Jammu Kashmir: जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों की तस्करी के जरिए आतंकवाद को आर्थिक मदद पहुंचाने वाले कथित पाकिस्तान समर्थित नार्को-टेरर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है। विशेष एनआईए अदालत ने एसआईए कश्मीर के बहुचर्चित मामले में 10 आरोपितों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। इसके साथ ही मामले की नियमित सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
Jammu Kashmir: जांच में 16 आरोपितों की पहचान-
एसआईए की जांच में कुल 16 आरोपितों की पहचान हुई। इनमें 10 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं, पांच फरार हैं और एक आतंकी सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा जा चुका है। फरार आरोपितों में चार पाकिस्तान और पीओजेके में छिपे आतंकी हैंडलर शामिल हैं।
Jammu Kashmir: एलओसी के जरिए होती थी ड्रग्स की तस्करी-
एसआईए के अनुसार, अक्टूबर 2022 में दर्ज इस मामले की जांच में खुलासा हुआ कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के पाकिस्तान और पीओजेके स्थित संचालक नियंत्रण रेखा (एलओसी) के जरिए जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों की तस्करी कराते थे। तस्करी से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को फंड करने और नेटवर्क को मजबूत करने में किया जाता था।
गंभीर धाराओं में तय हुए आरोप-
विशेष एनआईए अदालत ने गिरफ्तार 10 आरोपितों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट, यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। इनमें भारत सरकार के खिलाफ साजिश, आतंकी गतिविधियों में शामिल होना, आतंकियों के लिए धन जुटाना, आपराधिक षड्यंत्र, जालसाजी और साक्ष्य मिटाने जैसे आरोप शामिल हैं।
फरार आतंकियों पर कार्रवाई जारी-
एसआईए ने बताया कि सभी 16 आरोपितों के खिलाफ छह विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। पाकिस्तान और पीओजेके में छिपे फरार आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। साथ ही यूएपीए के तहत आतंकवाद से जुड़ी संपत्तियों की कुर्की और जब्ती की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
आतंक की फंडिंग तोड़ने पर एजेंसी का फोकस-
एसआईए का कहना है कि ड्रग्स तस्करी और आतंकवाद के आर्थिक गठजोड़ को खत्म करने के लिए अभियान जारी रहेगा। एजेंसी का उद्देश्य आतंकवाद को वित्तीय सहायता पहुंचाने वाले हर व्यक्ति को कानून के दायरे में लाना है।
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