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ट्रंप पर आरोप लगाने वाली लेखिका अब खुद जांच के घेरे में, अमेरिका में नया राजनीतिक बवाल

Donald trump: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली लेखिका ई. जीन कैरोल अब खुद कानूनी जांच के घेरे में आ गई हैं। अमेरिकी न्याय विभाग (Justice Department) ने उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू कर दी है। यह वही मामला है जिसमें पहले ट्रंप को सिविल कोर्ट ने यौन शोषण के लिए जिम्मेदार माना था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जांच इस बात को लेकर की जा रही है कि क्या ई. जीन कैरोल ने ट्रंप के खिलाफ दायर सिविल मामलों के दौरान अदालत में झूठी गवाही दी थी। CNN और द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जांच एजेंसियां साल 2022 में कैरोल द्वारा दिए गए बयान की पड़ताल कर रही हैं।

ट्रंप पर क्या थे आरोप?

ई. जीन कैरोल ने आरोप लगाया था कि साल 1996 में न्यूयॉर्क के एक डिपार्टमेंट स्टोर में डोनाल्ड ट्रंप ने उनका यौन शोषण किया था। इस मामले को लेकर अमेरिका में काफी राजनीतिक और कानूनी विवाद हुआ था। इसके अलावा कैरोल ने ट्रंप पर मानहानि का केस भी किया था। ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर इन आरोपों को झूठा बताया था और कहा था कि कैरोल उनकी “टाइप की महिला” नहीं हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि लेखिका अपनी किताब बेचने के लिए कहानी बना रही हैं। बाद में अदालत ने ट्रंप को मानहानि मामले में दोषी माना और ई. जीन कैरोल को करीब 8 करोड़ 33 लाख डॉलर का हर्जाना देने का आदेश दिया था।

Donald trump: अब किस बात की हो रही है जांच?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैरोल ने अदालत में कहा था कि उन्हें अपने केस लड़ने के लिए किसी बाहरी व्यक्ति से आर्थिक मदद नहीं मिली। लेकिन बाद में जानकारी सामने आई कि अरबपति कारोबारी रीड हॉफमैन ने उनकी कुछ कानूनी फीस और अन्य खर्चों में मदद की थी। अब अमेरिकी न्याय विभाग इसी पहलू की जांच कर रहा है कि क्या अदालत में दिए गए बयान तथ्यात्मक रूप से गलत थे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संघीय अभियोजक एंड्रयू एस. बोट्रोस इस जांच का नेतृत्व कर रहे हैं। खास बात यह है कि उनकी नियुक्ति ट्रंप प्रशासन के दौरान हुई थी।

ट्रंप पर उठ रहे सवाल

Donald trump: डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ जांच एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर आलोचनाओं का सामना करते रहे हैं। विपक्षी नेताओं और आलोचकों का आरोप है कि ट्रंप न्याय विभाग पर दबाव बनाकर अपने विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई करवाना चाहते हैं। हालांकि ट्रंप समर्थकों का कहना है कि अगर किसी ने अदालत में गलत जानकारी दी है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।

 

 

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