या किसी एक राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि वोट चोरी के आरोपों से है।
Delhi Protest: जिनका नाम नहीं कटा, वे भी उठा रहे थे सवाल
वीडियो में एक युवक से पूछा जाता है कि जब उसका नाम मतदाता सूची से नहीं हटा है, तो वह प्रदर्शन में क्यों शामिल है। युवक जवाब देता है कि उसका और उसके परिवार का नाम नहीं कटा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसी दूसरे व्यक्ति का नाम भी नहीं हटाया गया होगा।इस पर दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो जाती है। एक व्यक्ति आरोप लगाता है कि कुछ लोग केवल सोशल मीडिया के लिए वीडियो बना रहे हैं, ताकि प्रदर्शन की तस्वीरें फेसबुक और दूसरे मंचों पर साझा कर सकें। इसके जवाब में पत्रकार भी सवाल करते हैं कि क्या प्रदर्शन में शामिल लोग खुद सामग्री बनाने के लिए आए हैं।
एसआईआर के पूरे नाम को लेकर भी हुई नोकझोंक
वीडियो के अंतिम हिस्से में एसआईआर को लेकर बहस दिखाई देती है। कुछ लोग प्रदर्शन में शामिल युवाओं से एसआईआर का पूरा नाम बताने को कहते हैं। वे सवाल करते हैं कि जब प्रदर्शन मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे पर हो रहा है, तो इसमें शामिल लोगों को इस प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए।दूसरी ओर, कुछ लोग सवालों को मुद्दे से भटकाने वाला बताते हैं और कहते हैं कि मतदाता सूची से नाम हटने के आरोपों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इस दौरान पत्रकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक जारी रहती है।
Delhi Protest: वोटर लिस्ट और चुनावी पारदर्शिता बना बहस का केंद्र
Khabar India के इस वीडियो में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, ईवीएम, चुनावी नतीजों, पुलिस की भूमिका और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जैसे कई मुद्दों पर लोगों के अलग-अलग विचार सामने आए। जहां कुछ लोग वोट चोरी के आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग करते नजर आए, वहीं दूसरे पक्ष ने आरोपों के समर्थन में सबूत पेश करने की बात कही।हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं दिखाई गई है। ऐसे में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित मतदाता सूची, आधिकारिक चुनावी आंकड़ों और जांच से जुड़े प्रमाणों को देखना जरूरी है।









