Arandi ke fayde: आयुर्वेद में अरंडी (कैस्टर) को एक खास जड़ी-बूटी माना गया है, जिसे ‘वात रोगों का यमराज’ कहा जाता है। यह सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि शरीर की गहरी सफाई करने वाला नेचुरल डिटॉक्स मास्टर है। इसमें छीपे गुण किसी वरदान से कम नहीं हैं।
वात दोष में अरंडी का तेल लाभकारी
अरंडी का तेल और इसकी पत्तियां शरीर में वात दोष को शांत करने, पाचन को मजबूत करने और सूजन कम करने में मदद करती हैं। यह हल्का रेचक भी होता है, यानी कब्ज दूर करने में सहायक है। अरंडी का तेल गाढ़ा और चिकना होता है और शरीर में गर्मी पैदा करता है। इसकी खासियत यह है कि यह शरीर के अंदर बहुत गहराई तक असर करता है, वहां भी पहुंच जाता है जहां कई दवाएं नहीं पहुंच पातीं। इसी कारण अरंडी का तेल जोड़ों के दर्द, गठिया, सायटिका, कमर दर्द और कब्ज जैसी वात से जुड़ी समस्याओं में काफी लाभकारी माना जाता है।
Arandi ke fayde: कब्ज से लेकर जोड़ों के दर्द तक फायदेमंद अरंडी का तेल
अरंडी के तेल में रिसिनोलिक एसिड होता है, जो आंतों की गति तेज करता है और कब्ज को दूर करता है। इसके अलावा, जोड़ों की मालिश करने से सूजन कम होती है और रूमेटोइड अर्थराइटिस या साइटिका में भी लाभ मिलता है। त्वचा और बालों के लिए भी यह वरदान है, क्योंकि यह प्राकृतिक ह्यूमेक्टेंट की तरह काम करता है, नमी खींचकर त्वचा को हाइड्रेटेड रखता है और बालों को मजबूत बनाता है।
Arandi ke fayde: माइग्रेन में राहत, बालों की ग्रोथ में सहायक
माइग्रेन या पुराने सिरदर्द में ताजे पत्तों का पेस्ट माथे और कनपटी पर लगाने से नसों की सूजन कम होती है और दर्द में राहत मिलती है। बालों के लिए नारियल तेल के साथ मिलाकर जड़ों में लगाना नए बाल उगाने में मदद करता है।
सही मात्रा में ही करें उपयोग, सावधानी जरूरी
इसके सही उपयोग के लिए रात को गर्म दूध में 1-2 चम्मच तेल मिलाकर पीना या जोड़ों की सूजन पर पत्तों का लेप लगाना फायदेमंद है।
हालांकि, अरंडी बहुत शक्तिशाली है। इसे सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को इसके सेवन से बचना चाहिए। ज्यादा सेवन से दस्त और डिहाइड्रेशन हो सकता है। इसका उपयोग करने से पहले योग्य आयुर्वेदाचार्य से सलाह जरूर ले लें।
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