Elon Musk Starlink: एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक इन दिनों भारत में चर्चा का विषय बनी हुई है। कंपनी भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहती है, लेकिन इसे लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि स्टारलिंक जैसी विदेशी सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए चुनौती बन सकती हैं। इसी वजह से स्टारलिंक को फिलहाल भारत में सेवा शुरू करने के लिए सुरक्षा संबंधी मंजूरी नहीं मिल पाई है। एलन मस्क ने भी मंजूरी मिलने में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, किसी भी देश के लिए उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है।
Elon Musk Starlink: पूर्व सेना प्रमुख वेद मलिक ने जताई चिंता
भारत के पूर्व सेना प्रमुख वेद मलिक ने कहा है कि वह नहीं चाहेंगे कि भारत किसी विदेशी दूरसंचार प्रणाली पर निर्भर रहे। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और हाल ही में वॉशिंगटन द्वारा लगाए गए व्यापार शुल्क का भी जिक्र किया।वेद मलिक ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और कारगिल युद्ध के समय अमेरिका द्वारा लगाए गए रक्षा प्रतिबंधों के अनुभव को देखते हुए वह भारत को किसी विदेशी दूरसंचार प्रणाली पर निर्भर नहीं देखना चाहेंगे। उन्होंने हाल के व्यापार शुल्क और अन्य प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया।
कारगिल युद्ध के दौरान क्यों बढ़ी थी भारत की मुश्किलें?
वेद मलिक अक्टूबर 1997 से सितंबर 2000 तक भारतीय सेना के प्रमुख रहे थे। वर्ष 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने ही सेना का नेतृत्व किया था।उनके कार्यकाल के दौरान मई 1998 में भारत के पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के प्रशासन ने भारत पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे। इन प्रतिबंधों के तहत रक्षा उपकरणों की बिक्री, सैन्य तकनीक के हस्तांतरण, वित्तीय सहायता और ऐसी संवेदनशील तकनीक के निर्यात पर रोक लगाई गई थी, जिसका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।मई 1999 में कारगिल युद्ध शुरू होने के समय भी ये प्रतिबंध कुछ हद तक लागू थे। इसके कारण भारत को कुछ विदेशी रक्षा उपकरणों और आपूर्ति तक पहुंच बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इसी अनुभव के आधार पर वेद मलिक का मानना है कि देश की सुरक्षा के लिए विदेशी तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से बचना जरूरी है।
Elon Musk Starlink: एलन मस्क ने क्या कहा?
स्पेसएक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलन मस्क अपनी कंपनी स्टारलिंक को भारत में इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए लाइसेंस दिलाना चाहते हैं। स्टारलिंक उपग्रहों के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराती है।मस्क ने भारत में कंपनी को मंजूरी मिलने में हो रही देरी की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी हित स्टारलिंक की भारत में एंट्री में बाधा डाल रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने उनके आरोपों को खारिज कर दिया है।विशेषज्ञों का कहना है कि स्टारलिंक को लेकर चिंता केवल दूरसंचार बाजार में प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है। सबसे अहम सवाल यह है कि इस तकनीक को कौन नियंत्रित करेगा और इसके जरिए एकत्र किए जाने वाले डेटा पर किसका अधिकार होगा।

यूजर्स को पता चले बिना बदला जा सकता है डेटा
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के पूर्व सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एसएल नरसिम्हन ने भी विदेशी तकनीक पर निर्भरता को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ऐसी निर्भरता भारत की सुरक्षा को कमजोर कर सकती है।उन्होंने चेतावनी दी कि उपयोगकर्ताओं को जानकारी दिए बिना डेटा में बदलाव किया जा सकता है, जिसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। नरसिम्हन के अनुसार, समय के साथ यह समझना जरूरी हो गया है कि किसी दूसरे देश की तकनीक पर निर्भर रहना अपने आप में एक कमजोरी हो सकती है।उन्होंने डेटा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बताया। उनका कहना है कि डेटा की निगरानी, उसे जरूरत पड़ने पर हासिल करने और देश के भीतर सुरक्षित रखने जैसे प्रावधानों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में भारत के सामने गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।नरसिम्हन ने भारत की अपनी अंतरिक्ष तकनीक विकसित करने की कोशिशों का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, देश को ऐसी स्वदेशी प्रणालियां तैयार करनी चाहिए, जो सैटेलाइट इंटरनेट जैसी सुविधाएं दे सकें और विदेशी सेवाओं को टक्कर दे सकें।
Elon Musk Starlink: स्टारलिंक को नियंत्रित कौन करेगा?
