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भोजपुर में नई बस्ती का नाम भरत भूषण तिवारी के नाम पर रखा जाएगा

Bharat Tiwari: भोजपुर में नई बस्ती का नाम भरत तिवारी के नाम

Bharat Tiwari: बिहार के भोजपुर जिले में कथित पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच बिलौती गांव के स्थानीय लोगों ने एक नई बस्ती का नाम भरत भूषण तिवारी की स्मृति में रखने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों ने घटनास्थल पर एक बड़ा स्मृति बोर्ड भी लगाया है, जिस पर उनकी तस्वीर, मृत्यु तिथि और श्रद्धांजलि संदेश अंकित किया गया है। हालांकि, इस नामकरण को लेकर अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक स्वीकृति जारी नहीं की गई है।

नई बस्ती को मिलेगा ‘भरत नगर’ नाम

स्थानीय लोगों के अनुसार, जवईनिया गांव से विस्थापित परिवारों के लिए बिलौती में लगभग 74 आवास बनाए जा रहे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रस्ताव रखा है कि इस नई बस्ती का नाम ‘शहीद भरत नगर जवईनिया’ रखा जाए। उनका कहना है कि भरत भूषण तिवारी ने स्थानीय समस्याओं, भूमि विवादों और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया था, इसलिए उनकी स्मृति में यह सम्मान दिया जाना चाहिए।

Bharat Tiwari: स्मृति बोर्ड लगाकर दी श्रद्धांजलि

घटनास्थल पर लगाए गए बोर्ड पर लिखा गया है कि “आपका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा।” बोर्ड पर भरत भूषण तिवारी की तस्वीर के साथ प्रस्तावित बस्ती का नाम भी दर्ज किया गया है। इस पहल में स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी बताई जा रही है। हालांकि यह पूरी तरह स्थानीय स्तर का प्रयास है और प्रशासन की ओर से अब तक कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

Bharat Tiwari: New settlement in Bhojpur named after Bharat Tiwari

मुठभेड़ को लेकर जारी है विवाद

भरत भूषण तिवारी की 17 जून को शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मौत हुई थी। पुलिस का दावा है कि उन्होंने पहले पुलिस दल पर गोली चलाई थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई। वहीं, परिवार का आरोप है कि उन्होंने पहले ही अपना हथियार फेंक दिया था और इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई।

Bharat Tiwari: न्यायिक जांच जारी, परिवार की कार्रवाई की मांग

इस मामले ने पूरे बिहार में राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। घटना की जांच सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में गठित न्यायिक आयोग कर रहा है। वहीं, परिजन संबंधित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग पर अब भी कायम हैं।

 

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