Iran crisis: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच संभावित वार्ता को लेकर अब भी अनिश्चितता बनी हुई है। ईरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी शुरू होगी जब उसकी रखी गई अहम शर्तें पूरी होंगी। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को फिलहाल अधर में डाल दिया है।
शर्तों पर अड़ा ईरान
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागैर गालिबफ ने कहा है कि बातचीत से पहले दो शर्तें पूरी होना जरूरी है पहली, लेबनान में युद्धविराम और दूसरी, ईरान की रोकी गई संपत्तियों की रिहाई। उनका कहना है कि इन शर्तों के बिना बातचीत शुरू नहीं हो सकती।
Iran crisis: नाजुक बना हुआ है युद्धविराम
ईरान और अमेरिका के बीच जो अस्थायी युद्धविराम हुआ है, वह अभी बेहद नाजुक स्थिति में है। ईरान का दावा है कि इस समझौते में लेबनान में इजरायल की सैन्य कार्रवाई रोकना भी शामिल है। वहीं अमेरिका और इजरायल का कहना है कि यह शर्त हिज़्बुल्लाह के ठिकानों पर लागू नहीं होती। इस बीच, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ईमानदारी दिखाता है, तो अमेरिका भी बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन किसी तरह की चालाकी पर सख्त रुख अपनाया जाएगा।
कौन-कौन होगा शामिल?
Iran crisis: इस अहम बैठक में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस करेंगे। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी शामिल होंगे। हालांकि, ईरान की ओर से कौन-कौन नेता शामिल होंगे, इसे लेकर अभी तक पूरी पुष्टि नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व खुद गालिबफ कर सकते हैं, लेकिन अब्बास अरगची समेत अन्य नेताओं के इस्लामाबाद पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह वार्ता तय समय पर शुरू हो पाएगी या नहीं।
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