New Delhi News: संसद के शीतकालीन सत्र के नौवें दिन वंदे मातरम को लेकर बहस ने जोर पकड़ लिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सदन में कहा कि उनका उद्देश्य भारत के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करना नहीं है, बल्कि वंदे मातरम को उसके ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के अनुरूप सम्मान दिलाना है।
नेहरू पर जिम्मेदारी का आरोप
नड्डा ने कहा कि जब किसी घटना के लिए जिम्मेदारी तय करनी हो तो उस समय के शासक ही जिम्मेदार होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय देश की सरकार के नेता नेहरू ही थे, इसलिए वंदे मातरम को उचित सम्मान न मिलने की जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी। नड्डा ने कहा, “आप अपनी सुविधा के अनुसार श्रेय ले सकते हैं, लेकिन जिम्मेदारी भी तभी निभानी होगी।”
संसद में नड्डा का यह बयान सुनते ही विपक्ष ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बिना रुके अपनी बात रखी। हंगामे के बीच उन्होंने कहा कि उनके सीधेपन का अनुचित लाभ नहीं उठाया जाना चाहिए।
New Delhi News:राष्ट्रगीत और संविधान सभा पर निशाना
नड्डा ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रध्वज पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वे राष्ट्रगान का पूरी इज्जत करते हैं, लेकिन संविधान सभा में नेशनल एंथेम पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। उनका कहना था कि 24 जनवरी 1950 को भारत के राष्ट्रीय गान के लिए कोई बहस या डिबेट नहीं हुई, जबकि वंदे मातरम के मामले में उपेक्षा की गई।
सांप्रदायिक दबाव में हुआ बदलाव
नड्डा ने बताया कि वंदे मातरम के कुछ छंदों में सांप्रदायिक दबाव के कारण बदलाव किया गया। 1937 में कलकत्ता कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में यह तय हुआ कि राष्ट्रीय कार्यक्रमों में केवल पहले दो छंद ही गाए जाएँ, क्योंकि मुस्लिम नेताओं ने कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी। नेहरू की अध्यक्षता में यह बदलाव किया गया और उन छंदों को हटा दिया गया जिनमें भारत माता को हथियारधारी मां दुर्गा के रूप में दिखाया गया था।
New Delhi News: कांग्रेस की समझौता नीति पर आलोचना
उन्होंने कांग्रेस के समय के समझौते और राजनीतिक फैसलों पर भी निशाना साधा। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग की मांगों को स्वीकार किया और कई मुद्दों पर समझौते किए। वंदे मातरम को भी इसी तरह कुछ छंदों तक सीमित कर दिया गया।
वंदे मातरम को सम्मान दिलाने की जरूरत
नड्डा ने सदन में जोर देकर कहा कि वंदे मातरम को वह सम्मान मिलना चाहिए जो राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय ध्वज को मिलता है।उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य यह है कि वंदे मातरम को उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अहमियत के अनुरूप सम्मान मिले, और यह सुनिश्चित हो कि किसी भी प्रधानमंत्री के समय इसे नजरअंदाज न किया जाए।”
New Delhi News:राजनीतिक हलकों में बहस जारी
इस बहस ने शीतकालीन सत्र में वंदे मातरम के महत्व और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। अब राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर गहन चर्चाएँ जारी हैं।
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