Delhi Protest: दिल्ली के राजीव चौक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और समाजवादी पार्टी से जुड़े झंडे दिखाई दिए। प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि उनकी जानकारी के बिना मतदाता सूची से नाम हटा दिए गए हैं, जबकि कुछ ऐसे लोग भी सामने आए जिन्होंने स्वीकार किया कि उनका अपना वोट नहीं कटा है, लेकिन वे दूसरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने पहुंचे हैं। वहीं, प्रदर्शन में शामिल लोगों से सवाल करने पर वोट चोरी के आरोपों, चुनाव आयोग की भूमिका, SIR की प्रक्रिया और राजनीतिक दलों के दावों को लेकर अलग-अलग जवाब सामने आए। खबर इंडिया के पत्रकार ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से सवाल किए और सत्ता पक्ष के समर्थकों से भी चर्चा की। इस दौरान कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली।
Delhi Protest: प्रदर्शन में राजनीतिक दलों के झंडे दिखाई दिए
खबर इंडिया के पत्रकार ने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद लोगों से बातचीत की। वहां कांग्रेस, CPI, AISF और समाजवादी पार्टी के झंडे दिखाई दे रहे थे। पत्रकार ने सवाल उठाया कि प्रदर्शन में आम लोगों की भागीदारी कितनी है और क्या यह आयोजन मुख्य रूप से राहुल गांधी और अखिलेश यादव की राजनीतिक छवि को मजबूत करने के लिए किया जा रहा है?पत्रकार का कहना था कि प्रदर्शन स्थल पर अलग-अलग राजनीतिक संगठनों के झंडे बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि अगर SIR को लेकर इतनी बड़ी समस्या है तो समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश में ही इसके खिलाफ प्रदर्शन क्यों नहीं करते?इस पर एक प्रदर्शनकारी ने जवाब दिया कि जैसे किसी पड़ोसी को परेशानी होने पर दूसरा व्यक्ति भी उसकी मदद के लिए पहुंचता है, वैसे ही अखिलेश यादव भी इस मुद्दे पर समर्थन देने आए हैं।
छत्तीसगढ़ से आई महिला ने बताई प्रदर्शन में शामिल होने की वजह
प्रदर्शन स्थल पर पत्रकार की मुलाकात छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से आईं राम सिंह सलाम से हुई। उन्होंने बताया कि वह ट्रेन से दिल्ली पहुंची हैं और SIR के मुद्दे पर आयोजित रैली में शामिल होने आई हैं।जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका अपना वोट भी काट दिया गया है, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और उनका वोट नहीं कटा है। इसके बावजूद वह इस आंदोलन में शामिल हुई हैं, क्योंकि उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के मतदान के अधिकार का मामला है।उन्होंने कहा कि अगर आम लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज नहीं उठाएंगे तो उनकी ओर से कोई दूसरा आगे नहीं आएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें SIR की प्रक्रिया के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि वह पूरे दिन प्रदर्शन में शामिल रहेंगी।
Delhi Protest: झारखंड से आए लोगों ने भी लगाए वोट कटने के आरोप
पत्रकार को झारखंड से आए कुछ लोग भी मिले। इनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि उन्हें कांग्रेस पार्टी के माध्यम से जानकारी मिली कि मतदाता सूची से वोट हटाए जा रहे हैं। हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने खुद अपने वोट का नाम कटने की जांच की है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इसकी जानकारी पार्टी के जरिए मिली है।एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि उनके पिता का नाम मतदाता सूची से गायब हो गया है। उनका दावा था कि उनके पिता करीब 60 साल से मतदान करते आ रहे थे, लेकिन SIR की प्रक्रिया के बाद उनका नाम सूची में नहीं दिखाई दे रहा है।जब उनसे पूछा गया कि नाम हटने का कारण क्या है और उन्होंने इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली है या नहीं, तो उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि इस समस्या का समाधान किस अधिकारी से करवाया जाए। इसी वजह से वह दिल्ली पहुंचे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जवाब चाहते हैं।इस पर पत्रकार ने सवाल किया कि क्या उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO), एसडीओ या जिला निर्वाचन अधिकारी से संपर्क किया है। व्यक्ति ने कहा कि उन्हें यह तक नहीं पता कि इस मामले में किससे संपर्क करना चाहिए।
एक व्यक्ति ने बताया कि शिकायत के बाद जुड़ गया था नाम
