Home » News » 5 रुपये से शुरू किराया, फिर भी खाली दौड़ रही देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानिए क्या है वजह

5 रुपये से शुरू किराया, फिर भी खाली दौड़ रही देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानिए क्या है वजह

5 रुपये से शुरू किराया, फिर भी खाली दौड़ रही देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जानिए क्या है वजह

India’s First Hydrogen Train: भारतीय रेलवे लगातार आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा दे रहा है। वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों के बाद अब देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन भी यात्रियों के लिए शुरू कर दी गई है। यह ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच संचालित की जा रही है। खास बात यह है कि इस ट्रेन का किराया बेहद किफायती रखा गया है। यात्रियों को मात्र 5 रुपये के शुरुआती किराये में सफर करने का मौका मिल रहा है, जबकि जींद से सोनीपत तक का अधिकतम किराया केवल 25 रुपये है।

शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या रही कम

इतना कम किराया होने के बावजूद हाइड्रोजन ट्रेन को शुरुआती दिनों में अपेक्षित संख्या में यात्री नहीं मिल सके। पहले दिन जींद जंक्शन से करीब 20 यात्रियों ने इस ट्रेन में सफर किया। दूसरे दिन भी यात्रियों की संख्या लगभग इतनी ही रही। रेलवे को उम्मीद थी कि नई तकनीक और कम किराये की वजह से यात्रियों का अच्छा रुझान देखने को मिलेगा, लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं हो पाया है।

India’s First Hydrogen Train: आखिर क्यों नहीं बढ़ रही यात्रियों की संख्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर पहले से ही कई पैसेंजर और अन्य ट्रेनें संचालित हो रही हैं। यात्रियों के पास पहले से कई विकल्प मौजूद हैं, इसलिए नई ट्रेन को अभी पर्याप्त यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। इसके अलावा, हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में अभी भी काफी लोगों को जानकारी नहीं है। जैसे-जैसे इस ट्रेन की सुविधाओं और विशेषताओं की जानकारी लोगों तक पहुंचेगी, वैसे-वैसे इसमें यात्रियों की संख्या बढ़ने की संभावना है।

India’s First Hydrogen Train: बिना डीजल के चलती है हाइड्रोजन ट्रेन

हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजन पर निर्भर नहीं होती। यह आधुनिक फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है। ट्रेन में मौजूद फ्यूल सेल हाइड्रोजन और हवा में मौजूद ऑक्सीजन की रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा करता है। यही बिजली ट्रेन को चलाने के लिए इस्तेमाल होती है। इस पूरी प्रक्रिया में धुआं या हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होता, जिससे यह पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है।

रेलवे को भविष्य में बेहतर प्रतिक्रिया की उम्मीद

भारतीय रेलवे का मानना है कि फिलहाल यह नई तकनीक होने के कारण लोगों में जागरूकता की कमी है। आने वाले समय में जब अधिक लोग इस ट्रेन के बारे में जानेंगे और इसकी सुविधाओं का अनुभव करेंगे, तब यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। रेलवे का उद्देश्य भविष्य में पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक ट्रेनों का दायरा और बढ़ाना है, ताकि यात्रियों को बेहतर सफर के साथ-साथ स्वच्छ परिवहन का विकल्प भी मिल सके।

ये भी पढ़े……लोकसभा में किरेन रिजिजू बोले- ‘सरकार NEET मुद्दे पर चर्चा को तैयार’