Form Six: Form 6 इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। नए मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले इस फॉर्म को लेकर SIR की प्रक्रिया के बीच सवाल उठे हैं। Form 6 के साथ मांगी जा रही अतिरिक्त जानकारी और इसे लेकर चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों ने भी बहस बढ़ा दी है। आखिर Form 6 क्या है, SIR से इसका क्या कनेक्शन है और विवाद की वजह क्या है? समझें पूरा मामला।
Form 6 आखिर क्या है?
Form 6 नए मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 18 साल की उम्र पूरी कर चुके भारतीय नागरिक, जिनका नाम अभी तक वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं है, इस फॉर्म के जरिए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें आवेदक का नाम, पता, उम्र और दूसरी जरूरी जानकारियां ली जाती हैं।
अचानक फॉर्म 6 चर्चा में आया
Form 6 की चर्चा उस समय बढ़ी जब SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र नए मतदाताओं के आवेदन के साथ दिखाई दिया। इसमें पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी मांगे जाने को लेकर सवाल उठने लगे। खास तौर पर आवेदक से उसके या परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी देने की बात सामने आई।
SIR से फॉर्म 6 का कनेक्शन
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची को दोबारा जांचने और उसे अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल करना और रिकॉर्ड में जरूरी सुधार करना है। इसी प्रक्रिया में नए मतदाताओं की जानकारी को पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जोड़ने के लिए अतिरिक्त घोषणा-पत्र की व्यवस्था चर्चा में आई।
Form Six: विवाद किस बात को लेकर हुआ?
विवाद सिर्फ अतिरिक्त जानकारी मांगे जाने तक सीमित नहीं रहा। चुनाव आयोग के भीतर ही इस व्यवस्था को लेकर मतभेद की बात सामने आई। आपत्ति का एक प्रमुख आधार यह बताया गया कि Form 6 एक निर्धारित वैधानिक फॉर्म है और इसमें किसी तरह का बदलाव तय प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। इसी वजह से अतिरिक्त घोषणा-पत्र को लेकर सवाल उठे।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया कि मूल Form 6 में बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार SIR से जुड़ी जानकारी अलग घोषणा-पत्र के माध्यम से ली जा रही है। आयोग ने इसे SIR की प्रक्रिया से जुड़ी व्यवस्था बताया और कहा कि इसका उद्देश्य नए मतदाताओं के विवरण को मतदाता सूची के पुराने रिकॉर्ड से जोड़ने में मदद करना है।
अब फॉर्म 6 इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया?
Form 6 को लेकर बहस इसलिए भी तेज हुई क्योंकि यह सीधे नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची से जुड़ा है। इसके साथ SIR की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के भीतर सामने आए मतभेदों ने मामले को और चर्चा में ला दिया। बाद की बैठकों में आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मत बताया और प्रक्रिया से संबंधित कुछ बदलावों की जानकारी भी दी। कुल मिलाकर, Form 6 अपने आप में नया वोटर बनने के लिए इस्तेमाल होने वाला आवेदन फॉर्म है। मौजूदा विवाद इसके साथ SIR से जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र, पुराने मतदाता रिकॉर्ड और इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया को लेकर है।
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