Cashless Toll: देश के नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए बड़ा बदलाव लागू हो गया है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 से सभी टोल प्लाजा पर भुगतान पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। अब टोल टैक्स केवल फास्टैग या यूपीआई के माध्यम से ही लिया जा रहा है और नकद भुगतान पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। सरकार का उद्देश्य टोल प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज और सुविधाजनक बनाना है।
डिजिटल भुगतान से टोल सिस्टम में बड़ा बदलाव
सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा लिया गया यह निर्णय टोल कलेक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे पहले 1 अप्रैल से ही यात्रियों को डिजिटल भुगतान अपनाने की सलाह दी गई थी। अब इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू कर दिया गया है, जिससे टोल प्लाजा पर कैश लेनदेन खत्म हो गया है।
Cashless Toll: कुछ राज्यों में फिलहाल लागू नहीं नियम
हालांकि, चुनावी आचार संहिता के चलते तमिलनाडु, केरल, असम, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में इस नई व्यवस्था को अभी लागू नहीं किया गया है। इन राज्यों में फिलहाल पुरानी व्यवस्था ही जारी रहेगी, जबकि देश के बाकी हिस्सों में डिजिटल भुगतान अनिवार्य हो चुका है।
ट्रैफिक जाम में कमी और पर्यावरण को फायदा
पूरी तरह डिजिटल सिस्टम लागू होने से टोल प्लाजा पर वाहनों की आवाजाही तेज होने की उम्मीद है। इससे लंबी कतारों और ट्रैफिक जाम में कमी आएगी, खासकर पीक आवर्स में। साथ ही, कम रुकावट के कारण ईंधन की खपत घटेगी और वाहनों से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा, जिससे पर्यावरण को लाभ मिलेगा।
Cashless Toll: यात्रियों के लिए जरूरी सावधानियां
इस बदलाव के शुरुआती दौर में कुछ यात्रियों को असुविधा हो सकती है, खासकर उन लोगों को जो डिजिटल भुगतान के लिए तैयार नहीं हैं। जिन वाहनों में वैध फास्टैग नहीं होगा या पर्याप्त बैलेंस नहीं होगा, उन्हें जुर्माना भरना पड़ सकता है या टोल पर रोका जा सकता है। हालांकि, यूपीआई के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर तुरंत भुगतान करने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा। अधिकारियों ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले फास्टैग को सक्रिय रखें, बैंक खाते से लिंक करें और पर्याप्त बैलेंस सुनिश्चित करें, साथ ही मोबाइल में यूपीआई ऐप का बैकअप भी रखें।