स्टारलिंक की तकनीक इंटरनेट कनेक्टिविटी के लिए काफी उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसके संचालन और नियंत्रण को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चूंकि इस नेटवर्क का संचालन एक विदेशी निजी कंपनी करती है, इसलिए तकनीक पर उसका नियंत्रण रहता है।चिंता यह है कि यदि नेटवर्क का संचालन करने वाली कंपनी भारत के बाहर स्थित है, तो किसी आपात स्थिति में उसके फैसलों पर भारत का सीधा नियंत्रण सीमित हो सकता है। इसी वजह से विशेषज्ञ चाहते हैं कि ऐसी सेवाओं को मंजूरी देने से पहले उनके संचालन, डेटा और सुरक्षा से जुड़े अधिकार स्पष्ट किए जाएं।
सीमा पार घुसपैठ और आतंकवादी गतिविधियों का खतरा
स्टारलिंक जैसी सेवाओं के दुरुपयोग को लेकर भी आशंकाएं जताई जा रही हैं। चिंता है कि सीमा पार घुसपैठ करने वाले लोग या आतंकवादी संगठन इन सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में संदिग्ध उपकरणों और टर्मिनलों की पहचान करने तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत बंद करने की व्यवस्था होनी चाहिए।रक्षा और महत्वपूर्ण सरकारी संचार के लिए स्वदेशी नेटवर्क को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुदूर और संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी निजी नेटवर्क की पहुंच बढ़ने से सीमा पार से आने वाले संकेतों और अनधिकृत गतिविधियों पर नजर रखना मुश्किल हो सकता है।इसके अलावा, स्टारलिंक के नेटवर्क से गुजरने वाले इंटरनेट ट्रैफिक और उपग्रहों के बीच होने वाले संचार पर भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सीधी निगरानी सीमित हो सकती है। विदेशी उपग्रहों के जरिए उपयोगकर्ताओं के डेटा की निगरानी करने या उसमें बदलाव किए जाने की आशंका भी जताई गई है।
Elon Musk Starlink: 26/11 मुंबई हमले से क्या सबक मिला?
स्टारलिंक को मंजूरी देने से पहले सुरक्षा से जुड़े सभी जरूरी नियमों और शर्तों का पालन सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसकी एक वजह 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले के दौरान सामने आई संचार संबंधी सुरक्षा चुनौतियां भी हैं।इस हमले से यह सबक मिला कि संचार सेवाओं की प्रभावी निगरानी के लिए जरूरी तकनीकी क्षमताएं और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई संचार तकनीक को मंजूरी देते समय इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
सरकार ने स्टारलिंक को लेकर क्या स्पष्ट किया?
भारत सरकार ने सैटेलाइट संचार सेवाओं को रोके जाने के आरोपों पर एलन मस्क की आलोचना की और साफ किया कि देश में किसी भी सैटेलाइट संचार सेवा को चलाने के लिए सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है।सरकार के मुताबिक, भारत में लाइसेंस लेने वाली हर सैटेलाइट संचार कंपनी को यह साबित करना होगा कि वह निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करती है। इसलिए स्टारलिंक को भी दूसरे सेवा प्रदाताओं की तरह इन शर्तों को पूरा करना होगा।
Elon Musk Starlink: क्या है स्टारलिंक और कैसे काम करता है?
