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कर्नाटक विधानसभा में संवैधानिक विवाद, राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने जॉइंट सेशन में केवल तीन लाइन पढ़ीं, बीच में ही बाहर निकले

Karnataka Assembly:

Karnataka Assembly: कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने गुरुवार को राज्य विधानमंडल के संयुक्त सत्र (जॉइंट सेशन) को संबोधित किया, लेकिन उन्होंने सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण की केवल तीन पंक्तियां पढ़ीं और इसके बाद सदन से बाहर चले गए। राज्यपाल का यह कदम राजनीतिक और संवैधानिक विवाद का कारण बन गया। गौरतलब है कि एक दिन पहले राज्यपाल ने जॉइंट सेशन को संबोधित करने से इनकार कर दिया था। ऐसे में गुरुवार को उनका आंशिक संबोधन सत्ता पक्ष के लिए चौंकाने वाला रहा।

सीएम सिद्धारमैया बोले यह संविधान का उल्लंघन

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल के व्यवहार को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 के तहत राज्यपाल को मंत्रिमंडल द्वारा तैयार किया गया पूरा भाषण पढ़ना अनिवार्य होता है।

सीएम ने कहा
“राज्यपाल ने अपनी मर्जी से भाषण अधूरा छोड़ा। यह संविधान का उल्लंघन है। वे केंद्र सरकार की कठपुतली की तरह काम कर रहे हैं।”

Karnataka Assembly: मनरेगा वाले पैरा पर नाराज थे राज्यपाल

सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्यपाल गहलोत सरकार के तैयार भाषण के पैरा नंबर 11 से नाराज थे। इस हिस्से में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया गया था कि उसने यूपीए सरकार के समय शुरू हुई मनरेगा (MGNREGA) योजना को कमजोर किया और उसका बजट घटाया, जिससे ग्रामीण रोजगार प्रभावित हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी

Karnataka Assembly: ‘शेम-शेम’ के नारे, सदन में हंगामा

राज्यपाल के अचानक सदन से बाहर निकलने के बाद सत्तापक्ष के मंत्री और विधायक हैरान रह गए। कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल सहित कई मंत्रियों ने राज्यपाल से भाषण पूरा करने का आग्रह किया, लेकिन वे वापस नहीं लौटे। इस दौरान कांग्रेस के कुछ विधायक और एमएलसी नारेबाजी करते हुए राज्यपाल के पास जाने की कोशिश करने लगे, जिन्हें सुरक्षा कर्मियों ने रोक दिया। कांग्रेस सदस्यों ने ‘शेम-शेम’ और ‘धिक्कार-धिक्कार, राज्यपालरिगे धिक्कार’ के नारे लगाए। वहीं भाजपा विधायकों ने जवाब में भारत माता की जय के नारे लगाए।

राष्ट्रगान को लेकर भी उठा विवाद

पूरे घटनाक्रम के बाद विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। कानून मंत्री एच.के. पाटिल के भाषण को प्राथमिकता दी गई, जिस पर भाजपा ने आपत्ति जताई। पाटिल ने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने अपने संबोधन के बाद राष्ट्रगान के लिए रुके बिना सदन छोड़ दिया, जो सदन की परंपरा और राष्ट्रगान दोनों का अपमान है।

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