Dharmendra Pradhan: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंप दिया है। जोशी अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ अब शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल के दिनों में शिक्षा व्यवस्था और NEET परीक्षा को लेकर देशभर में चर्चा और विरोध प्रदर्शन जारी रहे।
प्रह्लाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वर्तमान में वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। कर्नाटक के धारवाड़ से सांसद प्रह्लाद जोशी इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष भी हैं। अब वह अपने मौजूदा मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का कामकाज भी देखेंगे।
Dharmendra Pradhan: इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान का संदेश
इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए उन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक काम किया है। उनके अनुसार, मजबूत और समावेशी शिक्षा व्यवस्था ही राष्ट्र निर्माण का आधार है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।
NEET विवाद का किया उल्लेख
अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले का तत्काल संज्ञान लेकर जांच सीबीआई को सौंपी, परीक्षा रद्द की और पुनः परीक्षा आयोजित कराने का निर्णय लिया। साथ ही अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।
Dharmendra Pradhan: आंदोलन और छात्रों के भविष्य का दिया हवाला
धर्मेंद्र प्रधान ने जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से उन्हें दुख पहुंचा है। उन्होंने कहा कि उनका इस्तीफा व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि छात्रों के हित और देश की एकता को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला है। उन्होंने अपील की कि विद्यार्थी कानूनी विवादों में उलझने के बजाय अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करें।
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