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Congress News: अपना घर नहीं संभाल पा रही है कांग्रेस!

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Congress News: रूस के राष्ट्रपति पुतिन को राष्ट्रपति मुर्मु द्वारा दिए हुए रात्रि भोज में कांग्रेस के सिर्फ एक नेता शशि थरूर को शामिल होने का अवसर मिला। इससे पूर्व दिन में यह चर्चा थी कि पुतिन से प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को मिलने का अवसर नहीं दिया गया। खैर यह खटास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राहुल गांधी के प्रति इतने हद तक क्यों हुई। जबकि प्रतिपक्ष का काम रचनात्मक विरोध करने का होता ही है। यह होना ही चाहिए, क्योंकि सरकार की खामियों को उजागर करना विपक्ष का काम होता है। लोकतंत्र का आधार ही पक्ष-विपक्ष है। यदि विपक्ष कुछ देश के भले के प्रसंग में बात कर रहा है, तो उसे आत्मसात करना ही चाहिए, यही भी एक सीढ़ी है देश की उन्नति के लिए।

लेकिन अक्सर यह देखा गया कि प्रतिपक्ष के नेता अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हैं, स्वाभाविक है इससे देश के मुखिया को बुरा लगेगा। कारण शायद यही रहे हों। संक्षेप में यदि हम कंग्रेस के भविष्य की ओर नजर दौड़ायें, तो लगता है कांग्रेस अपने अस्तित्व को खो रही है। धारे-धीरे राज्यवार सरकारें न बना पाना दिखाता है कि जनता कांग्रेस से मुहं मोड़ रही है। कांग्रेस के सर्वाइवल के लिए गंभीर खतरा है।

एक वक्त था जब 1973 में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिर चुकी थी, कांग्रेस को 1974 में सरकार बनाने के लाले पड़ गये थे। आगे चुनाव करवाने पर उम्मीदें कांग्रेस की सत्ता पाने की कम थी। ऐसी परिस्थिति में हेमवती नंदन बहुगुणा को केंद्र से इंदिरा गांधी ने उम्मीद के साथ उत्तर प्रदेश भेजा। बहुगुणा का संगठनात्मक अनुभव बहुत अच्छा था। इससे उत्तर प्रदेश में कंग्रेस जीत गई। 1975 में आपातकाल इंदिरागांधी ने लगवाया, इस स्थिति में श्रीमती इंदिरा गांधी को लगा कि उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री बहुगुणा शक्तिशाली हो रहे हैं। इस बात को वह सहन नहीं कर पाईं और उन्हें मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया। कांग्रेस ऐसी ही घटनाओं से धीरे-धीरे अपने अस्तित्व को खो रही हैं। इस तरह से ही बड़े-बड़े राज्यों से कांग्रेस सिमट गई हैं।

प्रसंग रात्रिभोज को लेकर था। जहां थरूर कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के कार्य से खुश नहीं हैं, लगता है आने वाले समय में शशि थरूर कांग्रेस को अलविदा कर लेंगे। कांग्रेस का एक अनुभवी नेता, जो अंतर्राष्टीय स्तर पर बहुत अनुभवी है, वह पार्टी से किनारे हो रखा है, ऐसे में और कांग्रेसी भी पार्टी छोड़ने का मन बना लेंगे।

लेखक: भगवती प्रसाद डोभाल

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