पत्रकार ने एक अन्य व्यक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें पीछे एक ऐसा शख्स मिला था, जिसने बताया कि उसका और उसकी बहन का नाम भी मतदाता सूची से गायब हो गया था। हालांकि, BLO से संपर्क करने के बाद करीब एक महीने के भीतर उसका नाम दोबारा जुड़ गया।इसी संदर्भ में पत्रकार ने सवाल उठाया कि अगर किसी व्यक्ति का नाम सूची से हट गया है तो उसे संबंधित अधिकारी से संपर्क करके दोबारा जुड़वाने की कोशिश करनी चाहिए।एक अन्य प्रदर्शनकारी ने बताया कि पिछले चुनाव में उसने मतदान किया था, लेकिन इस बार जारी अंतिम मतदाता सूची में उसका नाम नहीं है। उसने कहा कि उसने BLO से शिकायत की थी और अधिकारी ने नाम दोबारा जुड़वाने के लिए आगे भेजने की जानकारी दी थी। हालांकि, इसके बाद क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी उसे नहीं मिली।
Delhi Protest: वोट चोरी के आरोपों पर अलग-अलग दावे
प्रदर्शन में शामिल लोगों से जब पूछा गया कि उन्हें कैसे पता चला कि वोट चोरी हो रही है, तो कुछ लोगों ने कहा कि उनके गांवों की मतदाता सूची से ऐसे लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, जो लंबे समय से वहां रह रहे हैं।उनका आरोप था कि बिना उचित सूचना दिए नाम हटाना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर किसी का नाम मतदाता सूची से हटाना है तो पहले उसे नोटिस दिया जाना चाहिए और जवाब देने का अवसर मिलना चाहिए।वहीं, दूसरी ओर प्रदर्शन का विरोध कर रहे एक व्यक्ति ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटने के पीछे मृत्यु या दूसरे स्थान पर चले जाने जैसे कारण भी हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं और इनमें कथित घुसपैठियों के नाम भी शामिल हो सकते हैं।इस पर पत्रकार ने सवाल किया कि सरकार या प्रदर्शनकारी किस आधार पर किसी व्यक्ति को घुसपैठिया बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी का नाम हटने के पीछे का वास्तविक कारण और उसके समर्थन में प्रमाण सामने आना जरूरी है।
SIR पर अखिलेश यादव की भूमिका को लेकर सवाल
पत्रकार ने इलाहाबाद से आए एक प्रदर्शनकारी से पूछा कि अगर SIR का मुद्दा उत्तर प्रदेश से भी जुड़ा है तो अखिलेश यादव अपने राज्य में इसके खिलाफ प्रदर्शन क्यों नहीं करते? उन्होंने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर अखिलेश यादव के बड़े-बड़े पोस्टर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन आंदोलन का आयोजन दिल्ली में किया गया है।इस पर प्रदर्शनकारी ने जवाब दिया कि यह प्रदर्शन कांग्रेस की ओर से किया गया है और अखिलेश यादव इसमें समर्थन देने पहुंचे हैं। उसने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर किसी पड़ोसी को परेशानी होती है तो दूसरा व्यक्ति भी उसके साथ खड़ा हो सकता है।उसने दावा किया कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की स्थिति बेहतर होगी और पत्रकार को राज्य में जाकर चुनावी माहौल देखने का निमंत्रण भी दिया।इसके जवाब में पत्रकार ने कहा कि वह सहारनपुर, शामली और बागपत समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों का दौरा कर चुके हैं। उनके अनुसार, वहां कई लोगों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति समर्थन जताया है। उन्होंने SIR के मुद्दे को विपक्ष की ओर से उठाया गया राजनीतिक मुद्दा बताया।
Delhi Protest: ब्राह्मण वोट और राजनीतिक समर्थन पर भी हुई बहस
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर चर्चा के बीच पत्रकार ने कहा कि अक्सर यह दावा किया जाता है कि ब्राह्मण समुदाय का वोट भाजपा को जाता है, लेकिन किसी भी समुदाय के सभी मतदाताओं की पसंद एक जैसी नहीं हो सकती।उन्होंने खुद को ब्राह्मण बताते हुए सवाल किया कि अगर इस समुदाय का वोट भाजपा के लिए तय है तो वह खुद विपक्ष के प्रदर्शन में सवाल क्यों कर रहे हैं।इस पर प्रदर्शनकारी ने कहा कि उनके पीछे अखिलेश यादव का कोई टैग नहीं है और वह कांग्रेस के मुद्दों की बात कर रहे हैं। दोनों के बीच राजनीतिक पहचान और समर्थन को लेकर भी बहस हुई।
1984 के सिख नरसंहार का मुद्दा भी उठा
