Bengal Blast: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर में विधानसभा चुनाव से पहले हुए बम विस्फोट मामले में तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक शौकत मोल्ला की मुश्किलें बढ़ गई हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए शौकत मोल्ला को कोलकाता की विशेष एनआईए अदालत ने 14 दिनों की एजेंसी हिरासत में भेज दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 जून को होगी। अदालत ने जांच एजेंसी को बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की भी अनुमति दे दी है।
मोबाइल फोन और पेन ड्राइव की होगी जांच
गिरफ्तारी के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने शौकत मोल्ला के पास से एक मोबाइल फोन और एक पेन ड्राइव बरामद की है। एजेंसी का मानना है कि इन उपकरणों से मामले से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। अदालत ने जांच एजेंसी की मांग स्वीकार करते हुए इनकी फोरेंसिक जांच कराने की अनुमति प्रदान कर दी। इस मामले में पहले से गिरफ्तार अन्य आरोपियों से बरामद इलेक्ट्रॉनिक सामग्री की जांच भी कराई जाएगी।
Bengal Blast: जमानत का विरोध, प्रभावशाली होने का तर्क
अदालत में सुनवाई के दौरान शौकत मोल्ला (Shaukat Molla) के वकील ने उनकी जमानत की मांग की। बचाव पक्ष का कहना था कि उन्हें पहले से उच्च सुरक्षा प्राप्त थी, इसलिए घटना में उनकी संलिप्तता संदिग्ध है। हालांकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इसका कड़ा विरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि पूर्व विधायक होने के कारण उनका क्षेत्र में प्रभाव है और रिहाई की स्थिति में वे गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं तथा सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका बनी रहेगी।
बांग्लादेश भागने की कोशिश का दावा
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दावा किया कि शौकत मोल्ला गिरफ्तारी से पहले दक्षिण 24 परगना के तटीय इलाके के रास्ते बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे थे। एजेंसी के अनुसार स्थानीय लोगों ने उन्हें सीमा से सटे क्षेत्र में देखा था, जिसके बाद निगरानी बढ़ा दी गई। बाद में जब वे कोलकाता स्थित एनआईए कार्यालय में आत्मसमर्पण करने जा रहे थे, तभी उन्हें बारुईपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया। एजेंसी का आरोप है कि विस्फोट के बाद भी वह अन्य आरोपियों के संपर्क में थे और उन्हें निर्देश दे रहे थे। अब हिरासत के दौरान उनसे विस्तृत पूछताछ की जाएगी।








