Lokayukta Indore action: इंदौर पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल ड्राइवर फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त ने इंदौर और देवास के 15 ठिकानों पर कार्रवाई की। शुरुआती जांच में करीब 30 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति मिलने का दावा किया गया है। लोकायुक्त के मुताबिक, फिरोज की अनुमानित आय करीब 1.93 करोड़ रुपये है, जबकि सामने आई संपत्ति उनकी आंकी गई आय से लगभग 568 प्रतिशत अधिक बताई गई है। जांच में जमीनों के सौदे, परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्में, बैंक खातों में करोड़ों का लेन-देन और महंगी गाड़ियों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। आखिर एक पुलिस ड्राइवर की संपत्ति का नेटवर्क कितना बड़ा है और इस मामले में अब तक क्या सामने आया है?
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल ड्राइवर के पद पर पदस्थ फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई की। इंदौर और उज्जैन लोकायुक्त की संयुक्त टीम ने सुबह करीब छह बजे इंदौर और देवास में 15 ठिकानों पर तलाशी और दस्तावेजों की जांच शुरू की।
कार्रवाई में मकान, फ्लैट, कृषि भूमि, प्लॉट, कारोबारी फर्मों और बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए। शुरुआती जांच में करीब 30 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि, संपत्तियों का अंतिम मूल्यांकन और आय के स्रोतों का विस्तृत सत्यापन जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। इस मामले में मुख्य सवाल यह है कि फिरोज खान की ज्ञात आय और सामने आई संपत्तियों के बीच इतना अंतर कैसे बना और संपत्ति खरीदने के लिए इस्तेमाल की गई रकम कहां से आई।
1.93 करोड़ रुपये की आय, संपत्ति 30 करोड़ की कैसे?
लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय के मुताबिक, फिरोज खान को वेतन से करीब 75 लाख रुपये की आय होने का अनुमान है। अन्य स्रोतों से संभावित आय को जोड़कर उनकी कुल आय करीब 1.93 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके मुकाबले शुरुआती जांच में लगभग 30 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति मिलने की बात कही गई है। लोकायुक्त के अनुसार, यह उनकी अनुमानित आय से करीब 568 प्रतिशत अधिक है।
यहां यह समझना जरूरी है कि अनुपातहीन संपत्ति का आकलन केवल संपत्तियों की कुल कीमत देखकर नहीं, बल्कि ज्ञात वैध आय, खर्च और संपत्ति अर्जित करने के स्रोतों के मिलान से किया जाता है। जांच में यह भी देखना होगा कि संपत्तियों की कीमत किस तारीख और किस आधार पर आंकी गई है तथा क्या कोई वैध आय-स्रोत अभी सत्यापन के लिए बाकी है। फिलहाल 30 करोड़ रुपये का आंकड़ा शुरुआती जांच से जुड़ा है।
Lokayukta Indore action: 21.75 बीघा जमीन के सौदे से कैसे खुला मामला?
फिरोज खान की संपत्तियों की जांच में सांवेर तहसील के ग्राम गुरान की करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि का मामला अहम कड़ी बनकर सामने आया है। इस जमीन को लेकर एक किसान परिवार में विवाद चल रहा था। शिकायतकर्ता के बेटे गौरव चौधरी के मुताबिक, इसी दौरान फिरोज खान ने उनके पिता से संपर्क किया और पूरी जमीन का सौदा 35 लाख रुपये प्रति बीघा के हिसाब से किया। बाद में अदालत ने जमीन पर स्थगन दिया और परिवार के बीच समझौता भी हो गया। गौरव का आरोप है कि इसके बावजूद फिरोज ने उनके पिता पर दबाव बनाया और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर जमीन को बाजार में ऊंचे दाम पर बेचने की कोशिश की। शिकायत के मुताबिक, जमीन का पंजीकृत एग्रीमेंट फिरोज की परिचित रोशनी वर्मा के नाम कराया गया था। इन आरोपों की जांच की जा रही है। जमीन के स्वामित्व, एग्रीमेंट, भुगतान, कब्जे और संबंधित पक्षों की भूमिका का सत्यापन होने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

क्या विवादित जमीनों का कारोबार भी जांच के दायरे में है?
