Israel Election: इजराइल में प्रधानमंत्री पद के लिए हो रहे चुनाव में बंपर वोटिंग दर्ज की गई है। चुनाव आयोग के मुताबिक, दोपहर 12 बजे तक स्थानीय समय के अनुसार करीब 32% मतदान हुआ। यह 53 साल में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 1973 में इसी समय तक 33% मतदान दर्ज किया गया था। मतदान खत्म होने में अभी करीब 10 घंटे बाकी हैं। इस बीच छह में से चार ओपिनियन पोल में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट के गठबंधन को बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को एक पोल में बढ़त और एक में बहुमत मिलता दिखाया गया है।
Israel Election: 1988 का रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद
इजराइल में मतदान रात 10 बजे स्थानीय समय के अनुसार खत्म होगा। भारतीय समय के मुताबिक, मतदान समाप्त होने का समय रात करीब 1:30 बजे है। इजराइल में अब तक सबसे ज्यादा मतदान का रिकॉर्ड 79.9% है, जो 1988 के चुनाव में दर्ज किया गया था। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार मतदान का यह रिकॉर्ड टूट सकता है।
Israel Election: नेतन्याहू के मुकाबले आइजनकोट को बढ़त
इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट से कड़ी चुनौती मिल रही है। छह में से चार ओपिनियन पोल में आइजनकोट के गठबंधन को ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। हालांकि, नेतन्याहू के गठबंधन को भी एक सर्वे में बढ़त और दूसरे में बहुमत मिलने का अनुमान है। इजराइल की संसद में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है। इजराइल के 76 साल के इतिहास में किसी भी राजनीतिक पार्टी ने अकेले संसद में बहुमत हासिल नहीं किया है।
नेतन्याहू ने मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर पोस्ट कर कहा- इमरजेंसी
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मुस्लिम महिलाओं की तस्वीर पोस्ट कर अपने समर्थकों से ज्यादा से ज्यादा मतदान करने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर चैनल-14 का एक फुटेज साझा किया, जिसमें दो मतदान केंद्रों की तुलना की गई थी।नेतन्याहू ने दावा किया कि अरब इलाकों में सामान्य से ज्यादा मतदान हो रहा है, जबकि दक्षिणपंथी मतदाता कम संख्या में वोट डालने पहुंच रहे हैं। उन्होंने इसे इमरजेंसी बताते हुए कहा कि देश का भविष्य दांव पर है। उन्होंने अपने समर्थकों से तुरंत घरों से निकलकर मतदान करने की अपील की।
इजराइल में कैसे होता है चुनाव?
इजराइल में मतदाता सीधे किसी प्रधानमंत्री को नहीं चुनते, बल्कि राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। चुनाव से पहले हर पार्टी अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करती है। पूरे देश में पार्टी को मिले वोटों के आधार पर तय होता है कि उसे संसद में कितनी सीटें मिलेंगी।हालांकि, संसद में सीट हासिल करने के लिए किसी पार्टी को कुल वैध वोटों में से कम से कम 3.25% वोट प्राप्त करना जरूरी है। इससे कम वोट मिलने पर पार्टी को कोई सीट नहीं मिलती। पार्टी को जितनी सीटें मिलती हैं, उसकी सूची में उतने ही उम्मीदवार सांसद बनते हैं। उदाहरण के लिए, अगर किसी पार्टी को 20 सीटें मिलती हैं, तो उसकी उम्मीदवार सूची में पहले 20 स्थानों पर मौजूद उम्मीदवार संसद पहुंचते हैं।
चुनाव में चार बड़े मुद्दे
1. हमास के 7 अक्टूबर के हमले की जांच
7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजराइल पर बड़ा हमला किया था। इस हमले को रोकने में इजराइली सेना और खुफिया एजेंसियां नाकाम रही थीं। इसके बावजूद सरकार ने इस चूक की जांच के लिए आयोग नहीं बनाया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार हमले को रोकने में विफल रही और उसे इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। ऐसे में हमले की जांच और सरकार की जवाबदेही चुनाव के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
