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क्या 9 साल में पीएम मोदी का दूसरा भारत-इजरायल दौरा रचेगा दोस्ती का नया इतिहास?

Modi's Israel visit: क्या 9 साल में पीएम मोदी का दूसरा भारत-इजरायल दौरा रचेगा दोस्ती का नया इतिहास?

Modi’s Israel visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 25 फरवरी 2026 को इजरायल की दो दिवसीय यात्रा पर जा रहे हैं। वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि पीएम मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं बल्कि कई बड़े रक्षा और रणनीतिक समझौतों की जमीन तैयार करेगी। इजरायल के प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भारत की प्रशंसा करते हुए पीएम मोदी को अपना ‘घनिष्ठ मित्र’ बताया है, जिससे स्पष्ट है कि इजरायल इस दौरे को लेकर कितना उत्साहित है।

Modi’s Israel visit: ऐतिहासिक संबंधों का नया पड़ाव

भारतीय कूटनीति के इतिहास में पीएम मोदी का यह दूसरा इजरायल दौरा कई मायनों में खास है। साल 2017 में मोदी इजरायल की धरती पर कदम रखने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे और अब लगभग 9 साल बाद उनकी यह वापसी दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों को दर्शाती है। हालांकि भारत और इजरायल के बीच औपचारिक संबंध 1992 में नरसिम्हा राव सरकार के दौरान शुरू हुए थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में यह रिश्ता महज व्यापार से ऊपर उठकर एक अटूट रणनीतिक साझेदारी में बदल गया है। अतीत में भी चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान इजरायल ने भारत की गुप्त रूप से मदद की थी, जिसने आज के मजबूत रिश्तों की बुनियाद रखी।

Modi’s Israel visit: मिशन सुदर्शन और अभेद्य सुरक्षा कवच

इस यात्रा का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु भारत की सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करना है। भारत वर्तमान में ‘मिशन सुदर्शन’ पर काम कर रहा है, जिसका लक्ष्य देश को दुश्मन की मिसाइलों से पूरी तरह सुरक्षित रखना है। इस मिशन को सफल बनाने के लिए इजरायल की एरो (Arrow) और आयरन डोम (Iron Dome) जैसी विश्व प्रसिद्ध तकनीकें भारत के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बैठक के दौरान दोनों नेता बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली और गाइडेड लेजर हथियारों के सह-उत्पादन पर बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। यह सहयोग न केवल भारत की सैन्य शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत घरेलू रक्षा विनिर्माण को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

 

हेक्सागन एलायंस और कट्टरपंथ के खिलाफ मोर्चा

प्रधानमंत्री नेतन्याहू का ‘हेक्सागन एलायंस’ का विजन इस दौरे का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। इस प्रस्तावित गठबंधन में भारत के साथ अरब, अफ्रीकी और यूरोपीय देशों को शामिल करने की योजना है, जिसका उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ कमाना नहीं बल्कि कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ एक साझा मोर्चा बनाना है। यह विजन भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (IMEC) के उद्देश्यों से मेल खाता है। पीएम मोदी और नेतन्याहू के बीच होने वाली चर्चा में इस कॉरिडोर को फिर से पटरी पर लाने पर जोर दिया जाएगा, जो भविष्य में भारत को खाड़ी देशों के रास्ते यूरोप से जोड़ने का सबसे छोटा और सस्ता मार्ग बनेगा।

भविष्य की तकनीक और आर्थिक साझेदारी

रक्षा और कूटनीति के अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक पर भी दोनों देशों की नजर है। हाल ही में भारत में हुए एआई समिट में इजरायल की सक्रिय भागीदारी ने साफ कर दिया था कि दोनों देश इस उभरती तकनीक में साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। कृषि और जल प्रबंधन के क्षेत्र में भी इजरायल की विशेषज्ञता भारत के लिए काफी मददगार साबित हो रही है। व्यापारिक दृष्टि से देखें तो भारत आज इजरायल का दूसरा सबसे बड़ा एशियाई व्यापारिक साझेदार है। अडानी समूह द्वारा हाइफा बंदरगाह का अधिग्रहण और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में बढ़ता निवेश इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद दोनों देशों के आर्थिक हित एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।

इस दौरे के साथ ही भारत और इजरायल के बीच की यह ‘सदाबहार दोस्ती’ एक ऐसे युग में प्रवेश कर रही है जहाँ सुरक्षा, तकनीक और आर्थिक विकास के साझा लक्ष्य पूरी दुनिया के लिए एक नया उदाहरण पेश करेंगे।

 

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