Delhi Protest: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता देश में क्रांति करने या बदलाव लाने के बड़े-बड़े दावे कर रहे थे, लेकिन बहुत जल्दी ही उनके इन दावों की हवा निकल गई।नेतृत्व क्षमता, रणनीति और व्यवहार कुशलता की दृष्टि से CJP नेता पूरी तरह जनता का विश्वास खो चुके हैं। लोग इन पर विश्वास करे भी तो क्यों? जब ये विरोधाभासी बातें करेंगे, तो कोई इनके नेतृत्व में क्यों जुटेगा? एक तरफ ये कहते हैं कि CJP एक ‘प्रेशर ग्रुप’ (दबाव समूह) के रूप में काम करेगी, लेकिन दूसरी तरफ यह भी नहीं बताते कि जब इनकी लड़ाई मौजूदा केंद्र सरकार से है, तो विकल्प के तौर पर किस पार्टी की सरकार होनी चाहिए? ये किसी राजनीतिक दल में शामिल न होने की बात तो करते हैं, लेकिन इनका झुकाव आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल की तरफ होने की चर्चाएं आम हैं।
परिपक्वता की कमी
सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता युवाओं को कोई राजनीतिक विकल्प नहीं देना चाहते या विकल्प देने की स्थिति में नहीं हैं, तो फिर युवा वर्ग क्या सोचकर उनके पीछे खड़ा रहेगा ? जब उन्हें मौजूदा केंद्र सरकार फूटी आँख नहीं सुहाती है, तो फिर देश की युवा पीढ़ी को यह क्यों नहीं बताते कि भविष्य में कौन-सी पार्टी बेहतर विकल्प साबित होगी? कौन-सी पार्टी शिक्षा, रोजगार आदि की दृष्टि से लोकप्रिय सरकार दे सकती है? क्या जनभावनाओं के अनुरूप व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन का काम महज किसी प्रेशर ग्रुप से संभव हो पाएगा? क्या इसके लिए किसी राजनीतिक विकल्प की जरूरत नहीं है? जाहिर है कि CJP नेता राजनीतिक मुद्दे तो उठा रहे हैं, लेकिन राजीनितक रूप से परिपक्व नहीं हैं, ऐसे में लोग कैसे उनमें बदलाव लाने की संभावनाएं देख सकते हैं?
Delhi Protest: अराजकता भड़काने के आरोप
देश के लोग विरोध-प्रदर्शनों में जुटते अवश्य हैं, लेकिन विरोध-प्रदर्शन के दौरान सीजेपी नेताओं पर हिंसा और अराजकता भड़काने के जो आरोप लगे, वे इस पार्टी के विस्तार के लिए बड़ी चुनौती हैं। आरोप लगे कि फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और विदेशी बॉट नेटवर्क के माध्यम से आपत्तिजनक रील्स, भड़काऊ वीडियो और एआई-जनरेटेड सामग्री को वायरल कर आंदोलन को अराजक और उग्र बनाने की कोशिश की गई।यह भी आरोप लगा कि सीजेपी के इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अधिकांश फॉलोअर्स देश के बाहर यानी पाकिस्तान, बांग्लादेश और अमेरिका जैसे देशों के हैं।सीजेपी को विदेशों से फंडिंग होने के भी आरोप लगते रहे हैं। हालांकि सीजेपी नेताओं ने इन आरोपों का खंडन किया है, लेकिन इनके कारण उनकी विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे, तो इसका नुकसान उन्हें अवश्य होगा।
नेतृत्व क्षमता पर सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नेताओं ने जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बिना अनुमति प्रदर्शन की जो जिद की, उसे समझदारी नहीं कहा जा सकता है।इसके कारण जहां एक ओर उन्हें हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया, वहीं दूसरी तरफ जो लोग उनके आह्वान पर जंतर-मंतर पहुंचे, उन्हें भी नेतृत्व के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ा। सीजेपी नेताओं की जिद से ऐसा लगा कि उनकी निष्ठा किसी राजनीतिक पार्टी के प्रति है, जो उनका इस्तेमाल अपने हितों की पूर्ति के लिए करना चाहती है। यही कारण है कि युवा वर्ग ने उनके साथ जुटने में वह उत्साह नहीं दिखाया जो नीट पेपर लीक के मुद्दे पर दिखाया था।फिर युवा यह भी जानते थे कि प्रदर्शन से मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा नहीं होगा। इस तरह CJP नेताओं की नेतृत्व क्षमता युवाओं के सामने एक्सपोज हो गई।
Delhi Protest: जनता झूठ बर्दाश्त नहीं करती
व्यवहारकुशलता की दृष्टि से देखें तो देश की जनता झूठ को बर्दाश्त नहीं करती। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने तो झूठ के मामले में ‘पूत के पांव पालने में’ वाली कहावत चरितार्थ कर डाली। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान जब उनकी दादी का निधन हुआ तो पुलिस ने उन्हें सहयोग नहीं किया, लेकिन पुलिस ने एक वीडियो जारी कर उनके झूठ का पर्दाफाश कर दिया। अगर अभिजीत दीपके सच्चे होते, तो यह मांग जोर-शोर से उठाते कि पुलिस ने जो वीडियो जारी किया है, उसकी सत्यता की जांच की जाए।अब जो आदमी दादी की मौत पर अंतिम संस्कार में जाने के बजाए झूठ बोलकर राजनीति चमकाना चाहे, उस पर भविष्य में देश की जनता कैसे विश्वास कर लेगी कि वह सच बोल रहा है?
तिरंगे की आड़ में अराजकता
भारत में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना और राष्ट्रीय ध्वज फहराना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज का सहारा लेकर कानून- व्यवस्था, अदालती आदेशों या पुलिस के नियमों का उल्लंघन करना क्या उचित है? कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नेताओं का कारनामा देखिए कि वे पीस बॉन्ड को तोड़कर चोरी-छिपे जंतर-मंतर पहुंचते हैं और फिर विक्टिम कार्ड खेलते हैं कि पुलिस ने उनके खिलाफ तिरंगा फहराने पर कार्रवाई की है।पहली बात यह है कि तिरंगा कहीं चोरी-छिपे नहीं, बल्कि शान से ले जाया जाना चाहिए। दूसरी बात यह है कि यदि कोई व्यक्ति कानून या पीस बॉन्ड तोड़ता है और फिर पुलिस की कानूनी कार्रवाई को ‘तिरंगा फहराने की सजा’ बताता है, तो इससे ज्यादा खतरनाक और क्या हो सकता है? लोग जानते हैं कि कानून तोड़ने वालों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया लागू होगी ही, भले ही उनके हाथ में राष्ट्रीय ध्वज क्यों न हो।तिरंगे का सहारा लेकर जबरन किसी प्रतिबंधित जगह में घुसने जैसे कृत्य को छिपाना राष्ट्र ध्वज की गरिमा के विरुद्ध है। इसलिए अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता कुछ भी क्यों न बोलें जनता के सामने वे बुरी तरह एक्सपोज यानी बेनकाब हो चुके हैं।
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