हां। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फिरोज खान पुलिस विभाग में पदस्थ होने का प्रभाव दिखाकर जमीन और प्लॉट के विवादों में हस्तक्षेप करते थे। आरोप यह भी है कि वह विवादित जमीन कम कीमत पर खरीदने का सौदा करते और बाद में उसे अधिक कीमत पर बेचने की कोशिश करते थे। लोकायुक्त की पड़ताल में बागली और राजोद की जमीनों से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। बागली क्षेत्र की एक जमीन के संबंध में बताया गया कि उसे वर्ष 2003 में खरीदा गया था, लेकिन फिरोज मौके पर कब्जा लेने नहीं पहुंचे थे। इस क्षेत्र की एक जमीन पर जांच टीम को दूसरा व्यक्ति खेती करता मिला।
इसके अलावा, राजस्व रिकॉर्ड में वर्ष 2023 से फिरोज या उनके परिचितों के नाम दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण, वास्तविक कब्जे और खरीद में इस्तेमाल रकम का मिलान किया जाएगा। जांच का अहम पहलू यह है कि जमीनों के सौदे वैध कारोबारी लेन-देन थे या इनमें किसी तरह का अनुचित दबाव इस्तेमाल किया गया। फिलहाल इस संबंध में लगाए गए आरोपों की पुष्टि होना बाकी है।
Lokayukta Indore action: मां और पत्नी के नाम पर फर्म, खातों में करोड़ों का लेन-देन
जांच में फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम से जुड़ी साहिल ट्रेडिंग कंपनी का भी उल्लेख है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस फर्म के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। इसके अलावा, फिरोज की परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर रोशनी सेल्स एंड सर्विस नाम की फर्म संचालित होने की जानकारी सामने आई है। रियल एस्टेट में निवेश से जुड़ी रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नाम की फर्म का भी जांच में उल्लेख है।
लोकायुक्त की शुरुआती जांच के मुताबिक, जमीनों की खरीद में रोशनी वर्मा की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। इस पहलू की पुष्टि और विस्तृत जानकारी संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से की जानी चाहिए। अब जांच में फर्मों की वास्तविक कारोबारी गतिविधियों, आयकर रिकॉर्ड, बैंक खातों के लेन-देन और संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल धन का मिलान किया जाएगा। यह भी देखा जाएगा कि दस्तावेजों में जिन लोगों के नाम मालिक के रूप में दर्ज हैं, निवेश वास्तव में किसने किया था।
मां के नाम फ्लैट, देवास में मकान और कई भूखंड
लोकायुक्त की तलाशी में इंदौर और देवास की कई संपत्तियों का ब्योरा सामने आया है। इंदौर के स्कीम नंबर 94 स्थित मनोरमा अपार्टमेंट में फिरोज की मां वहीदा खान के नाम दो फ्लैट बताए गए हैं। श्रीनगर कॉलोनी के श्रीदेवी अपार्टमेंट में एक अन्य फ्लैट का भी उल्लेख है। देवास में आदर्श नगर स्थित निवास के अलावा पुष्पकुंज कॉलोनी, विजय नगर कॉलोनी और इंदिरा गांधी नगर की संपत्तियां जांच के दायरे में हैं।
राधागंज और अन्य क्षेत्रों की संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, देवास जिले के गजीपुरा, जेतपुरा और गद्दूखेड़ी तथा इंदौर जिले की सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में कृषि भूमि और अन्य भूखंडों की जांच की जा रही है। लोकायुक्त टीम को इन संपत्तियों की खरीद, स्वामित्व और वास्तविक कब्जे से जुड़े दस्तावेजों का सत्यापन करना है। अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि सभी संपत्तियों का कुल मूल्य कितना है और उनमें से कितनी संपत्तियां अनुपातहीन संपत्ति के आकलन में शामिल होंगी।
Lokayukta Indore action: महंगी गाड़ियां और लकड़ी के कारोबार का भी जिक्र
शिकायत में फिरोज खान के पास महंगी गाड़ियां होने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने के आरोप भी लगाए गए हैं। स्कॉर्पियो सहित अन्य वाहनों का उल्लेख सामने आया है। जांच में वाहनों की खरीद की तारीख, भुगतान के स्रोत और संबंधित कारोबार से हुई आय का मिलान किया जा सकता है। इसी तरह लकड़ी के कारोबार की वास्तविक गतिविधियों और उससे होने वाली आय की भी पड़ताल की जा सकती है। इन सभी पहलुओं का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संपत्तियां किस धन से खरीदी गईं और क्या उनके स्रोत फिरोज की ज्ञात वैध आय से मेल खाते हैं।
बेटी की शादी में नोट उड़ाने के वीडियो क्यों चर्चा में आए?
फिरोज खान की बेटी की शादी फरवरी में इंदौर के ग्रैंड शेरेटन और रॉयल पैलेस होटल में होने की जानकारी सामने आई थी। शादी में नोट उड़ाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इसके बाद उनकी आर्थिक हैसियत को लेकर चर्चा शुरू हुई। बेटी की पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च होने की बात भी सामने आई थी, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन किसी की महंगी शादी या आलीशान जीवनशैली अपने आप में आय से अधिक संपत्ति का प्रमाण नहीं होती। जांच में ऐसे खर्चों का महत्व तभी होगा, जब उनका संबंध वित्तीय रिकॉर्ड, घोषित आय और संपत्ति अर्जित करने के स्रोतों से स्थापित हो सके।
Lokayukta Indore action: अब आगे क्या होगा?
लोकायुक्त के मुताबिक, फिरोज खान की संपत्तियों और जमीनों के कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है। अब तक सामने आई संपत्तियों के अलावा अन्य संपत्तियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
आगे की जांच में संपत्तियों का मूल्यांकन, बैंक खातों के लेन-देन, कारोबारी फर्मों की आय, वाहनों की खरीद और जमीनों के सौदों से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान किया जाएगा। इसके बाद ही अनुपातहीन संपत्ति की वास्तविक राशि और कथित अनियमितताओं के बारे में स्पष्ट निष्कर्ष सामने आ सकेगा। फिलहाल इस मामले में करीब 30 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति मिलने का दावा शुरुआती जांच पर आधारित है। अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।
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