Iran crisis: ईरान-अमेरिका वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हुए अधिकारी, पाकिस्तान के गृह मंत्री भी पहुंचे तेहरान, ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशें तेज हो गई हैं। हाल ही में घोषित सीजफायर के बाद अब दोनों पक्षों के प्रतिनिधि स्विट्जरलैंड में होने वाली अहम बैठक की तैयारी में जुट गए हैं। ईरान के सरकारी टेलीविजन के अनुसार, देश के अधिकारियों की एक टीम अमेरिका के साथ अंतरिम समझौते पर आगे की बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाहेई ने कहा कि किसी भी समझौते की असली परीक्षा उसके लागू होने के दौरान होती है।
पहले से स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं अमेरिकी वार्ताकार
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि अमेरिका के प्रमुख वार्ताकार जेरेड कुशनर और स्टीव विटकोफ पहले से ही स्विट्जरलैंड में मौजूद हैं। वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अंतरिम समझौते से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार से स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू हो सकती है। इस प्रक्रिया में कतर भी मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
Iran crisis: होर्मुज स्ट्रेट को लेकर फिर बढ़ा तनाव
बातचीत की तैयारियों के बीच ईरान ने इजरायल पर सीजफायर का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने दावा किया कि लेबनान में जारी इजरायली हमलों के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद करने का फैसला लिया गया है। इस कदम से क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
Iran crisis: पाकिस्तान के गृह मंत्री अचानक पहुंचे ईरान
इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को बिना किसी पूर्व घोषणा के ईरान पहुंच गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पहले मशहद पहुंचे और बाद में तेहरान के लिए रवाना हुए, जहां उनकी वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों से मुलाकात होने की संभावना है। ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, नकवी अपनी यात्रा के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच चल रही वार्ताओं पर नजर रखेंगे। गौरतलब है कि हालिया समझौता ज्ञापन में पाकिस्तान भी एक प्रमुख मध्यस्थ और जमानतदार के रूप में शामिल रहा है।
अगले कुछ दिन होंगे अहम
Iran crisis: विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत ईरान-अमेरिका संबंधों की दिशा तय कर सकती है। हालांकि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव और इजरायल से जुड़े विवादों के कारण स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
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