Manzoor Pashteen: अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पश्तून तहफ्फुज मूवमेंट (PTM) के प्रमुख मंजूर पश्तीन ने पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सेना और खुफिया एजेंसियां पश्तून इलाकों में आतंकवादी समूहों को फंडिंग और ट्रेनिंग देकर बढ़ावा दे रही हैं। पश्तीन ने यह भी आरोप लगाया कि आतंकवाद विरोधी अभियानों की आड़ में स्थानीय आबादी को जबरन विस्थापित किया जा रहा है और क्षेत्र की खनिज संपदा पर कब्जा किया जा रहा है।
Manzoor Pashteen: मंजूर पश्तीन ने पाकिस्तान की सेना पर लगाए गंभीर आरोप-
‘हेग जस्टिस डायलॉग-2026’ में अपनी बात रखते हुए मंजूर पश्तीन ने पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दो दशकों से अधिक समय तक चले सैन्य अभियानों के कारण हजारों पश्तून नागरिकों की मौत हुई, हजारों लोग लापता हो गए और लाखों लोगों को अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। पश्तीन ने कहा कि इतने लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाए जाने के बावजूद खैबर पख्तूनख्वा में शांति स्थापित नहीं हो सकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर स्थानीय लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और उनके संसाधनों पर कब्जा किया जा रहा है।
Manzoor Pashteen: पश्तीन की गवाही के दौरान उठकर चले गए पाकिस्तानी राजनयिक-
कार्यक्रम के दौरान उस समय चर्चा तेज हो गई, जब मंजूर पश्तीन अपनी बात रख रहे थे और पाकिस्तान के राजनयिक आसिफ दुर्रानी तथा एक राजदूत कथित तौर पर वहां से उठकर चले गए। इस घटनाक्रम को पाकिस्तान के लिए राजनयिक असहजता के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, राजनयिकों के वहां से जाने के पीछे की आधिकारिक वजह की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान को कब-कब झटका लगा-
पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई महत्वपूर्ण कानूनी और राजनयिक मामलों का सामना करना पड़ा है। इनमें भारत से जुड़े कुलभूषण जाधव का मामला प्रमुख है। इसके अलावा, अटलांटिक विमान घटना और सिंधु जल संधि से संबंधित विवाद भी पाकिस्तान के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।
कुलभूषण जाधव मामला-
भारत ने पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में मई 2017 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का रुख किया था। भारत ने जाधव को सुनाई गई मौत की सजा और उन्हें काउंसलर एक्सेस नहीं दिए जाने को चुनौती दी थी। जुलाई 2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए पाकिस्तान को जाधव की सजा और दोषसिद्धि की प्रभावी समीक्षा तथा पुनर्विचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने भारत को काउंसलर एक्सेस देने का भी आदेश दिया था। यह फैसला पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी झटका माना गया।
अटलांटिक विमान घटना-
पाकिस्तान और भारत के बीच अटलांटिक विमान घटना से जुड़ा विवाद भी अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मंच तक पहुंचा था। इस मामले में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने मामले पर सुनवाई करने के लिए आवश्यक अधिकार क्षेत्र नहीं पाया। इससे पाकिस्तान को कानूनी मोर्चे पर निराशा का सामना करना पड़ा।
सिंधु जल संधि विवाद-
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। इस संधि से जुड़े मतभेदों में दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं का सहारा लिया है। हालांकि, इस विवाद के अलग-अलग पहलुओं पर कानूनी प्रक्रियाएं जारी रही हैं, इसलिए इसे किसी एक पक्ष की पूर्ण हार या जीत के रूप में देखना सही नहीं होगा।
पाकिस्तान की सेना और पश्तून इलाकों में संघर्ष का मुद्दा-
पश्तून इलाकों में सैन्य अभियानों, जबरन विस्थापन और लापता लोगों के मुद्दे लंबे समय से विवाद का विषय रहे हैं। पश्तून अधिकार संगठनों ने कई बार पाकिस्तान की सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठाए हैं और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की है। मंजूर पश्तीन के ताजा आरोपों ने एक बार फिर इन मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। हालांकि, उनके बयानों में लगाए गए आरोपों और कार्यक्रम में हुई घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
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