Lifestyle: सनातन धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। इसके पांच अंग – तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार – के आधार पर शुभ-अशुभ समय का निर्धारण होता है। दृक पंचांग के अनुसार, 13 फरवरी को कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है, जो दोपहर 2 बजकर 25 मिनट तक रहेगी। एकादशी तिथि 12 फरवरी की दोपहर 12 बजकर 22 मिनट से प्रारंभ होगी। उदयातिथि के अनुसार इसका पूरे दिन मान होगा। फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की इस एकादशी को विजया एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह व्रत बहुत फलदायी माना जाता है।
Lifestyle: भगवान श्री राम ने रखा था एकादशी का व्रत
धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पहले इसी एकादशी का व्रत रखा था। इसलिए इसे विजया एकादशी कहा जाता है। इस व्रत को करने से भक्तों के रोग और शोक दूर होते हैं, शत्रु पराजित होते हैं और जीवन के हर क्षेत्र में विजय प्राप्त होती है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में भी सफलता मिलने की संभावना बताई जाती है। इसके साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। इस दिन चंद्रमा धनु राशि में रहेगा। नक्षत्र मूल रहेगा, जो शाम 4 बजकर 12 मिनट तक होगा, उसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू होगा। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 10 मिनट पर होगा।
राहुकाल का ध्यान रखना आवश्यक
Lifestyle: शुभ कार्यों के लिए राहुकाल का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। राहुकाल सुबह 11 बजकर 12 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। इस दौरान कोई भी नया या शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। अन्य अशुभ समय में यमगण्ड दोपहर 3 बजकर 23 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक और गुलिक काल सुबह 8 बजकर 25 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 18 मिनट से लेकर 6 बजकर 10 मिनट तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 27 मिनट से लेकर शाम तीन बजे तक होगा, जिसे उत्तम माना गया है। विजया एकादशी का व्रत पारण 13 फरवरी को एकादशी तिथि समाप्त होने के बाद द्वादशी में किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करें, व्रत कथा सुनें और फलाहार या जल ग्रहण करें।
Written by: Yamini yadav
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