UP Election 2027: नोएडा के सेक्टर-18 स्थित अट्टा मार्केट में इन दिनों राजनीतिक चर्चाओं के साथ व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर वोट चोरी के आरोपों और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के मुद्दे पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच दुकानदारों का कहना है कि बाजार में ग्राहकों की आवाजाही और कामकाज प्रभावित हो रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भी लोगों की अलग-अलग राय सामने आई। खबर इंडिया की टीम ने बाजार में पहुंचकर दुकानदारों और स्थानीय लोगों से उनके विचार जाने। इस दौरान कई लोगों ने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के प्रति समर्थन जताया, जबकि चुनाव, वोट चोरी के आरोपों और विपक्ष की भूमिका पर भी अपनी राय रखी।
UP Election 2027: प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होने का दावा
अट्टा मार्केट के एक दुकानदार ने कहा कि जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का असर बाजार के कामकाज पर पड़ रहा है। उसके मुताबिक, कारोबार पहले की तुलना में काफी प्रभावित हुआ है। दुकानदार ने कहा कि जब प्रदर्शन करना हो तो उसके लिए किसी निर्धारित मैदान का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि छोटे व्यापारियों को नुकसान न उठाना पड़े।उसने दिवाली के नजदीक आने का जिक्र करते हुए कहा कि यह कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण समय है। ऐसे में व्यापार प्रभावित होने से दुकानदारों की परेशानी बढ़ सकती है। उसने विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन पर भी नाराजगी जताई और कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार को ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
2027 के चुनाव में भाजपा की वापसी का भरोसा
बाजार में मौजूद कई लोगों ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन का उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव पर खास असर नहीं पड़ेगा। कुछ लोगों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ ही दोबारा मुख्यमंत्री बनेंगे और भाजपा की सरकार फिर से आएगी।एक स्थानीय व्यक्ति ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी की राजनीतिक गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष चाहे जितना विरोध कर ले, उससे भाजपा की स्थिति पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। उसने हाथी के बाजार से गुजरने और कुत्तों के भौंकने का उदाहरण देते हुए विपक्ष के विरोध को बेअसर बताया।एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि किसी नेता के इस्तीफे की मांग करने भर से कुछ नहीं बदलता। उसके मुताबिक, विपक्ष को अपने आरोपों को साबित करना चाहिए। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि राजनीति में आगे क्या होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन उन्हें फिलहाल भाजपा की वापसी की उम्मीद है।
UP Election 2027: वोट चोरी के आरोपों को बताया राजनीतिक मुद्दा
वोट चोरी के आरोपों पर बाजार में मौजूद लोगों ने असहमति जताई। उनका कहना था कि चुनाव में हारने के बाद ईवीएम और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना विपक्ष की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल उन्हीं चुनावों में गड़बड़ी की बात करता है, जहां भाजपा जीतती है, जबकि दूसरे दलों की जीत पर ऐसे सवाल नहीं उठाए जाते।एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि अगर चुनाव में भाजपा की जीत को वोट चोरी का नतीजा बताया जाता है, तो दूसरे राज्यों में हुए चुनावों को लेकर भी समान सवाल उठने चाहिए। उसने बिहार, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या वहां चुनावी प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।उसका कहना था कि केवल किसी पार्टी की जीत के आधार पर चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाना उचित नहीं है। हालांकि, ये बाजार में मौजूद लोगों के व्यक्तिगत विचार थे और इनसे चुनावी अनियमितताओं के आरोपों की सत्यता तय नहीं होती।
UP Election 2027: एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग दावे
एसआईआर को लेकर पूछे गए सवाल पर कुछ लोगों ने इस प्रक्रिया का समर्थन किया। उनका तर्क था कि मतदाता सूची की जांच करना जरूरी है, ताकि उसमें मौजूद गलत नामों की पहचान की जा सके। एक व्यक्ति ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां बांग्लादेश से आए 60 लाख से अधिक मुस्लिम लोग मौजूद थे और उन्हें मतदाता सूची से हटाने के प्रयास गलत नहीं हैं।यह संख्या और इससे जुड़ा दावा संबंधित व्यक्ति का बयान था। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई।वहीं, वोट चोरी के आरोपों पर लोगों ने कहा कि मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के आधार पर निकाला जाना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर भी सवाल उठाए गए। एक व्यक्ति ने कहा कि जब तक संबंधित याचिका पर फैसला नहीं आता, तब तक आरोपों को सही या गलत मानने के बजाय निर्णय का इंतजार करना चाहिए।हालांकि, इस विषय पर मौजूद लोगों के बीच मतभेद भी दिखाई दिए। कुछ ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया, जबकि कुछ ने कहा कि ऐसे मामलों में तथ्यों और कानूनी फैसलों को महत्व दिया जाना चाहिए।