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के समर्थन में बोल रहे एक व्यक्ति ने स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस के योगदान का जिक्र किया। उसने आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़े लोगों ने स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ मुखबिरी की थी और मौजूदा सरकार देश के हितों के खिलाफ काम कर रही है।इस पर पत्रकार ने 1 नवंबर 1984 को हुए सिख नरसंहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब यह घटना कांग्रेस शासनकाल में हुई थी तो क्या आज कांग्रेस का कोई नेता खुलकर स्वीकार करता है कि सिखों के साथ जो हुआ वह गलत था और पीड़ित परिवारों को अब भी न्याय मिलना चाहिए।पत्रकार ने कहा कि दिल्ली में आज भी कई सिख परिवार न्याय के लिए प्रयास कर रहे हैं।इस पर प्रदर्शनकारी ने कांग्रेस के ऐतिहासिक योगदान और सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका का जिक्र किया। उसने कहा कि पटेल ने देश की रियासतों को भारत में मिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।दोनों के बीच देश के विभाजन, धार्मिक स्थलों और सिख समुदाय से जुड़े मुद्दों पर भी तीखी बहस हुई।
Delhi Protest: 400 पार के नारे और वोट चोरी के आरोप पर सवाल
पत्रकार ने प्रदर्शनकारी से पूछा कि अगर भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 400 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था और वोट चोरी हो रही थी, तो भाजपा 400 सीटों के पार क्यों नहीं पहुंच पाई?इस पर प्रदर्शनकारी ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि कभी-कभी लोग दूसरों को प्रभावित करने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा का दावा करते हैं। उसने कहा कि चुनावी वादे और राजनीतिक दावे भी इसी तरह लोगों को प्रभावित करने के लिए किए जाते हैं।इसके बाद पत्रकार ने कांग्रेस नेताओं के उन बयानों का जिक्र किया, जिनमें SIR की प्रक्रिया को सही बताया गया था। उन्होंने सवाल किया कि अगर प्रक्रिया गलत है तो कांग्रेस की सरकार वाले राज्यों में भी इस मुद्दे पर समान सवाल क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं।उन्होंने यह भी पूछा कि कांग्रेस कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और केरल में कथित वोट चोरी का मुद्दा क्यों नहीं उठाती।प्रदर्शनकारी ने इसका जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का अधिकार है और अगर सरकार जनता के हित में काम नहीं करती तो उसका विरोध होना चाहिए।
2027 के चुनाव और सेना की तैनाती पर विवाद
एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव के लिए सेना का इस्तेमाल करना चाहती है। उसने इसे पाकिस्तान की चुनावी व्यवस्था से जोड़ते हुए दावा किया कि वहां सैन्य शासन के प्रभाव में चुनाव कराए जाते हैं।पत्रकार ने इस दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर भारत में भी लोगों को लाठियों के दम पर मतदान से रोका जा रहा होता तो इतनी बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन स्थल पर कैसे पहुंच पाते?इस दौरान प्रदर्शनकारी ने राहुल गांधी के उस आह्वान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने लोगों से सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने की बात कही थी। उसने दावा किया कि 2027 में राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा।वहीं, पत्रकार ने श्रीलंका और बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलावों का जिक्र किया। इस पर प्रदर्शनकारी ने कहा कि बांग्लादेश में युवाओं के बजाय कट्टरपंथी तत्वों की भूमिका रही है।
Delhi Protest: महंगाई और रोजगार के मुद्दे पर भी हुई बहस
प्रदर्शन के बीच पत्रकार की एक अन्य व्यक्ति से महंगाई और रोजगार को लेकर तीखी बहस हुई। व्यक्ति ने कहा कि देश के लिए आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन पत्रकार ने सवाल किया कि क्या देश के लिए आंदोलन करने के नाम पर लोगों को अपने परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों को नजरअंदाज कर देना चाहिए?इस पर व्यक्ति ने कहा कि उसने अपने बच्चों को समझाकर घर छोड़ा है और उन्हें वकालत करने, ठेला चलाने या सब्जी बेचकर अपना जीवन चलाने की सलाह दी है।पत्रकार ने महंगाई का उदाहरण देते हुए चीनी की कीमत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह 45 रुपये किलो चीनी खरीदने जाते हैं और अगर इसकी कीमत बढ़कर 60 रुपये हो जाती है तो उन्हें भी अपने परिवार की जरूरत पूरी करने के लिए खरीदनी पड़ेगी।इस पर प्रदर्शनकारी ने सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों पर सवाल उठाए। उसने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में ठेले चलाने और छोटे-मोटे काम करने को मजबूर हैं। उसने आरोप लगाया कि राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं हैं।
