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भारत का बड़ा फैसला, जहाजों की सुरक्षा के लिए 12,980 करोड़ का बीमा पूल मंजूर

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Iran crisis: ईरान–इजरायल–अमेरिका के बीच तनाव भले फिलहाल शांत होता दिख रहा हो, लेकिन दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति अभी भी सामान्य नहीं हुई है। यहां जहाजों की आवाजाही पर खतरा बना हुआ है, ईरान द्वारा टोल वसूली, अमेरिका की नाकेबंदी और समुद्र में माइंस बिछाए जाने से हालात संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक व्यापार को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए नई योजना को मंजूरी दे दी है।

भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल को मंजूरी

सरकार ने करीब 12,980 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी है, जिसे भारत मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल (BMI Pool) नाम दिया गया है। इसका मकसद यह है कि भारतीय झंडे वाले या भारत से जुड़े जहाजों को सस्ता और लगातार बीमा कवर मिल सके चाहे वे दुनिया के किसी भी समुद्री रास्ते से व्यापार कर रहे हों।

Iran crisis: कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला

यह फैसला शनिवार को नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार इस योजना के तहत 12,980 करोड़ रुपये की गारंटी देगी, जिससे एक मजबूत घरेलू बीमा सिस्टम तैयार किया जा सके।

Iran crisis: कौन-कौन से जोखिम होंगे कवर?

इस बीमा पूल के तहत समुद्री व्यापार से जुड़े लगभग सभी बड़े जोखिमों को कवर किया जाएगा, जैसे: जहाज और मशीनरी को नुकसान, माल ढुलाई के दौरान जोखिम, थर्ड पार्टी जिम्मेदारी (P&I), युद्ध और संघर्ष से जुड़े खतरे, सरकार के मुताबिक, इस पूल की अंडरराइटिंग क्षमता करीब 950 करोड़ रुपये होगी, जिससे भारत के अंदर ही बीमा और जोखिम प्रबंधन मजबूत होगा।

आत्मनिर्भर बनेगा मरीन इंश्योरेंस सेक्टर

अभी तक भारतीय जहाज काफी हद तक विदेशी संस्थाओं, खासकर इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ प्रोटेक्शन एंड इंडेम्निटी क्लब पर निर्भर हैं। लेकिन वैश्विक तनाव या प्रतिबंधों के समय ये कवरेज कभी भी वापस लिया जा सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए सरकार ने घरेलू बीमा पूल बनाने का फैसला किया है, ताकि किसी भी संकट में भारत का समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।

क्यों जरूरी है ये कदम?

Iran crisis: वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और अनिश्चितता के कारण जहाजों, माल और क्रू की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है। इसके चलते बीमा महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में यह नई पहल न सिर्फ भारतीय जहाजों को सुरक्षा देगी, बल्कि देश को मरीन बीमा, क्लेम मैनेजमेंट और कानूनी विशेषज्ञता के मामले में भी आत्मनिर्भर बनाएगी।

 

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