UP Election 2027: योगी सरकार के समर्थन में स्थानीय लोगों ने रखे विचार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर पूछे जाने पर कई लोगों ने योगी आदित्यनाथ को अपनी पसंद का मुख्यमंत्री बताया। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें सरकार की ओर से सुरक्षा मिलने का भरोसा है और वे मौजूदा व्यवस्था से संतुष्ट हैं।एक व्यक्ति ने कहा कि वह सड़क पर काम करके अपनी रोजी-रोटी कमाता है और उसे अपनी सुरक्षा की चिंता है। उसने कहा कि उसे किसी आर्थिक सहायता के वादे से ज्यादा अपने हाथ-पैर सुरक्षित रहने और मेहनत करके जीवन चलाने की चिंता है। अखिलेश यादव की ओर से महिलाओं को एक लाख रुपये देने के वादे के संदर्भ में उसने कहा कि उसके लिए सुरक्षा और रोजगार अधिक महत्वपूर्ण हैं।कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के रूप में भाजपा नेतृत्व को समर्थन देने की बात कही। एक व्यक्ति ने भगवान राम और शबरी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह शबरी के मन से राम के प्रति आस्था नहीं निकाली जा सकती, उसी तरह योगी आदित्यनाथ के प्रति लोगों का समर्थन भी आसानी से खत्म नहीं होगा।
अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर लगाए आरोप
बाजार में मौजूद कुछ लोगों ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक लाभ हासिल करने की कोशिश बताया। उनका कहना था कि विपक्ष जनता को प्रभावित करके आगामी चुनाव में फायदा उठाना चाहता है।एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता उनके दावों से प्रभावित नहीं होगी। उसने यह भी कहा कि देश में बांग्लादेश या नेपाल जैसी स्थिति पैदा करने की आशंकाएं जताना उचित नहीं है।कुछ लोगों ने यह भी कहा कि विपक्ष के प्रदर्शन से देश की छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, राजनीतिक अस्थिरता की धारणा बनने से निवेश करने वाली कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, ये आशंकाएं संबंधित लोगों की राय पर आधारित थीं।
UP Election 2027: चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और चुनाव की तारीखों पर उठाए सवाल
बाजार में मौजूद आयुष नाम के एक युवक ने चुनावी घटनाओं की तारीखों का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए। उसने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का परिणाम 2024 में आया था, जबकि दिल्ली विधानसभा चुनाव का परिणाम 5 फरवरी 2025 को आया। उसके मुताबिक, ज्ञानेश कुमार ने 17 फरवरी 2025 को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था।युवक ने तर्क दिया कि जिन चुनावों के संबंध में ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाए जा रहे हैं, वे उनके पद संभालने से पहले ही हो चुके थे। इसलिए उसने पूछा कि इन चुनावों में कथित वोट चोरी के लिए उन्हें जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है।उसने यह भी कहा कि चुनाव में हारने पर गड़बड़ी का आरोप लगाना और जीतने पर चुनाव प्रक्रिया को सही मान लेना उचित नहीं है। उसके अनुसार, राजनीतिक दलों को अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य पेश करने चाहिए।
बैलेट पेपर और ईवीएम को लेकर भी हुई चर्चा
चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल और बैलेट पेपर की मांग पर भी लोगों ने अपनी राय रखी। एक युवक ने त्रिपुरा में बैलेट पेपर से हुए स्थानीय चुनावों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि वहां भाजपा को बड़ी जीत मिली थी और कांग्रेस को बहुत कम सीटें हासिल हुई थीं।उसने कहा कि अगर बैलेट पेपर से चुनाव होने पर भी किसी पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है, तो केवल ईवीएम को चुनावी हार की वजह बताना सही नहीं है। हालांकि, बातचीत में त्रिपुरा के चुनावों से जुड़े आंकड़ों और विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई।युवक ने कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठाए। उसने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को मिली चार सीटों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी को अपनी राजनीतिक स्थिति का आकलन करना चाहिए। उसका दावा था कि कांग्रेस अब पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं है और विपक्षी दल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
UP Election 2027: शिक्षा मंत्री और आईआईटी बॉम्बे के मामले का भी जिक्र