दिल्ली के प्रदर्शन में 48 लाख वोट कटने का दावा
प्रदर्शन स्थल पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े कॉमरेड हैदर अंसारी भी मिले। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली के रहने वाले हैं और इस आंदोलन में शामिल हुए हैं।जब उनसे पूछा गया कि क्या वास्तव में वोट चोरी हो रही है या यह केवल राजनीतिक मुद्दा बन गया है, तो उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में करीब 48 लाख वोट मतदाता सूची से हटाए गए हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार गैर-भाजपा समर्थक मतदाताओं के नाम हटवा रही है और इसमें चुनाव आयोग तथा पुलिस प्रशासन की भूमिका भी है।पत्रकार ने उनसे पूछा कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, क्या वे सभी जीवित थे और अब भी उसी स्थान पर रह रहे हैं? क्या यह संभव नहीं है कि कुछ मतदाताओं की मृत्यु हो गई हो या वे दूसरी जगह चले गए हों?इस पर हैदर अंसारी ने इन कारणों को बहाना बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग केंद्र सरकार के इशारे पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई जनता के हित और संविधान की भावना के खिलाफ है।
Delhi Protest: प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
हैदर अंसारी ने कहा कि अगर सरकार जनता के मुद्दों से भटकती है तो नागरिकों को उसके खिलाफ आवाज उठाने का अधिकार है। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का अधिकार है।पत्रकार ने सवाल किया कि त्योहारों के समय इस तरह के प्रदर्शन करने से आम लोगों और बाजारों पर क्या असर पड़ता है। उन्होंने पूछा कि क्या रमजान या ईद के समय भी इसी तरह के बड़े प्रदर्शन देखने को मिलते हैं?इस पर अंसारी ने जवाब दिया कि सरकार की नीतियों का असर सभी समुदायों पर पड़ता है और किसी भी समय जनता को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से नहीं रोका जा सकता। उन्होंने कहा कि जब लोगों को रोजगार और आर्थिक अवसर नहीं मिलेंगे तो बाजारों में भी रौनक नहीं रहेगी।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
बात आगे बढ़ी तो हैदर अंसारी ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की। उनका कहना था कि बैलेट पेपर से चुनाव होने पर स्थिति साफ हो जाएगी और किसी तरह का संदेह नहीं रहेगा।पत्रकार ने इस पर सवाल किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां EVM को लेकर सवाल क्यों नहीं उठाए जाते? उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों में बैलेट पेपर से मतदान हुआ था, लेकिन वहां भी कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।इस पर अंसारी ने कहा कि चुनाव बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए, ताकि मतदाताओं के सामने पूरी प्रक्रिया स्पष्ट हो सके।
Delhi Protest: प्रदर्शन की भीड़ को लेकर पत्रकार ने उठाए सवाल
पूरे आयोजन के दौरान पत्रकार ने अलग-अलग स्थानों पर मौजूद कांग्रेस, CPI, AISF और समाजवादी पार्टी के झंडों को कैमरे में दिखाया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ज्यादा दिखाई दे रही थी और आम जनता की भागीदारी स्पष्ट रूप से नजर नहीं आई।उन्होंने आरोप लगाया कि इस आयोजन के जरिए राहुल गांधी और अखिलेश यादव की राजनीतिक छवि को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। पत्रकार ने यह भी सवाल उठाया कि त्योहारों के नजदीक होने पर दिल्ली के राजीव चौक जैसे व्यस्त इलाके में प्रदर्शन करने से आम लोगों और बाजारों पर क्या असर पड़ता है।दूसरी ओर, प्रदर्शन में शामिल लोगों ने इसे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और मताधिकार की रक्षा के लिए जरूरी बताया। उनका कहना था कि सरकार और चुनाव आयोग को मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।इस तरह राजीव चौक पर आयोजित प्रदर्शन में SIR, कथित वोट चोरी, चुनाव आयोग की निष्पक्षता, EVM, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक दलों की भूमिका जैसे कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। हालांकि, मौके पर मौजूद लोगों के दावों और आरोपों के बीच कई सवाल ऐसे भी रहे, जिनका जवाब संबंधित अधिकारियों और चुनाव आयोग की ओर से ही स्पष्ट हो सकता है।