स्टारलिंक पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले हजारों उपग्रहों के नेटवर्क के जरिए इंटरनेट उपलब्ध कराता है। कंपनी दुनिया के सबसे बड़े सैटेलाइट नेटवर्क में से एक का संचालन करती है, जिसमें 6,750 से अधिक उपग्रह कक्षा में स्थापित बताए गए हैं।पारंपरिक संचार उपग्रह पृथ्वी से लगभग 35,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित होते हैं। इतनी दूरी के कारण उनके जरिए भेजे गए सिग्नल को आने-जाने में अधिक समय लगता है।इसके विपरीत, स्टारलिंक के उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 550 किलोमीटर की ऊंचाई पर काम करते हैं। इससे डेटा कम दूरी तय करता है और इंटरनेट कनेक्शन में देरी कम हो सकती है।इस व्यवस्था में पृथ्वी पर मौजूद ग्राउंड स्टेशन इंटरनेट के मुख्य फाइबर केबल नेटवर्क से जुड़े होते हैं। ये स्टेशन डेटा को अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों तक भेजते हैं। इसके बाद उपग्रह आपस में लेजर किरणों के जरिए डेटा का आदान-प्रदान कर सकते हैं। इससे कुछ स्थितियों में डेटा को जमीन पर बिछी केबलों के पूरे रास्ते से गुजारे बिना तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकता है।
मणिपुर में स्टारलिंक के इस्तेमाल से बढ़ी चिंता
वर्ष 2024 में मणिपुर में उग्रवादी समूहों द्वारा स्टारलिंक उपकरणों के इस्तेमाल की खबरों के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई थीं। उस समय राज्य मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा का सामना कर रहा था।पुलिस ने कहा था कि ये उपकरण संभवतः म्यांमार से तस्करी करके लाए गए थे, जहां स्टारलिंक की सेवा उपलब्ध है। एलन मस्क ने उस समय कहा था कि भारत में स्टारलिंक की इंटरनेट सेवा के लिए सिग्नल उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।
हालांकि, ब्रिटिश अखबार ‘द गार्डियन’ ने सशस्त्र समूहों और मणिपुर पुलिस से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया था कि म्यांमार सीमा के पास कुछ इलाकों में ये उपकरण काम कर रहे थे।अखबार ने मणिपुर के पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के एक सदस्य के हवाले से यह भी बताया था कि सरकारी स्तर पर इंटरनेट बंद किए जाने के दौरान समूह ने राज्य के भीतर इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए स्टारलिंक उपकरणों का सहारा लिया था।इसी वर्ष भारतीय तटरक्षक बल ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पास एक नाव से स्टारलिंक उपकरण जब्त किया था। इस नाव का इस्तेमाल मादक पदार्थों की तस्करी के लिए किया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, उपकरण का इस्तेमाल संभवतः भारतीय समुद्री क्षेत्र में रास्ता तय करने के लिए किया जा रहा था।इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा किया कि यदि ऐसी तकनीक का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए किया जाता है, तो उसकी पहचान और निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाएगी।
Elon Musk Starlink: स्टारलिंक पर भारत में किन बातों को लेकर सवाल हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, स्टारलिंक को मंजूरी देने से पहले डेटा की सुरक्षा और नेटवर्क पर भारत के नियंत्रण से जुड़े कई मुद्दों का समाधान जरूरी है।
- डेटा पर नियंत्रण: भारतीय नागरिकों के डेटा का इस्तेमाल और उसकी सुरक्षा किस तरह होगी, यह स्पष्ट होना चाहिए।
- उपयोगकर्ताओं की पहचान: इंटरनेट ट्रैफिक को भारत के भीतर सही तरीके से भेजने और हर टर्मिनल व ग्राहक की पहचान सत्यापित करने की व्यवस्था होनी चाहिए।
- कानूनी निगरानी: सुरक्षा एजेंसियों को कानून के तहत जरूरत पड़ने पर संचार की निगरानी करने और नेटवर्क का ऑडिट करने की सुविधा मिलनी चाहिए।
- नेटवर्क रिकॉर्ड की निगरानी: नेटवर्क से जुड़े रिकॉर्ड और डेटा के इस्तेमाल पर भारतीय नियमों के अनुसार निगरानी होनी चाहिए।
- आपातकालीन स्थिति में नियंत्रण: जरूरत पड़ने पर भारत सरकार के पास सेवा को सीमित करने या बंद करने का अधिकार होना चाहिए।
- युद्ध और संकट के समय सुरक्षा: किसी युद्ध या राष्ट्रीय संकट के दौरान विदेशी कंपनी के नियंत्रण वाले नेटवर्क पर निर्भरता देश के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही ऐसी सेवाओं को मंजूरी दी जानी चाहिए।
किन देशों में स्टारलिंक पर प्रतिबंध है?
