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ईरान का दावा- UAE में Oracle डेटा सेंटर पर हमला, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना नया युद्धक्षेत्र

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अब जंग का स्वरूप बदलता नजर आ रहा है, जहां पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ टेक कंपनियां और डेटा सेंटर भी निशाने पर आ गए हैं। ईरान ने UAE में Oracle के डेटा सेंटर पर हमले का दावा किया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस घटनाक्रम ने संकेत दिया है कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी अब आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।
Iran Tech Attack:

Iran Tech Attack: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। इस बार जंग सिर्फ मिसाइलों और सैनिकों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बड़ी टेक कंपनियां भी इसके दायरे में आ गई हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने UAE में Oracle के डेटा सेंटर को निशाना बनाया है।

हालांकि United Arab Emirates की ओर से इस हमले की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। इसके बावजूद इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

क्यों बना Oracle निशाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक Oracle के अमेरिका के रक्षा विभाग से करीबी संबंध माने जाते हैं। इसके अलावा कंपनी के फाउंडर Larry Ellison के इजराइल से भी अच्छे संबंध बताए जाते हैं। इन्हीं वजहों से ईरान Oracle को सीधे तौर पर जंग से जुड़ा मान रहा है और उसे एक अहम टारगेट के रूप में देख रहा है।

Iran Tech Attack: अमेरिकी टेक कंपनियों पर बढ़ता खतरा

ईरान पहले ही संकेत दे चुका है कि वह अमेरिकी टेक कंपनियों को निशाना बना सकता है। इसमें

  • Amazon
  • Microsoft
  • Google
  • Apple
  • Intel
  • Meta

जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि फिलहाल Oracle की सेवाओं में किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

Iran Tech Attack: AWS पर पहले हमले के संकेत

इससे पहले Amazon Web Services के डेटा सेंटर पर हमले की खबर सामने आ चुकी है। बहरीन में AWS के क्लाउड सिस्टम को नुकसान पहुंचा था, जिससे कई डिजिटल सेवाएं प्रभावित हुई थीं। इसके अलावा UAE और बहरीन में ड्रोन हमलों के कारण कई डेटा सेंटर पहले भी प्रभावित हो चुके हैं।

18 कंपनियों को दी गई चेतावनी

ईरान ने हाल ही में 18 अमेरिकी कंपनियों को चेतावनी दी है। इनमें

  • Apple
  • Microsoft
  • Google
  • Amazon
  • IBM
  • Intel

जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने इन्हें आतंकी संगठनों तक बताया है और इनके दफ्तरों को खाली करने की चेतावनी दी है।

डिजिटल युद्ध की ओर बढ़ती दुनिया

ईरान का आरोप है कि ये टेक कंपनियां अमेरिका और इजराइल की सैन्य और खुफिया गतिविधियों में सहयोग कर रही हैं। खासतौर पर क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को अब आधुनिक युद्ध में अहम हथियार के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में डेटा सेंटर और डिजिटल नेटवर्क भी जंग का मुख्य हिस्सा बन सकते हैं।

यह भी पढे़ : मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: होर्मुज पर बयान, ईरान-इजराइल टकराव तेज, कई देशों की चिंता बढ़ी

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