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भोपाल के हमीदिया अस्पताल का बर्न वार्ड बना ‘भट्ठी’, 90% तक झुलसे मरीज गर्मी में इलाज को मजबूर

Bhopal news: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया अस्पताल के बर्न वार्ड की हालत गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जहां गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए नियंत्रित तापमान और विशेष सुविधाओं की जरूरत होती है, वहीं यहां मरीज भीषण गर्मी और उमस के बीच इलाज कराने को मजबूर हैं। बर्न वार्ड के अंदर का माहौल इतना गर्म और दमघोंटू है कि कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में 70 से 90 प्रतिशत तक झुलसे मरीज दिनों और हफ्तों तक इसी वातावरण में रहने को मजबूर हैं।

गत्ते के पंखे और बर्फ के सहारे मरीज

अस्पताल के बर्न वार्ड, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में लगे एयर कंडीशनर लंबे समय से बंद पड़े हैं। हालत यह है कि मरीज और उनके परिजन कूलर, बर्फ की सिल्लियों और गत्ते के पंखों के सहारे राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। वार्ड में भर्ती मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल की ओर से पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। कई परिवारों को खुद कूलर, बर्फ और अन्य जरूरी सामान खरीदकर लाना पड़ रहा है।

Bhopal news: परिजनों में नाराजगी

एक मरीज के परिजन ने बताया कि उनके भाई एक हादसे में गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्होंने कहा कि वार्ड में न तो पर्याप्त पंखे हैं और न ही एसी चल रहे हैं। गर्मी इतनी ज्यादा है कि कमरा किसी भट्ठी जैसा महसूस होता है। मरीजों को राहत देने के लिए उन्हें घर से कूलर और बर्फ लानी पड़ी। अन्य परिजनों ने भी बताया कि झुलसे मरीजों के लिए यह गर्मी बेहद तकलीफदेह साबित हो रही है और अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था नाकाफी नजर आ रही है।

Bhopal news: कूलर के सहारे हो रही सर्जरी

सबसे चिंताजनक स्थिति बर्न ऑपरेशन थिएटर की बताई जा रही है। यहां एयर कंडीशनिंग सिस्टम बंद होने के कारण झुलसे मरीजों की सर्जरी कूलर की हवा में की जा रही है। वहीं आईसीयू में भी गंभीर मरीज केवल कूलरों के भरोसे रखे गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती है, क्योंकि बर्न मरीजों की त्वचा की सुरक्षा परत नष्ट हो चुकी होती है और वे संक्रमण के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं।

मेडिकल मानकों के खिलाफ व्यवस्था

चिकित्सा मानकों के अनुसार बर्न आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में नियंत्रित तापमान, नियंत्रित आर्द्रता, फिल्टर्ड एयर सिस्टम और पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेशन जैसी सुविधाएं होना जरूरी है। लेकिन कूलर इन मानकों के विपरीत काम करते हैं। वे नमी बढ़ाते हैं और बिना फिल्टर की हवा को फैलाते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

एक साल से भेजे जा रहे थे पत्र

दस्तावेजों के अनुसार बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग पिछले कई महीनों से एसी मरम्मत और नई व्यवस्था की मांग कर रहा था। जून 2025 से लगातार पत्र और रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। अक्टूबर 2025 में भेजे गए एक अंतिम रिमाइंडर में भी बताया गया था कि कई एसी महीनों से खराब पड़े हैं, जिससे मरीजों के इलाज और सर्जरी प्रभावित हो रही है। इसके बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। मई 2026 में भेजे गए एक अन्य पत्र में बताया गया कि बर्न यूनिट के 11 एयर कंडीशनर करीब आठ महीने से बंद हैं और इसका सीधा असर मरीजों की देखभाल पर पड़ रहा है।

फाइलों में उलझी समस्या, मरीज भुगत रहे परेशानी

Bhopal news: बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. अरुण भटनागर के अनुसार एसी से जुड़े बिजली कार्यों के लिए राशि स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन मामला अलग-अलग विभागों के बीच अटका हुआ है। बताया जा रहा है कि तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस बीच मरीज और उनके परिजन भीषण गर्मी में परेशान होने को मजबूर हैं। हमीदिया अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जहां बर्न मरीजों के लिए नियंत्रित तापमान जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय कर सकता है, वहां महीनों से बंद पड़े एसी और लंबित फाइलें चिंता का विषय बन गई हैं।

 

 

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