Aravalli Mining: अरावली पर्वतमाला को लेकर जारी बहस और चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने दोबारा अपना पक्ष साफ कर दिया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आईएएनएस से विशेष बातचीत में बताया कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान अरावली क्षेत्र में व्यापक स्तर पर अवैध खनन हो रहा था। इसी कारण अनेक सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को न्याय के लिए अदालत की शरण लेनी पड़ी थी।
Aravalli Mining: अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की छूट से किया गया इनकार
मौजूदा याचिका भी उसी दौर की देन है। सरकार का कहना है कि अब सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं और खनन को केवल सतत, वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से ही आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि अरावली को बचाया जा सके।

अरावली को लेकर कुछ राजनीतिक दलों द्वारा की जा रही तुलना पर भी सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नर्मदा परियोजना को लेकर गुजरात में कभी जिस तरह के आरोप लगाए गए थे, वैसी ही स्थिति बताने को केंद्रीय मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया है।
वैज्ञानिक योजना पूरी होने तक खनन पर रोक
केंद्रीय मंत्री का कहना है कि यह कांग्रेस के राजनीतिक माहौल में फैलाया गया एक और झूठ है, जिसे अब जनता समझ चुकी है। कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के समय विदेशी एजेंसियों और एनजीओ की भूमिका को लेकर उठे सवालों की तरह अरावली के मामले में भी भ्रम फैलाने की कोशिशों का आरोप लगाया गया है। केंद्रीय मंत्री का दावा है कि अरावली को लेकर कुछ राजनीतिक विरोधी जानबूझकर गलतफहमी पैदा कर रहे हैं, लेकिन यह प्रयास पूरी तरह नाकाम हो चुका है। सरकार पारदर्शिता और वैज्ञानिक सोच के साथ अरावली संरक्षण के लिए काम कर रही है।
अवैध खनन रोकना सरकार का मुख्य उद्देश्य
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लेकर सरकार ने स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कोर्ट ने अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की छूट नहीं दी है। इसके उलट, पर्यावरण मंत्रालय की ‘ग्रीन अरावली प्रोजेक्ट’ योजना को मंजूरी दी गई है। साथ ही आईसीएफआरआई को यह जिम्मेदारी दी गई है कि जब तक पूरी और वैज्ञानिक तरीके से बनी योजना तैयार नहीं हो जाती, तब तक अरावली में कोई नया खनन नहीं किया जाएगा।
इस योजना के तहत अरावली की पहाड़ियों और पूरे इलाके की पहचान की जाएगी और यह तय किया जाएगा कि कौन-सा क्षेत्र कितना संवेदनशील है। इसके बाद ही आगे कोई फैसला लिया जाएगा। भूपेंद्र यादव के अनुसार, इन कदमों का उद्देश्य अवैध खनन को पूरी तरह रोकना और भविष्य में केवल पर्यावरण के अनुकूल और सतत खनन को ही अनुमति देना है।








