Bangladesh Elections: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की मृत्यु से वहां के चुनाव की संभावनाएं नया करवट लेने की ओर है। क्योंकि शेख हसीना को अपदस्थ किये जाने से बांग्लादेश की राजनीति में अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में जब से मुहम्मद युनुस ने कार्यभार संभाला, तब से 293 लोगों की हत्याएं हुई हैं। यह ढ़ाका स्थित एक मानवाधिकार संगठन ने जानकारी दी। जनवरी से दिसंबर तक भीड़ हिंसा में 197 लोगों की मौत हुई है।
यह वातावरण बांग्लादेश को शांति की ओर नहीं ले जाता। इसी प्रसंग में खलिदा जिया की मृत्यु से उनकी पार्टी बांग्लादेश नेशनल पार्टी को आगामी चुनाव में जनता की सहानुभूति के मत मिल सकते हैं। क्योंकि खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान काफी लंबे समय से बांग्लादेश में नहीं थे, लेकिन वह बीएनपी पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष हैं। वापस लौटने पर वे ही पार्टी को चुनाव में उतारेंगे।
सहानुभूति का फायदा निश्चित ही बीएनपी को मिलेगा। खालिदा जिया का प्रधानमंत्री का कार्यकाल काफी लंबा था। वह बांग्ला देश की पहली महिला प्रधानमंत्री रही हैं। लंबे अर्से तक प्रधानमंत्री रहने के कारण, जनता में रोष होने से नेशनल आवामी पार्टी ने शेख हसीना के नेतृत्व में खालिदा जिया को चुनाव आने पर पराजित किया था । दूसरी ओर शेख हरीना के कार्यकाल में खालिदा जिया पर बहुत सारे भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उन्हें सजा भी दी गई। दूसरी तरफ अब वही स्थिति शेख हसीना की हो रखी है। लेकिन अंतर यह है कि शेख हसीना को जबरन पद से हटाया गया, यह कार्य संवैधानिक नहीं था। इसके अलावा आने वाले आम चुनाव में नेशनल आवामी पार्टी को चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं है। पार्टी को असंवैधानिक करार देकर चुनाव योग्य नहीं माना। इस कारण चुनाव शांतिपूर्ण होने की संभावना से दूर हैं। फिर भी एक उम्मीद ऐसी लग रही है कि वैकल्पिक सरकार बीएनपी पार्टी दे सकती है।

भारत सरकार की ओर से अंतिम संस्कार में विदेश मंत्री एस जयशंकर थे। जयशंकर ने अपने इंटरनेट मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा है कि ढ़ाका पहुंचने पर मैं बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष व पूर्व पीएम के पुत्र तारिक रहमान से मुलाकात की। यह संदेश भारत की ओर से जाता है कि बांग्लादेश में चुनावी गतिविधि को कूटनीतिक तौर से हैंडिल किया जा रहा है। भारत भी चाहता है कि पड़ौसी देश में हिंसा का तांडव न हो।
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