चीन, रूस, ईरान, उत्तर कोरिया, सीरिया, अफगानिस्तान, क्यूबा, बेलारूस, म्यांमार और नामीबिया में स्टारलिंक की सेवा पर प्रतिबंध होने की बात कही गई है। इनमें से कई देशों में राष्ट्रीय सुरक्षा और दूरसंचार से जुड़े नियमों के तहत इस सेवा को अनुमति नहीं दी गई है।इन देशों की चिंता है कि विदेशी सैटेलाइट तकनीक से नागरिकों की निजी जानकारी और देश की संप्रभुता को खतरा हो सकता है। हालांकि, अलग-अलग देशों में प्रतिबंधों की स्थिति और उनके कानूनी कारण अलग हो सकते हैं।
Elon Musk Starlink: चीन में एलन मस्क की टेस्ला कारों पर भी पाबंदियां
चीन में एलन मस्क की कंपनी टेस्ला की कारों को लेकर भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं सामने आ चुकी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, वर्ष 2022 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के चेंगदू दौरे के दौरान कुछ सड़कों पर टेस्ला की गाड़ियों की आवाजाही रोक दी गई थी।वर्ष 2023 में विश्व विश्वविद्यालय खेलों के उद्घाटन समारोह के दौरान भी शहर के कुछ हिस्सों में टेस्ला की कारों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें आई थीं। चीनी सेना ने भी सुरक्षा कारणों से अपने परिसरों में टेस्ला की गाड़ियों के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी।चीन में आशंका जताई गई कि टेस्ला की कारों में लगे कैमरे संवेदनशील स्थानों की तस्वीरें रिकॉर्ड कर सकते हैं और यह डेटा विदेश तक पहुंच सकता है। इसी तरह की चिंताएं विदेशी तकनीक और उससे जुड़े डेटा के नियंत्रण को लेकर भी उठाई जाती हैं।
आरएसएस से जुड़े संगठन ने भी जताया विरोध
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने भी केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में व्यावसायिक सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवा शुरू करने की अनुमति न दी जाए।संगठन का तर्क है कि स्टारलिंक की तकनीक के कारण इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाना और सुरक्षा से जुड़ी निगरानी करना मुश्किल हो सकता है।स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने अपने बयान में कहा कि भारत फिलहाल कानून-व्यवस्था से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे हालात में इंटरनेट आधारित सोशल मीडिया के जरिए अफवाहें और देश विरोधी विचार फैलने की आशंका रहती है।उन्होंने आगे कहा कि अलगाववाद, आतंकवाद, दंगों, विरोध प्रदर्शनों और ऐसी अन्य घटनाओं के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाना जरूरी हो जाता है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार से स्टारलिंक को भारत में काम करने की अनुमति नहीं देने की अपील की।
Elon Musk Starlink: उपग्रहों के आपसी संपर्क से निगरानी की चुनौती
स्वदेशी जागरण मंच ने स्टारलिंक की उपग्रह व्यवस्था को भी एक विशेष चुनौती बताया। संगठन के अनुसार, स्टारलिंक के उपग्रह लेजर लिंक के जरिए एक-दूसरे से सीधे संपर्क कर सकते हैं।इस व्यवस्था में डेटा किसी ग्राउंड स्टेशन तक पहुंचने से पहले कई उपग्रहों के बीच से गुजर सकता है। संगठन का मानना है कि इससे डेटा के रास्ते को समझना और संचार पर निगरानी रखना अधिक जटिल हो सकता है।कुल मिलाकर, स्टारलिंक भारत के दूरदराज के इलाकों में तेज इंटरनेट पहुंचाने की क्षमता रखता है, लेकिन इसकी शुरुआत से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा की सुरक्षा, कानूनी निगरानी और नेटवर्क पर देश के नियंत्रण से जुड़े सवालों का समाधान जरूरी है। सरकार के सामने चुनौती ऐसी तकनीक का लाभ उठाने और देश की सुरक्षा व संप्रभुता की रक्षा के बीच संतुलन बनाने की है।









