New Delhi News: विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ करीब डेढ़ घंटे तक चली महत्वपूर्ण बैठक में कई संवैधानिक और स्वायत्त संस्थाओं की नियुक्तियों पर अपना कड़ा रुख पेश किया। बैठक का मुख्य एजेंडा मुख्य सूचना आयुक्त ,आठ सूचना आयुक्तों और एक सतर्कता आयुक्त की नियुक्तियाँ थीं।यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब सुप्रीम कोर्ट भी लंबे समय से खाली पड़े संवैधानिक पदों को भरने में हो रही देरी पर केंद्र सरकार से जवाब मांग रहा है।
राहुल गांधी ने दिया असहमति-पत्र, प्रतिनिधित्व पर उठाए बड़े सवाल
बैठक में राहुल गांधी ने नियुक्तियों की प्रक्रिया पर अपना विस्तृत असहमति-पत्र सौंपा। सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी ने बातचीत को केवल चयन प्रक्रिया तक सीमित न रखते हुए, देश की प्रमुख संस्थाओं में सामाजिक न्याय, समान प्रतिनिधित्व और विविधता के सवालों को बेहद दृढ़ता से उठाया।राहुल ने कहा कि उच्च स्तर की नियुक्तियाँ ऐसी होनी चाहिए जो देश के सभी वर्गों विशेषकर ओबीसी, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदायों की वास्तविक भागीदारी को दर्शाएँ। उनका आरोप था कि अभी कई महत्वपूर्ण पदों पर इन वर्गों की भूमिका लगभग नगण्य है, जबकि ये लोग देश की बड़ी आबादी का हिस्सा हैं।
New Delhi News: CEC की स्वतंत्रता पर चल रही बहस के बीच अहम बातचीत
मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया और उसकी स्वतंत्रता पर पिछले कुछ दिनों से मचा राजनीतिक हंगामा भी इस बैठक की पृष्ठभूमि में रहा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को सीमित करने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी ने बैठक में इस मुद्दे का सीधे तौर पर उल्लेख करते हुए कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएँ तभी मजबूत होंगी जब उनमें पारदर्शिता और निष्पक्षता पूरी तरह बरकरार रहे।
प्रतिनिधिक न्याय की मांग, सरकार से संतुलित चयन प्रक्रिया पर जोर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने यह स्पष्ट किया कि नियुक्तियों में समावेश और संतुलन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उच्च संस्थानों में देश के विविध सामाजिक समूहों को सही तरह से जगह नहीं मिलेगी, तो यह लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करेगा।
New Delhi News: बैठक समाप्त, लेकिन मतभेद कायम
90 मिनट की इस महत्वपूर्ण बातचीत के बाद भी दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। माना जा रहा है कि राहुल गांधी इस मामले को संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों पर आगे भी मजबूती से उठाते रहेंगे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओ के अनुसार राहुल गाँधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने यह स्पष्ट किया की
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