Home » धर्म » 16 अप्रैल मासिक शिवरात्रि: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और शिव कृपा पाने के आसान उपाय

16 अप्रैल मासिक शिवरात्रि: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और शिव कृपा पाने के आसान उपाय

मासिक शिवरात्रि 2026

Monthly Shivratri 16 April: देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित मासिक शिवरात्रि इस बार गुरुवार, 16 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती को अत्यंत प्रिय मानी जाती है। हर महीने मासिक शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर आती है।

चतुर्दशी तिथि और ज्योतिषीय विवरण

इस बार बैशाख मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 16 अप्रैल को रात 8 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। लेकिन उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन चतुर्दशी तिथि का ही महत्व रहेगा। गुरुवार को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 55 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगा। नक्षत्र उत्तर भाद्रपद दोपहर 1 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, इसके बाद रेवती नक्षत्र शुरू हो जाएगा। योग इन्द्र सुबह 10 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।

मासिक शिवरात्रि 2026
मासिक शिवरात्रि 2026

पूजा विधि और महत्व

मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन शाम के प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही बेलपत्र, आक के फूल, सफेद चंदन और धतूरा अर्पित करना बहुत फलदायी माना गया है। इस दिन मंत्र जाप भी अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से मानसिक शांति मिलती है, पारिवारिक सुख बढ़ता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही भक्तों की सभी इच्छाएं भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से पूरी होती हैं।

Monthly Shivratri 16 April: शुभ मुहूर्त (दृक पंचांग अनुसार)

दृक पंचांग के अनुसार इस दिन के प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार रहेंगे  ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 26 मिनट से 5 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक होगा। अमृत काल सुबह 9 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 58 मिनट तक रहेगा और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 46 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक रहेगा।

Monthly Shivratri 16 April: मासिक शिवरात्रि 2026
मासिक शिवरात्रि 2026

अशुभ समय (राहुकाल और अन्य काल)

वहीं अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 1 बजकर 58 मिनट से 3 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। यमगंड सुबह 5 बजकर 55 मिनट से 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9 बजकर 8 मिनट से 10 बजकर 45 मिनट तक रहेगा और दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 12 मिनट से 11 बजकर 4 मिनट तक रहेगा।

ये भी पढ़ें…जहां हनुमान जी भक्तों के चढ़ाते ही चट कर जाते हैं प्रसाद के लड्डू, पी लेते हैं दूध और पानी