Breaking News
Home » Breaking News » इन 5 घटनाओं ने बदला पूरा खेल! छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने क्यों बदला फैसला? जानकार आपके उड़ जाएंगे होश !

इन 5 घटनाओं ने बदला पूरा खेल! छात्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने क्यों बदला फैसला? जानकार आपके उड़ जाएंगे होश !

CJP PROTEST: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही 35 दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों का आंदोलन समाप्त हो गया। सरकार और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच सहमति बनने के बाद प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया गया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, जिनकी वजह से सरकार को अपना रुख बदलना पड़ा।

जंतर-मंतर का आंदोलन बना राष्ट्रीय अभियान

20 जून को जंतर-मंतर पर शुरू हुआ प्रदर्शन धीरे-धीरे देशव्यापी आंदोलन में बदल गया। सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई और उसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलने लगा। देश के कई राज्यों के साथ विदेशों में भी भारतीय छात्रों ने प्रदर्शन किए।

CJP PROTEST: लगातार बढ़ता छात्र आंदोलन

करीब 35 दिनों तक जंतर-मंतर पर हजारों छात्र डटे रहे। संसद मार्च के बाद आंदोलन और तेज हो गया। पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती गई और यह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा।

CJP PROTEST
                                                                      CJP PROTEST
विपक्ष ने सरकार पर बनाया लगातार दबाव

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने खुलकर आंदोलन का समर्थन किया। संसद से लेकर प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने तक विपक्ष ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को प्रमुख मुद्दा बनाए रखा। संसद की कार्यवाही भी लगातार बाधित रही।

CJP PROTEST: भाजपा के भीतर भी उठने लगीं आवाजें

पूर्व भाजपा अध्यक्ष डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने छात्रों की चिंता को गंभीर बताया। वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं के साथ संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। राजनीतिक गलियारों में भी यह चर्चा तेज हुई कि पूरे घटनाक्रम को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था।

युवाओं की नाराजगी बनी सबसे बड़ी चिंता

नीट पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को लेकर युवाओं में पहले से असंतोष था। आंदोलन ने इस नाराजगी को राष्ट्रीय स्वरूप दे दिया। विभिन्न सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोगों ने आंदोलन के प्रति समर्थन जताया और इसे सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती माना गया।

CJP PROTEST: आने वाले चुनावों का दबाव

उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं, जबकि 2029 में लोकसभा चुनाव हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंदोलन लंबा चलता, तो यह युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के बीच बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता था।

सरकार और CJP के बीच बनी सहमति

25 जुलाई को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधियों से बातचीत की। बैठक के बाद सरकार ने प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई। इसके बाद CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।

CJP PROTEST: आगे क्या?

सरकार अब परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने पर फोकस कर रही है। वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को सरकार की जवाबदेही और युवाओं की जीत के रूप में पेश कर रहा है। आने वाले दिनों में संसद में शिक्षा सुधार और एंटी पेपर लीक कानून पर बहस राजनीतिक रूप से अहम रहने की संभावना है।

ये भी पढ़े… ‘सरकार झुकती नहीं’ का नैरेटिव टूटा? CJP आंदोलन के बाद भाजपा को 5 बड़े राजनीतिक झटकों का दावा