प्रदर्शन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हुए एक व्यक्ति ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और आईआईटी बॉम्बे के एक प्रोफेसर का भी उल्लेख किया। उसने आरोप लगाया कि जब किसी मामले में गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करने के बजाय राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो जाते हैं।उसने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने गड़बड़ी रोकने का प्रयास किया है, तो उसे भी इस्तीफा देने के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। बातचीत में अभिजीत दीप का नाम लेते हुए उसने सवाल किया कि किसी मामले में अनियमितताओं को रोकने की कोशिश करने वाले व्यक्ति पर ही सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं।
अपराध और विकास के मुद्दे पर योगी सरकार का बचाव
उत्तर प्रदेश में अपराध और विकास को लेकर भी चर्चा हुई। योगी सरकार का समर्थन करने वाले एक युवक ने दावा किया कि अखिलेश यादव की सरकार के समय राज्य में अपराध दर 17.9 प्रतिशत थी, जबकि मौजूदा सरकार के समय स्थिति में सुधार हुआ है। हालांकि, बातचीत में बताए गए आंकड़ों का स्रोत स्पष्ट नहीं किया गया और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।युवक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास के काम दिखाई दे रहे हैं। उसने कानपुर से लखनऊ की यात्रा का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले इस सफर में करीब डेढ़ घंटे लगते थे, जबकि अब हाईवे के जरिए लगभग 45 मिनट में पहुंचा जा सकता है।उसने दिल्ली से देहरादून की यात्रा का उदाहरण भी दिया। उसके मुताबिक, जब सड़क और परिवहन सुविधाओं में सुधार होता है, तो लोगों को कम समय में अपनी मंजिल तक पहुंचने का लाभ मिलता है। उसने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह सरकार के कामों की सराहना करने के बजाय कमियां तलाशने पर अधिक ध्यान देता है।
UP Election 2027: महिला सुरक्षा और पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के तरीके पर आपत्ति जताते हुए एक युवक ने महिला सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मुद्दे उठाए। उसका कहना था कि अगर किसी राजनीतिक या सामाजिक विषय पर विरोध करना है, तो उसके लिए शांतिपूर्ण तरीका अपनाया जाना चाहिए।उसने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं देश की छवि को प्रभावित करती हैं। उसने सवाल किया कि महिला सुरक्षा की मांग करने वाले लोग अगर महिला पुलिसकर्मियों के साथ ही दुर्व्यवहार करें, तो इसे कैसे सही ठहराया जा सकता है।युवक ने भारतीय सेना के सम्मान का मुद्दा भी उठाया। उसने बताया कि उसके पिता सेना में हैं और परिवार को लंबे समय तक उनसे दूर रहना पड़ता है। उसने कहा कि सेना के जवानों के योगदान को देखते हुए उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करना उचित नहीं है। उसने विरोध प्रदर्शन के दौरान सेना को लेकर की गई कथित टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई।उसका मानना था कि राजनीतिक विरोध के नाम पर ऐसी गतिविधियां देश में अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं। हालांकि, इन आरोपों और घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई।
जाति के आधार पर समर्थन देने से इनकार
बातचीत के अंतिम हिस्से में युवक से पूछा गया कि क्या यादव समाज अखिलेश यादव से नाराज है। इस पर उसने कहा कि पूरे समाज की राय को एक जैसा नहीं माना जा सकता। उसके मुताबिक, हर व्यक्ति की अपनी राजनीतिक सोच और पसंद होती है।उसने बताया कि वह खुद यादव समुदाय से है, लेकिन केवल जाति के आधार पर किसी नेता का समर्थन करना जरूरी नहीं समझता। उसने कहा कि वह किसी पार्टी का प्रवक्ता नहीं है और उसका समर्थन उस नेतृत्व के लिए है, जिसके काम उसे दिखाई देते हैं।युवक ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव की राजनीति पर सवाल उठाते हुए अतीक अहमद और आजम खान का भी जिक्र किया। उसने अतीक अहमद के कथित आपराधिक संबंधों को लेकर समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाए और पूछा कि पार्टी ने ऐसे नेताओं के मामले में क्या कदम उठाए। साथ ही, उसने भाजपा में मौजूद कथित आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जरूरत स्वीकार की।उसका कहना था कि किसी भी पार्टी में कमियां हो सकती हैं और उन्हें दूर करना जरूरी है। लेकिन उसके मुताबिक, किसी एक मुद्दे को बढ़ाकर पूरे देश में अस्थिरता का माहौल बनाना सही नहीं है।
UP Election 2027: बाजार में दिखी राजनीतिक विचारों की विविधता
खबर इंडिया की टीम को अट्टा मार्केट में लोगों के बीच मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर चर्चा देखने को मिली—प्रदर्शन से कारोबार पर पड़ने वाला असर, वोट चोरी और एसआईआर को लेकर जारी विवाद, और उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव।बाजार में मौजूद कई लोगों ने योगी आदित्यनाथ और भाजपा के प्रति समर्थन जताया। वहीं, कुछ लोगों ने राजनीतिक आरोपों पर सवाल उठाते हुए तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर निर्णय लेने की जरूरत पर जोर दिया।हालांकि, बाजार में मिले लोगों की राय को पूरे नोएडा या उत्तर प्रदेश की जनता की सोच नहीं माना जा सकता। 2027 के विधानसभा चुनाव में इन मुद्दों का कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, अट्टा मार्केट में व्यापारियों की चिंताओं के साथ-साथ प्रदेश की राजनीति को लेकर चर्चाएं जारी हैं।








