New Delhi: सोशल मीडिया पर बनी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को पहले हल्के में लिया जा रहा था, लेकिन अब यह जमीन पर भी सक्रिय है।हालांकि CJP राजनीतिक रूप से कितनी सफल हो पाती है, यह तो भविष्य में ही पता लग पाएगा, लेकिन फिलहाल इसने विपक्षी पार्टियों की नींद अवश्य उड़ा दी है। उन्हें छात्रों के समर्थन में उतरने को विवश होना पड़ा है।आज वे छात्रों के मसले पर सड़क से लेकर संसद तक विरोध दर्ज करा रहे हैं।
विपक्षी पार्टियों से कहां चूक हुई?
दरअसल, NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी एक ऐसा संवेदनशील मुद्दा है जिस पर छात्रों और युवाओं का आक्रोश स्वाभाविक है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस मुद्दे को देश की स्थापित विपक्षी पार्टियों से पहले लपक दिया। नतीजा यह हुआ कि CJP के आह्वान पर जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। यदि विपक्षी पार्टियों ने कॉकरोच जनता पार्टी से पहले छात्रों के मुद्दे पर विरोध-प्रदर्शन के कार्यक्रम दिये होते तो निश्चित ही युवा और छात्र उनके आह्वान पर भी जुटते, लेकिन यही उनकी बड़ी चूक है।
New Delhi: विपक्ष को कैसे नुकसान होगा?
यदि कॉकरोच जनता पार्टी Gen-Z को आकर्षित कर इसी तरह आगे बढ़ती रही, तो फिर परंपरागत विपक्ष के क्या मायने रह जाएंगे ? कल यह पार्टी राजनीतिक धरातल पर जड़ें जमा लेती है, तो फिर नुकसान किसका होगा ? इस बात की क्या गारांटी है कि CJP के समर्थक सत्ता पक्ष को ही नुकसान पहुंचाएंगे और विपक्ष के वोटों में सेंध नहीं लगाएंगे?
New Delhi: विपक्षी वोटों का विभाजन
सोचने वाली बात है कि आज कॉकरोच जनता पार्टी से जो छात्र और युवा जुड़ रहे हैं, उनमें से एक बहुत बड़ी संख्या विपक्ष अथवा ‘इंडिया’ गठबंधन का समर्थन करने वालों की हो सकती है।यदि भविष्य में Gen-Z के कुछ वोट कॉकरोच जनता पार्टी में जाते हैं और कुछ विपक्ष अथवा ‘इंडिया’ गठबंधन को मिलते हैं, तो इसका फायदा किसे मिलेगा? वोटों के बंटने से क्या विपक्ष कमजोर नहीं होगा? क्या बोटों के बंटने का फायदा सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन अथवा भारतीय जनता पार्टी (BJP) को नहीं मिलेगा? ये कुछ इस तरह के सवाल हैं, जिन्हें शायद विपक्ष अब गंभीरता से ले रहा है।
New Delhi: विपक्ष की सक्रियता के मायने
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर लगातर यह सवाल उठते रहे हैं कि वे न तो सोनम वांगचुक से मिलने पहुंचे और न कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले विरोध जता रहे प्रदर्शनकारियों के बीच पहुंचे। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक राहुल गांधी को अहसास है कि कॉकरोच जनता पार्टी भविष्य में कांग्रेस या इंडिया गठबंधन के लिए ही नुकसानदायक होगी इसलिए उन्होंने किनारे रहना उचित समझा, लेकिन अब अब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला।विपक्षी पार्टियों के सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे और विरोध दर्ज किया।राजनीतिक जानकार इसे अपना जनाधार बचाने और बनाने के तौर पर देख रहे हैं।







