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जम्मू-कश्मीर में बड़ा एक्शन! अलगाववादियों का महिमामंडन करने वाली किताबों पर FIR, 8 अधिकारी सस्पेंड; प्रकाशकों पर छापेमारी

JAMMU KASHMIR NEWS: जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्कूली पुस्तकालयों में कथित तौर पर अलगाववादियों और आतंकवादियों का महिमामंडन करने वाली पुस्तकों के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए आठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सरकार ने मामले में एफआईआर दर्ज कराने के साथ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं, जबकि संबंधित प्रकाशकों के ठिकानों पर छापेमारी कर महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।

जम्मू के काउंटर इंटेलिजेंस पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एफआईआर संख्या 3/2026 दर्ज की गई है। जांच एजेंसियां मामले की हर पहलू से पड़ताल कर रही हैं।

दो पुस्तकों पर विवाद

जांच के दायरे में आई दो पुस्तकों में ‘पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जम्मू-कश्मीर’ और ‘पर्सनैलिटीज ऑफ जम्मू एंड कश्मीर’ शामिल हैं। इन पुस्तकों पर अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों का महिमामंडन करने का आरोप है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक पहली पुस्तक की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन और उधमपुर के स्कूलों में, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू और बारामूला के विद्यालयों में वितरित की गई थीं। सरकार का कहना है कि इन पुस्तकों की सामग्री कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

JAMMU KASHMIR NEWS: लापरवाही पर अधिकारियों पर कार्रवाई

सरकार ने पुस्तकों की अनुशंसा करने वाली उपसमिति और संबंधित पर्यवेक्षण अधिकारियों को गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित अधिकारियों में फजिल इमरान सिद्दीकी, गुरजीत सिंह, संजीव शर्मा, शाजिया कौसर, इम्तियाज अहमद मीर, निरंजन शर्मा, रेनू मेंगी और राजमोहिनी शामिल हैं। इसके अलावा समग्र शिक्षा विभाग में संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर असिस्टेंट शेख सुहेल अहमद की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।

30 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

सरकार ने मामले की विभागीय जांच के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अश्वनी कुमार को जांच अधिकारी तथा जेकेएएस अधिकारी रोहित शर्मा को प्रेजेंटिंग ऑफिसर नियुक्त किया है। जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी या भ्रामक सामग्री को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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