Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी के पलिया विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने न केवल न्यायपालिका पर जनता के विश्वास को मजबूत किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि यदि जनप्रतिनिधि संवेदनशील हो, तो गरीबों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। गांव नारंग (सलावतनगर) में पिछले छह महीनों से जो डर और सन्नाटा पसरा हुआ था, वह माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद ‘विजय उत्सव’ में बदल गया है। पलिया के लोकप्रिय भाजपा विधायक रोमी साहनी की व्यक्तिगत पैरवी और मानवीय दृष्टिकोण के कारण आज 30 गरीब परिवारों के सिर से छत छिनने का खतरा टल गया है।
अब पढ़े क्या है मामला…
मामले की जड़ें कुछ समय पूर्व गांव नारंग के ही एक निवासी मलकीत सिंह द्वारा माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ में दायर की गई एक रिट याचिका से जुड़ी हैं। इस कानूनी विवाद के चलते गांव के लगभग 30 गरीब परिवारों के घरों को अवैध मानते हुए उन्हें गिराने का आदेश जारी हो गया था। यह आदेश उन परिवारों के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं था, जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर एक छोटा सा आशियाना बनाया था। पिछले छह महीनों से गांव नारंग (सलावतनगर) में मातम जैसा माहौल था। छोटे-छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के चेहरे पर बेघर होने का खौफ साफ देखा जा सकता था। प्रशासन की कार्रवाई की तलवार हर पल इन गरीबों की गर्दन पर लटकी हुई थी। ग्रामीण दर-दर भटक रहे थे, लेकिन उन्हें कहीं से कोई ठोस उम्मीद नहीं मिल रही थी।

Lakhimpur Kheri: फरियाद लेकर विधायक के पास पहुंचा परिवार
जब हारकर ये गरीब परिवार अपनी फरियाद लेकर पलिया विधायक रोमी साहनी के द्वार पहुंचे, तो विधायक ने मामले की गंभीरता को समझा। उन्होंने तुरंत इन परिवारों को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि वे किसी भी कीमत पर गरीबों का घर उजड़ने नहीं देंगे। विधायक रोमी साहनी ने केवल आश्वासन ही नहीं दिया, बल्कि अपने निजी खर्च और प्रयासों से माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ में गरीबों का पक्ष रखने के लिए प्रदेश के जाने-माने अधिवक्ताओं, श्री प्रशांत सिंह गौड़ और श्री विक्रांत सिंह को नियुक्त किया। विधायक ने स्वयं अधिवक्ताओं के साथ बैठक की और उन्हें निर्देश दिया कि कोर्ट में गरीबों की दयनीय स्थिति और सच्चाई को पूरी मजबूती के साथ रखा जाए।
माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ में जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो विधायक द्वारा नियुक्त दोनों अधिवक्ताओं ने बेहद प्रभावशाली और तथ्यों पर आधारित बहस की। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि जिन घरों को तोड़ने का आदेश हुआ है, उनमें रहने वाले लोग अत्यंत निर्धन हैं। अधिवक्ताओं ने सबसे बड़ा तर्क मानवीय संवेदना का रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश भीषण ठंड की चपेट में है। ऐसे में यदि इन 30 परिवारों के घरों को जमींदोज कर दिया गया, तो ये मासूम बच्चे और महिलाएं इस कड़ाके की ठंड में कहां जाएंगे? उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक आवास नहीं है। माननीय उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण को अत्यंत गंभीरता से लिया। न्यायालय ने महसूस किया कि न्याय का उद्देश्य लोगों को संरक्षण देना है, न कि उन्हें बेसहारा छोड़ना। तथ्यों और मानवीय आधार को देखते हुए कोर्ट ने तुरंत ध्वस्तीकरण के आदेश पर ‘स्टे’ (रोक) लगा दी। इस आदेश के आते ही गरीबों की कानूनी जीत सुनिश्चित हो गई।
विधायक आवास पर जश्न
जैसे ही यह खबर गांव नारंग पहुंची, पूरा गांव खुशी से झूम उठा। ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं और बुजुर्ग, नम आंखों के साथ विधायक रोमी साहनी का धन्यवाद करने उनके आवास पहुंचे। यह दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था। विधायक रोमी साहनी ने अपनी सादगी और सेवाभाव का परिचय देते हुए स्वयं अपने हाथों से गरीब ग्रामीणों को मिठाई खिलाई। गांव की महिलाओं ने भावुक होकर विधायक रोमी साहनी का माल्यार्पण किया और उन्हें दुआएं दीं। महिलाओं का कहना था कि, “विधायक जी हमारे लिए भगवान बनकर आए हैं, अगर आज वो हमारी मदद न करते तो हम सड़क पर आ जाते।”
Report By: संजय कुमार राठौर
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