2. हरेदी समुदाय की सैन्य सेवा को लेकर विवाद
इजराइल में ज्यादातर यहूदियों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य है। हालांकि, हरेदी समुदाय के कुछ लोगों को धार्मिक शिक्षा के कारण सेना में भर्ती से छूट मिलती रही है। 1948 में इजराइल की स्थापना के बाद हरेदी समुदाय के 400 लोगों को यहूदी धार्मिक संस्थानों में पढ़ाई जारी रखने के लिए सैन्य सेवा से छूट दी गई थी। इसका उद्देश्य धार्मिक विद्वानों की पढ़ाई और परंपरा को बनाए रखना था। समय के साथ इस छूट का दायरा बढ़ गया। अब इस मुद्दे पर देश में विवाद है। दूसरे समुदायों के लोगों का कहना है कि जब देश युद्ध का सामना कर रहा है, तो सभी को सैन्य सेवा में योगदान देना चाहिए। नेतन्याहू को हरेदी समुदाय का समर्थन मिलता है और वह इस छूट को बनाए रखना चाहते हैं। वहीं, गादी आइजनकोट चाहते हैं कि हरेदी समुदाय के लोगों को भी सेना या नागरिक सेवा में शामिल किया जाए।
3. सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों का मुद्दा
गाजा युद्ध शुरू होने से पहले नेतन्याहू सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की शक्तियां कम करने के लिए न्यायिक सुधारों की पहल की थी। इस फैसले का देश में बड़े स्तर पर विरोध हुआ था। न्यायपालिका की स्वतंत्रता और सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव अब भी चुनाव का एक बड़ा मुद्दा है।
4. देश की सुरक्षा और युद्ध कब खत्म होगा?
नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ पूरी जीत हासिल करने का वादा किया था। हालांकि, क्षेत्र में सुरक्षा की चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। हमास और लेबनान का हिजबुल्लाह इजराइल के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में मतदाता यह भी देख रहे हैं कि देश की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी और युद्ध कब खत्म होगा। नेतन्याहू और आइजनकोट की सुरक्षा नीतियां भी चुनाव में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
नेतन्याहू और आइजनकोट, दोनों ने युद्ध में खोए अपने परिजन
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट का सैन्य पृष्ठभूमि से संबंध रहा है। दोनों ने अपने जीवन में युद्ध और सैन्य अभियानों के दौरान परिवार के सदस्यों को खोया है।
नेतन्याहू ने सेना की कमांडो यूनिट में किया काम
बेंजामिन नेतन्याहू 1967 में इजराइली सेना में भर्ती हुए थे। उन्होंने सेना की एलीट स्पेशल फोर्स यूनिट ‘सायरेत मतकल’ में सेवा दी। यह यूनिट खुफिया अभियानों और बंधकों को छुड़ाने जैसे विशेष सैन्य ऑपरेशन्स के लिए जानी जाती है। नेतन्याहू 1972 में सबेना एयरलाइंस के विमान को हाईजैक किए जाने के बाद बंधकों को छुड़ाने के अभियान में भी शामिल थे। उनके बड़े भाई योनातन नेतन्याहू की 1976 में युगांडा के एंटेबे में बंधकों को छुड़ाने के अभियान के दौरान मौत हो गई थी। वह इस अभियान का नेतृत्व कर रहे थे।
आइजनकोट आम सैनिक से बने सेना प्रमुख
गादी आइजनकोट ने 1978 में गोलानी ब्रिगेड में एक आम सैनिक के तौर पर अपने सैन्य करियर की शुरुआत की थी। करीब 38 साल की सेवा के बाद वह 2015 में इजराइल के सेना प्रमुख बने और 2019 तक इस पद पर रहे। सेना प्रमुख के रूप में उन्होंने सैन्य रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम फैसलों की जिम्मेदारी संभाली। उनके नाम से जुड़ी सैन्य रणनीति को ‘आइजनकोट डॉक्ट्रिन’ कहा जाता है। गाजा युद्ध के दौरान दिसंबर 2023 में उनके बेटे गाल की मौत हो गई थी। इसके अगले दिन उनके भतीजे माओर कोहेन आइजनकोट भी दक्षिणी गाजा में लड़ाई के दौरान मारे गए थे।
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